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महाभारत में रामायण की रामकथा

मंगलवार,अप्रैल 13, 2021
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राक्षसराज रावण महापंडित था। उसकी विशाल सेना थी और उसने कई युद्ध लड़े थे। भगवान राम ने उसका वध कर दिया था। महर्षि विश्रवा को असुर कन्या कैकसी के संयोग से तीन पुत्र हुए- रावण, कुम्भकर्ण और विभीषण। विभीषण विश्रवा के सबसे छोटे पुत्र थे। विभीषण बचपन से ...
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अयोनिजा का अर्थ होता है वह व्यक्ति जिसका जन्म किसी गर्भ से नहीं हुआ हो। अर्थात गर्भ से बाहर किसी विशेष परिस्थिति में हुआ हो। रामायण, महाभारत और अन्य हिन्दू शास्त्रों में हमें ऐसी ऐसी जन्मकथाएं पढ़ने को मिलती हैं जिन पर सहज ही विश्वास करना थोड़ा ...
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वेद की वाणी को ईश्वर की वाणी कहा जाता है। वेद संसार के सबसे प्राचीन धर्मग्रंथ है। वेद को 'श्रुति' भी कहा जाता है। 'श्रु' धातु से 'श्रुति' शब्द बना है। 'श्रु' यानी सुनना। कहते हैं कि इसके मन्त्रों को ईश्वर (ब्रह्म) ने प्राचीन तपस्वियों को अप्रत्यक्ष ...
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पहले ऐसा था कि किताबों में लिखे हुए इतिहास को सत्य माना जाता था परंतु फिर ऐसा दौर आया कि लिखे हुए इतिहास का पुरातात्विक अवशेष है तो उसे ही प्रामाणिक इतिहास माना जाएगा। यही कारण था कि अंग्रेजों के भारतीय इतिहास, पुराण आदि किताबों को जानबूझकर मिथक या ...
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समाज-सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी। दयानंदजी का जन्म 12 फरवरी सन् 1824 में हुआ। तिथि के अनुसार फल्गुन मास की कृष्ण दशमी के दिन उनका जन्म हुआ था। उनकी माता का नाम अमृतबाई और पिता का नाम अंबाशकर था। उन्होंने 1846, 21 वर्ष ...
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मथुरा उत्तर प्रदेश जिले में यमुना नदी के तट पर बसा एक सुंदर शहर है। यमुना नदी के पश्चिमी तट पर बसा विश्व के प्राचीन शहरों में से एक मथुरा प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। इस शहर का इतिहास बहुत ही पुराना है। यह शहर रामायण काल से ...
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अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है। यहां महल, मंदिर और तमाम तरह के आश्रम बने हुए थे। लेकिन गुलामी के काल में आक्रांतानों ने यह सभी तोड़ दिए थे। पुरातात्विक खुदाई और अवशेषों से अब यह सिद्ध हो चुका है कि रामलला जहां विराजमान है वहीं श्रीराम का जन्म ...
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भारत में कई महान वैज्ञानिक हुए जैसे कणाद ऋषि, भारद्वाज ऋषि, बौधायन, भास्कराचार्य, वराहमिहिर, पतंजलि, चरक, सुश्रुत, पाणिनी, महर्षि अगस्त्य आदि। इन्हीं में से एक थे महान वैज्ञानिक नागार्जुन। महान रसायनशास्त्री नागार्जुन का जन्म संभवत: दूसरी शताब्दी ...
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भारतीय ऋषियों और मुनियों ने ही इस धरती पर धर्म, समाज, नगर, ज्ञान, विज्ञान, खगोल, ज्योतिष, वास्तु, योग आदि ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया था। दुनिया के सभी धर्म और विज्ञान के हर क्षेत्र को भारतीय ऋषियों का ऋणी होना चाहिए। उनके योगदान को याद किया जाना ...
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पुलस्त्य पुलस्ति ऋषि को ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक माना जाता है। कर्दम प्रजापति की कन्या हविर्भुवा से इनका विवाह हुआ था। कहते हैं कि ये कनखनल के राजा दक्ष के दामाद और भगवान शंकर के साढू थे। इनकी दूसरी पत्नी इडविला थी। पुलस्त्य और इडविला के ...
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सहस्रबाहु अर्जुन ने अपने जीवन में यूं तो बहुतों से युद्ध लड़े लेकिन उनमें दो लोग खास थे। पहले रावण और दूसरे परशुराम। रावण से जीत गए और परशुराम से हार गए।
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भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी के दिन भगवान गणेशजी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन गणपति की स्थापना करके गणेशोत्सव मनाया जाता है। प्रत्येक माह के कृष्‍ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी कहलाती है। अमावस्या के बाद वाली चतुर्थी ...
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ब्रह्मा के पुत्र अत्रि ने कर्दम ऋषि की पुत्री अनुसूया से विवाह किया था। अनुसूया की माता का नाम देवहूति था। अत्रि-दंपति की तपस्या और त्रिदेवों की प्रसन्नता के फलस्वरूप विष्णु के अंश से महायोगी दत्तात्रेय, ब्रह्मा के अंश से चन्द्रमा तथा शंकर के अंश से ...
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वाल्मीकि रामायण में सीता की एक बहन उर्मिला बताई है। मांडवी व श्रुतकीर्ति जनकजी के छोटे भाई कुशध्वज की बेटियां थी। मानस मैं सीता जनकजी की इकलौती बेटी बताई गई है। कुल मिलाकर सीताजी की तीन बहनें थीं। उनके भाई का नाम मंगलदेव है जो धरती माता के पुत्र ...
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महाभारत यूं तो सैंकड़ों घटनाओं का संग्रह है, परंतु फिर भी कुछ ऐसी घटनाएं हैं जो जनमानस में प्रचलित हैं। आओ ऐसी ही घटनाओं की एक लिस्ट पर नजर डालते हैं।
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बहुत से लोग अपने घर की छत पर ध्वज लगाते हैं। यह ध्वज कई कारणों से लगाया जाता है। लेकिन ज्योतिष के अनुसार ध्वज लगाने का कुछ और ही कारण और लाभ है।
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मनुष्य जन्म लेता है तो उसकी मृत्यु तक कई तरह के ऋण, पाप, पुण्य उसका पीछा करते रहते हैं। हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि तीन तरह के ऋण को चुकता कर देने से मनुष्य को बहुत से पापों और संकटों से छुटकारा मिल जाता है। कहीं कहीं चार तरह के ऋण बताए गए ...
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भारत में कई नीतिकार हुए हैं, जिन्होंने भारत के धर्म और राज्य को एक दिशा दी है। उन्हीं नीतिकारों में से एक प्रसिद्ध नीतिकार हैं शुक्राचार्य। ऋषि भृगु के पुत्र और दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य की शुक्र नीति आज भी प्रासंगिक मानी जाती है। आज के संदर्भ में ...
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सम्राट चन्द्रगुप्त महान थे। उन्हें चन्द्रगुप्त महान कहा जाता है। सिकंदर के काल में हुए चन्द्रगुप्त ने सिकंदर के सेनापति सेल्युकस को दो बार बंधक बनाकर छोड़ दिया था। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु चाणक्य थे। चन्द्रगुप्त ने अपने पुत्र बिंदुसार को ...
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