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Papankusha Ekadashi story : मनोवांछित फल देने वाली पापांकुशा एकादशी 9 अक्टूबर को, पढ़ें प्रामाणिक कथा

मंगलवार,अक्टूबर 8, 2019
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आश्विन मास के श्राद्ध पक्ष में आने वाली एकादशी 'इंदिरा एकादशी' के नाम से जनमानस में प्रसिद्ध है। इस वर्ष यह एकादशी 25 सितंबर 2019, बुधवार को है। मत-मतांतर तथा तिथियों के मतभेद के चलते कई स्थानों पर यह 24 सितंबर, मंगलवार को भी मनाई जाएगी।
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भाद्रपद शुक्ल एकादशी पद्मा/परिवर्तिनी एकादशी, जयंती और जलझूलनी एकादशी भी कहलाती है। इसका व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
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शास्त्रों में एकादशी व्रत का काफी महत्‍व है। भाद्रपद मास में आने वाली इस एकादशी का व्रत रखने से भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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भारतीय हिन्दू संस्कृति में हर महीने की 11वीं तिथि यानी एकादशी (ग्यारस) को व्रत-उपवास किया जाता है। यह तिथि अत्यंत पवित्र तिथि मानी गई है। वर्षभर के प्रत्येक मास में 2 एकादशी तिथियां आती हैं
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श्रावण माह में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को कामिका एकादशी कहते है। इस बार यह एकादशी 28 जुलाई 2019, रविवार को मनाई जा रही है। इस एकादशी का महत्व एवं कथा यहां पढ़ें...
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देवशयनी एकादशी : पौराणिक व्रत कथा- सूर्यवंश में मांधाता नाम का एक चक्रवर्ती राजा हुआ है, जो सत्यवादी और महान प्रतापी था। वह अपनी प्रजा का पुत्र की भांति पालन किया करता था।
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देवशयनी एकादशी आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानि 12 जुलाई 2019 को है। देवशयनी एकादशी के दिन से देवउठनी एकादशी तक भगवान श्रीहरि चार महीने के लिए पाताल लोक में शयन हेतु चले जाते हैं। इसलिए इस चार महीने को चातुर्मास कहा जाता है।
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आषाढ़ कृष्ण एकादशी का नाम योगिनी है। इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति देने वाली है। यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है।
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आषाढ़ कृष्ण ग्यारस के दिन योगिनी एकादशी मनाई जाती है। वर्ष 2019 में यह एकादशी 28 जून, शुक्रवार को मनाई जाएगी। आषाढ़ मास की इस एकादशी का महत्व तीनों लोक में प्रसिद्ध है।
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प्रतिदिन भगवान श्रीहरि का स्मरण करने से जीवन के समस्त संकटों का नाश होता है तथा धन-वैभव की प्राप्ति होती है। अगर प्रतिदिन कोई मंत्र न पढ़ सकें तो कम से कम किसी खास अवसर पर
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वृषभ और मिथुन की संक्रां‍‍ति के बीच ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी आती है, उसका नाम निर्जला है। इस एकादशी का पुण्य समस्त तीर्थों और दानों से अधिक है। केवल एक दिन मनुष्य निर्जल रहने से पापों से मुक्त हो जाता है।
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गुरुवार, 13 जून 2019 को निर्जला एकादशी मनाई जा रही है। भारतीय उपासना में निर्जला एकादशी का बहुत अधिक महात्म्य माना गया है।
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ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी निर्जला एकादशी या भीमसेनी एकादशी के नाम से विख्यात है। वैसे तो भारतीय जनमानस में आध्यात्मिक स्तर पर एकादशी व्रत सर्वाधिक लोकप्रिय व्रत है,
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ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु और उनके 5वें अवतार वामन ऋषि की पूजा की जाती है। आइए जानें अपरा एकादशी की व्रतकथा...
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सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नाम की एक नगरी में द्युतिमान नामक चंद्रवंशी राजा राज करता था। वहां धन-धान्य से संपन्न व पुण्यवान धनपाल नामक वैश्य भी रहता है।
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धार्मिक शास्त्रों के अनुसार एकादशी के व्रत-उपवास का बहुत महत्व है। खासकर एकादशी के दिन श्रीहरि विष्णु का पूजन करने और व्रत करने से मन की हर मुराद पूरी होती है।
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इस वर्ष मोहिनी एकादशी वैशाख शुक्ल एकादशी यानी 15 मई 2019, बुधवार को आ रहा है। अत: इस दिन व्रत-उपवास रखकर मोह-माया के बंधन से मु‍क्त होने के लिए यह एकादशी बहुत लाभदायी है।
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Varuthini Ekadashi 2019: वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम वरूथिनी है। यह सौभाग्य देने वाली, सब पापों को नष्ट करने वाली तथा अंत में मोक्ष देने वाली है।
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माह में 2 एकादशियां होती हैं अर्थात आपको माह में बस 2 बार और वर्ष के 365 दिनों में मात्र 24 बार ही नियमपूर्वक एकादशी व्रत रखना है। हालांकि प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिकमास होने से 2 एकादशियां जुड़कर ये कुल 26 होती हैं।
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