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आज है रंभा तीज : रावण को दिया था शाप इस अप्सरा ने, जानिए कथा,पूजा विधि और मुहूर्त

रविवार,जून 13, 2021
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15 जून को देवभूमि कैंची धाम में मेले का आयोजन होता है और यहां पर देश विदेश से बाबा नीम करौली के भक्त आते हैं। इस धाम में बाबा नीम करौली को भगवान हनुमान का अवतार माना जाता है। यह एक ऐसी जगह है जहां कोई भी मुराद लेकर जाए तो वह खाली हाथ नहीं लौटता। यह ...
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पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुक्ल अष्टमी को देवी के अवतरण दिवस पर मां धूमावती जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह तिथि 18 जून को है।
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विनायक चतुर्थी की पौराणिक कथा के अनुसार एक दिन भगवान भोलेनाथ स्नान करने के लिए कैलाश पर्वत से भोगवती गए। महादेव के प्रस्थान करने के बाद मां पार्वती ने स्नान प्रारंभ किया और
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एक जुलाहा स्वभाव से अत्यंत शांत, नम्र तथा वफादार था। उसे क्रोध तो कभी आता ही नहीं था। एक बार कुछ लड़कों को शरारत सूझी।
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आज भी एक पथ प्रदर्शक के रूप में प्रासंगिक है संत कबीर दास के दोहे। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं कबीर के दोहे सर्वाधिक प्रसिद्ध व लोकप्रिय दोहे-
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इस बार गुरुवार, 24 जून 2021 को कबीरदास जयंती मनाई जाएगी। प्रतिवर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन महान कवि एवं संत कबीर की जयंती मनाई जाती है। कबीर भारतीय मनीषा के प्रथम विद्रोही संत हैं,
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महेश नवमी माहेश्वरी समाज का प्रमुख पर्व है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। माहेश्वरी समाज की उत्पति भगवान शिव के वरदान से इसी दिन हुई।
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पुराणों अनुसार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र:- मन से मारिचि, नेत्र से अत्रि, मुख से अंगिरस, कान से पुलस्त्य, नाभि से पुलह, हाथ से कृतु, त्वचा से भृगु, प्राण से वशिष्ठ, अंगुष्ठ से दक्ष, छाया से कंदर्भ, गोद से नारद, इच्छा से सनक, सनन्दन, सनातन, सनतकुमार, ...
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विश्व की एक मात्र उत्तर प्रवाह मान क्षिप्रा नदी के पास बसी सप्तपुरियों में से एक भगवान श्रीकृष्‍ण की शिक्षा स्थली अवं‍तिका अर्थात उज्जैन को राजा महाकाल और विक्रमादित्य की नगरी कहा जाता है। यहां पर साढ़े तीन काल विराजमान है- महाकाल, कालभैरव, ...
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आज सूर्य ग्रहण है। भगवान सूर्य के इन 7 सरल मंत्रों में से किसी भी मंत्र का जाप करके आप अपने जीवन के हर संकट को दूर कर सकते हैं। आइए जानें-
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वट सावित्री व्रत 2021 : यहां जानिए मुहूर्त, महत्व, पौराणिक कथा, उपाय, दान, पूजा विधि, मंत्र सहित पारण का समय
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पौराणिक, प्रामाणिक एवं प्रचलित वट सावित्री व्रत कथा के अनुसार सावित्री के पति अल्पायु थे, उसी समय देव ऋषि नारद आए और सावित्री से कहने लगे की तुम्हारा पति अल्पायु है।
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वर्ष में दो बार वट सावित्री का व्रत रखा जाता है। पहला ज्येष्ठ माह की अमावस्या को और दूसरा ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को। लेकिन सवाल यह है कि यह व्रत दो बार क्यों रखा जाता है?
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भारत के पूज्यनीय वृक्षों में वट यानी बरगद का महत्वपूर्ण स्थान है। वैदिक धर्म के साथ-साथ जैन तथा बौद्ध धर्मों में भी वट वृक्ष का काफी महत्व माना गया है। इसे अमरता का प्रतीक भी माना जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की ...
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पितरों की मुक्ति हेतु किए जाने वाले कर्म तर्पण, भोज और पिंडदान को उचित रीति से नदी के किनारे किया जाता है। इसके लिए देश में कुछ खास स्थान नियुक्त हैं। देश में श्राद्ध पक्ष के लिए लगभग 55 स्थानों को महत्वपूर्ण माना गया है।
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बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग काशी में है जिसे बाबा विश्वनाथ कहते हैं। काशी को बनारस और वाराणसी भी कहते हैं। शिव और काल भैरव की यह नगरी अद्भुत है जिसे सप्तपुरियों में शामिल किया गया है। दो नदियों 'वरुणा' और 'असि' के मध्य बसे होने के ...
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सुख-शांति की कामना से शिव का पूजन किया जाता है। इस दिन शिव पर पुष्प चढ़ाने तथा शिव के मंत्रों के जप का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन पूरे विधि-विधान एवं मंत्र जाप से शिव की पूजा करने से मनुष्य
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मोदक प्रिय श्री गणेशजी विद्या-बुद्धि और समस्त सिद्धियों के दाता हैं तथा थोड़ी उपासना से ही प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें हिन्दू धर्म में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के पूर्व उन्हीं का स्मरण और पूजन किया जाता है। गणेशजी ...
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नदी में सिक्के डालने की परंपरा सालों से चली आ रही है। आखिर हम नदी में सिक्का क्यों डालते हैं? आइए जानते हैं 10 अन्य हिन्दू परंपराएं....
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