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बलराम जयंती 2020 : जब बलराम दाऊ के क्रोध से मच गया था कोहराम,कांप गए थे कौरव

रविवार,अगस्त 9, 2020
Balarama Jayanti 2020
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Balarama Jayanti 2020 : बलराम जयंती 9 अगस्त 2020 यानी आज मनाई जाएगी। प्रभु बलराम को भगवान विष्णु के 8वां अवतार माना गया है। इस दिन भगवान शेषनाग ने द्वापर युग में श्रीकृष्ण के बड़े भाई के रूप में जन्म लिया था। जानिए 10 प्रमुख बातें...
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9 अगस्त 2020 यानी आज बलराम जयंती का पर्व (Balarama Jayanti Festival) मनाया जा रहा है। इस दिन को भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है।
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द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। उसके आततायी पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा।
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मथुरा। ब्रज सहित समूचे देश और विदेश में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा, वहीं नंदगांव में 1 दिन पूर्व इसका आयोजन किया जाएगा, जहां पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण का बचपन व्यतीत हुआ था।
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एक नगर में दो स्त्रियां रहती थीं। दोनों एक ही परिवार की थीं और रिश्ते में देवरानी-जेठानी लगती थीं। देवरानी का नाम सलोनी था जो बड़ी ही नेक, सदाचारिणी तथा दयालु थी। जेठानी का नाम तारा था, वह स्वभाव से बड़ी ही दुष्ट थी।
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हलषष्ठी व्रत श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन श्री बलरामजी का जन्म हुआ था। हल षष्ठी की व्रतकथा यह है।
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आज 8 अगस्त की रात दुर्लभ खगोलीय घटना होने जा रही है, जिममें एक रात में सिर्फ 8 घंटे में सौर मंडल के 8 ग्रह को एक साथ देखे जा सकेंगे। साल के 8 वें महिनें की 8 तारीख को बन रहे इस अद्भुत संयोग में सोम, मंगल, बुध, गुरू, शुक्र, शनि और रवि एक ही रात्रि ...
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भाद्रपद महीने में जन्‍माष्‍टमी के अलावा भी कई प्रमुख बड़े व्रत त्‍योहार आते हैं। इन्‍हीं में से एक हल छठ। उत्‍तर भारत में इसे भगवान कृष्‍ण के ज्‍येष्‍ठ भ्राता बलरामजी के जन्‍मोत्‍सव के रूप में मनाते हैं
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गोगाजी राजस्थान के लोक देवता हैं जिन्हें 'जाहरवीर गोग राणा के नाम से भी जाना जाता है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले का एक शहर गोगामेड़ी है।
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वैसे तीर्थराज तो प्रयाग है लेकिन संपूर्ण भारत में महाकाल की नगरी उज्जैन को सब तीर्थों में श्रेष्ठ माना जाता है जिसके कई कारण है। पहला यह कि यहां जितने प्रमुख और महत्वपूर्ण स्थान है उतने किसी तीर्थ क्षेत्र में नहीं। आओ जानते हैं उन्हीं में से 10 ...
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पवित्र नगरी अयोध्या भारत के प्राचीन नगरों में से एक है। यह चार धर्मों हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख का प्रमुख केंद्र है। चारों ही धर्मों के लिए यह नगर पवित्र और तीर्थ नगर है। अयोध्या में एक मणि पर्वत है जिसके संबंध में 5 पौराणिक बातें निकलकर सामने आती
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अयोध्या में राम जन्मभूमि पूजन हेतु लगभग 100 से अधिक नदियों का जल और 2000 से अधिक स्थानों की मिट्टी को लाया गया। इसमें पीओके में स्थित पवित्र शारदा पीठ से भी प्रसाद और पवित्र मिट्टी को अयोध्या लाया गया था। कर्नाटक के रहने वाले और सेवा शारदा पीठ के ...
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मथुरा (उप्र)। देश-दुनिया में कोरोनावायरस संकट के कारण 'कृष्ण जन्माष्टमी' का पर्व इस साल पहले की तरह धूमधाम से नहीं मनाया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर 10 अगस्त की दोपहर से ही 13 अगस्त दोपहर बाद तक सभी श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा, लेकिन ...
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जैसे ही रोहिणी की गोद के बालक को देखा तो गर्गाचार्य मोहिनी मुरतिया में खो गए अपनी सारी सुधि भूल गए खुली आंखों से प्रेम समाधि लग गयी गर्गाचार्य ना बोलते थे ना हिलते थे ना जाने इसी तरह कितने पल निकल गए यह देख बाबा यशोदा घबरा गए हिलाकर पूछने लगे बाबा ...
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एक पौराणिक लोककथा के अनुसार एक लपसी था, एक तपसी था। तपसी हमेशा भगवान की तपस्या में लीन रहता था। लपसी रोजाना सवा सेर की लापसी बनाकर भगवान का भोग लगा कर जीम लेता था।
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राम जन्मभूमि आंदोलन में गूंजने वाला सबसे अहम नारा रहा- राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। 1990 के दौर में यह नारा देश के गांव गांव में गूंज गया था। बच्चा बच्चा ये नारा लगाता था। आखिर यह नारा किसने दिया था?
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अयोध्या की सरयू नदी के दाहिने तट पर ऊंचे टीले पर स्थित हनुमानगढ़ी सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। माना जाता है कि लंका विजय करने के बाद हनुमान यहां एक गुफा में रहते थे और राम जन्मभूमि और रामकोट की रक्षा करते थे। इसी कारण इसका नाम हनुमानगढ़ या ...
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त्रेता के ठाकुर अर्थात त्रेतायुग के भगवान राम का वह स्थान जहां पर उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया था। इस यज्ञ स्थल पर एक भव्य मंदिर बना दिया गया है।
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5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम जन्मभूमि पर राम मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजा और शिलान्यास करेंगे। मंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या के लगभग 150 पौराणिक स्थानों का जीर्णोद्धार होने वाला है। इसी में से एक है सीता रसोई। आओ जानते हैं ...
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