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कार्तिक पूर्णिमा 2020 : जानिए 8 जरूरी बातें

गुरुवार,नवंबर 26, 2020
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इस दिन विष्णु जी की कमल के फूलों से पूजा करनी चाहिए साथ ही भगवान शिव की पूजा भी करनी चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। जानते हैं वैकुंठ चतुर्दशी की कथा और व्रत का विधान...
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पौराणिक शास्त्रों में प्रदोष व्रत की बड़ी महिमा है। ऐसा माना जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिवशंकर कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते है।
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कार्तिक मास की पूर्णिमा को देव दिवाली मनाते हैं। इस बार की देव दिवाली बहुत ही शुभ संयोग में मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का संहार किया और भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। इसी दिन श्रीकृष्ण को आत्मबोध हुआ था और देवी तुलसी का ...
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देव उठनी एकादशी के दिन देवता जागृत होते हैं और कार्तिक पूर्णिमा के दिन वे यमुना तट पर स्नान कर दिवाली मानाते हैं। इसीलिए इसे देव दिवाली कहते हैं। आओ जानते हैं कार्तिक पूर्णिमा अर्थात देव दिवाली पर किए जाने काले 10 महत्वपूर्ण कार्य।
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वर्ष 2020 में कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर को आ रही है। यह अंतिम अवसर है इस पवित्र माह का जब एकसाथ समस्त देवी-देवताओं को प्रसन्न किया जा सकता है। यूं भी पूनम मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है। इस दिन मां लक्ष्मी की आराधना करने से जीवन में खुशियों की बहार ...
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इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर को आ रही है। इस अवसर पर भगवान भोलेनाथ शिव की यह कथा प्रचलित है।
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तारकासुर नाम का एक राक्षस था। उसके तीन पुत्र थे - तारकक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली...भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया।
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इस बार शुक्रवार, 27 नवंबर 2020 को शुक्र प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। शुक्रवार को पड़ने वाले व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन यह व्रत करने से सुख-समृद्धि, सौभाग्य तथा ऐश्वर्य प्राप्ति का वरदान मिलता है।
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भगवान विष्णु के वरदान से राजा दंभ के यहां एक पुत्र में जन्म लिया। इस पुत्र का नाम शंखचूड़ रखा गया। बड़ा होकर शंखचूड़ ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए पुष्कर में घोर तपस्या की।
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अंजनीपुत्र हनुमानजी एक कुशल प्रबंधन थे। ज्ञान, बुद्धि, विद्या और बल के साथ ही उनमें विनम्रता भी अपार थी। सही समय पर सही कार्य करना और कार्य को अंजाम तक पहुंचाने का उनमें चमत्कारिक गुण था। आओ जानते हैं कि किस तरह उनमें कार्य का संपादन करने की अद्भुत ...
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आज 25 नवंबर 2020 दिन बुधवार को देवउठनी एकादशी है। इसे देवोत्थान प्रबोधनी भी कहा जाता है।
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भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा को अपने रूप पर बड़ा गर्व था। वे सोचती थीं कि रूपवती होने के कारण ही श्रीकृष्ण उनसे अधिक स्नेह रखते हैं। पढ़ें कथा..
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तुलसी विवाह के संबंध में प्राचीन ग्रंथों में कई कथाएं दी गई हैं एक ग्रामीण कथा के अनुसार एक परिवार में ननद-भाभी रहती थीं। ननद अभी कंवारी थी।
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कार्तिक मास में 3 दिवाली आती हैं। कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को छोटी दिवाली जिसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इसके बाद अमावस्या को बड़ी दिवाली मनाते हैं एवं पूर्णिमा को देव दिवाली मनाते हैं। आओ जानते हैं देव दिवाली मनाने के 7 खास कारण।
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे हरि प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन तुलसी का शालिग्राम के साथ विवाह करने की परंपरा भी प्रचलित है। आओ जानते हैं शालिग्राम का क्या है महत्व।
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आज 25 नवंबर 2020 कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इस दिन को देवउठनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन शालिग्राम जी के साथ तुलसी विवाह संपन्न किया जाता है।
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बुधवार, 25 नवंबर 2020 को देव प्रबोधिनी/देवउठनी एकादशी मनाई जा रही है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह एकादशी बहुत अधिक महत्व की मानी गई है। आइए जानें इस एकादशी की पौराणिक गाथा-
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देवउठनी ग्यारस / एकादशी पर तुलसी विवाह और विष्णु पूजन का विशेष महत्व है। आइए जानें कैसे करें तुलसी पूजन, पढ़ें विशेष मंत्र :
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कार्तिक मास में तीन दिवाली आती है। कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को छोटी दिवाली जिसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इसके बाद अमावस्या को बड़ी दिवाली मनाते हैं एवं पूर्णिमा को देव दिवाली मनाते हैं। पुराणों में कार्तिक मास का बहुत ही महत्व बताया गया है। आओ ...
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