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श्री कुबेर चालीसा: Shri kubera chalisa
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श्री कुबेर जी की आरती इमेज फॉर्मेट में: kuber devta ki aarti image
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ऋण मोचन मंगल स्त्रोत | Rin Mochan Mangal Stotra
दुर्गा आरती: जय अम्बे गौरी| Durga aarti om jai ambe gauri
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गणेश आरती, चालीसा और अथर्वशीर्ष पाठ | ganesh aarti chalisa atharvashirsha path
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श्री गणेश जी की आरती| ganesh ji ki aarti
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Hartalika teej vrat katha: हरतालिका तीज व्रत की आरती, चालीसा और कथा
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गंगा दशहरा 2026: माता गंगा की पूजा विधि, आारती, चालीसा, मंत्र, पाठ और लाभ
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श्री कुलदेवी स्तोत्रम् | Shri kuldevi stotram
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सीता माता चालीसा | Sita Mata Chalisa
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Hanuman jayanti 2026: हनुमान पूजा सामग्री, विधि, शुभ मुहूर्त, आरती, मंत्र, प्रसाद, चालीसा, कथा और लाभ
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Lord rama stotram: मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अमृतस्तोत्रम्
Wednesday, March 25, 2026
Jhulelal jayanti: भगवान झुलेलाल की आरती, पूजा विधि, मंत्र, चालीसा, कथा
Thursday, March 19, 2026
श्री विष्णु षोडश नाम स्तोत्र | Shri vishnu shodash naam stotram
Monday, March 2, 2026
मकर संक्रांति का अर्थ, पूजा विधि, आरती, चालीसा, लाभ और पूछे जाने वाले प्रश्न | Makar Sankranti Aarti Chalisa
Sunday, January 11, 2026
शाकंभरी माता की आरती हिंदी– अर्थ, लाभ और पाठ विधि | Shakambari mata ki aarti
Friday, January 9, 2026
बाबा खाटू श्याम आरती हिंदी– अर्थ, लाभ और पाठ विधि | Baba Khatu Shyam Aarti
Friday, January 9, 2026
श्री दत्तात्रेय दत्ताची आरती: Dattatreya aarti
Tuesday, December 2, 2025
श्री काल भैरव अष्टक
Friday, November 7, 2025
करवा चौथ माता की आरती- 2: Jai karwa chauth mata ki aarti
Thursday, October 9, 2025
करवा चौथ माता की आरती: karva chauth mata ki aarti
Wednesday, October 8, 2025
श्री कनक दुर्गा नंद लहरी: Sri Kanakadurga Anandalahari
Saturday, September 27, 2025
हर संकट से मुक्ति दिलाता है मां दुर्गा का यह चमत्कारी पाठ, जानिए फायदे और विधि
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गणेश आरती, सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची जयदेव जयदेव | Ganesh Aarti Sukh Karta Dukh Harta Jaidev Jaidev
Tuesday, August 26, 2025
शिव पंचाक्षर स्तोत्र | Shiva panchakshar stotra
Thursday, July 17, 2025
।। महर्षि भृगु साठिका ।।
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श्री तारकेश्वर स्तोत्रम् | Sri Tarakeshwar Stotram
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Thursday, July 3, 2025
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भाई दूज पर क्यों लगाया जाता है तिलक? बहनें क्यों खिलाती हैं भाई को पान? जानें इसका पौराणिक महत्व
Bhai Dooj 2026: भाई दूज (यम द्वितीया) सनातन धर्म में भाई-बहन के अटूट प्रेम, सम्मान और समर्पण का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। यह त्योहार हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। 5 दिवसीय दिवाली उत्सव का यह अंतिम और पांचवां दिन होता है। इस दिन भाई का बहन के घर जाकर तिलक करवाना और भोजन करना अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है। बहनें इस दिन व्रत रखकर अपने भाइयों के लंबे जीवन, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की ईश्वर से प्रार्थना करती हैं। भाई दूज पर बहनें भाई को तिलक क्यों लगाती हैं और उन्हें पान क्यों खिलाती हैं एवं इस पर्व के पौराणिक महत्व के बारे में आइए जानते हैं विस्तार से...
Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 04 नवंबर 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय
04 November 2026 Today Shubh Muhurat: क्या आप आज कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं? या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले हैं? ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य को सही मुहूर्त में करने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है। 'वेबदुनिया' आपके लिए लेकर आया है 04 नवंबर, 2026 का विशेष पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त।
कब है गोवर्धन पूजा? पूजन में क्या-क्या चढ़ाया जाता है? जानें सामग्री और अन्नकूट के व्यंजन की लिस्ट
Govardhan Puja 2026: दीपावली का उत्सव केवल रोशनी और खुशियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके साथ कई धार्मिक परंपराएं भी जुड़ी होती हैं। इन्हीं में से एक है गोवर्धन पूजा, जिसे दीपावली के अगले दिन श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन स्वरूप की पूजा की जाती है। घरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। आइए जानते हैं कि गोवर्धन पूजा के लिए किन-किन सामग्रियों की जरूरत होती है और अन्नकूट महोत्सव में कौनसे व्यंजन बनाए जाते हैं...
Diwali 2026: नरक चतुर्दशी पर क्यों मनाई जाती है काली चौदस और मां काली को प्रसन्न करने के 5 अचूक उपाय
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली के नाम से जाना जाता है। इसी पावन रात्रि में 'काली चौदस' का पर्व मनाने की परंपरा है। जब चतुर्दशी तिथि रात्रि में प्रदोष काल और निशिथ काल (मध्यरात्रि) में व्याप्त होती है, तब महाकाली की यह विशेष पूजा संपन्न की जाती है।
4 या 5 नवंबर, कब है रमा एकादशी?
Rama Ekadashi 2026: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'रमा एकादशी' के नाम से जाना जाता है। दिवाली से ठीक पहले आने वाली यह एकादशी अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी जाती है। 'रमा' माता लक्ष्मी का ही एक नाम है, इसलिए इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु के साथ-साथ धन-वैभव की देवी महालक्ष्मी की भी विशेष आराधना की जाती है।
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दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए? कहां-कहां जलाते हैं ये दीप? जानिए परंपरा का महत्व
Deepawali 2026: दीपावली का त्योहार रोशनी, खुशियों और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों को दीपों से सजाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि दीपक जलाने से घर का अंधकार दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली का आगमन होता है। दीपावली की रात लोग अपने घर के मुख्य द्वार से लेकर पूजा स्थल, आंगन, तुलसी चौरा और छत तक दीपक जलाते हैं। आइए जानते हैं दीपावली पर कितने दीपक जलाना शुभ माना जाता है? इन्हें घर में किन-किन स्थानों पर रखना चाहिए और दीप जलाने के पीछे कौनसी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं?
नरक चतुर्दशी पर कितने दीपक जलाए जाते हैं? जानिए इन दीपों से जुड़ी मान्यताएं और महत्व
Naraka Chaturdashi 2026: दीपावली के 5 दिवसीय पर्व में नरक चतुर्दशी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इसे छोटी दिवाली, रूप चतुर्दशी और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर दीपदान की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार के सदस्यों की लंबी आयु की कामना पूरी होती है। आइए जानते हैं कि नरक चतुर्दशी पर कितने दीपक जलाने चाहिए? इन्हें कहां रखना चाहिए और दीपदान का क्या है धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं?
धनतेरस पर बन रहा है दुर्लभ शुभ योग, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, मिलेगा बड़ा लाभ
06 नवंबर 2026 को त्रयोदशी तिथि, प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न का अद्भुत संयोग बन रहा है, जिससे इसी दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। 06 अंक शुक्र का अंक है और इस दिन शुक्रवार भी है। शुक्रवार की देवी लक्ष्मी हैं जो कि धन की देवी हैं। 06 नवंबर 2026, शुक्रवार के दिन धनतेरस पर कई अत्यंत शुभ योग, मुहूर्त और नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो खरीदारी, निवेश और लक्ष्मी-धन्वंतरि पूजा के लिए बहुत फलदायी माने जाते हैं:-
धनतेरस पर कितने दीपक जलाने चाहिए? कहां-कहां जलाना होता है शुभ? जानिए क्या है धार्मिक महत्व?
Dhanteras 2026: हिंदू धर्म में धनतेरस का पर्व दीपावली के 5 दिवसीय उत्सव की शुरुआत माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने के साथ ही दीपदान का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम घर के अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाने से सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। आइए जानते हैं धनतेरस पर कितने और कहां-कहां दीपक जलाने चाहिए एवं क्या है इसका धार्मिक महत्व...
Dhanteras Yam Deepak 2026: धनतेरस पर यम दीपम का सही समय क्या है? जानें क्यों जलाया जाता है यह दीपक
yama deepam date time: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी धनतेरस का त्योहार सिर्फ धन और समृद्धि के लिए कुबेर देव व माता लक्ष्मी की पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए 'यम दीपदान' (यम दीपम) करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि धनतेरस की शाम को यमराज के निमित्त दीप जलाने से घर के सदस्यों को दीर्घायु प्राप्त होती है और अकाल मृत्यु का संकट टलता है। आइए जानते हैं धनतेरस पर यम दीपम का सही समय, सामग्री और पूरी पूजन विधि।
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