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दीपावली पर ऐसे हुआ था अयोध्या में श्रीराम का भव्य स्वागत

मंगलवार,अक्टूबर 15, 2019
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बोधी धर्मन या बोधिधर्म एक बौद्ध भिक्षु थे। बोधिधर्म का जन्म दक्षिण भारत के पल्लव राज्य के कांचीपुरम के राज परिवार में हुआ था। वे कांचीपुरम के राजा सुगंध के तीसरे पुत्र थे। छोटी आयु में ही उन्होंने राज्य छोड़ दिया और भिक्षुक बन गए। 22 साल की उम्र में ...
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तमिलनाडु में कई प्राचीन शहर है जिसमें से एक है महाबलीपुरम जो समुद्र तट पर स्थित है। इस शहर का इतिहास बहुत ही प्राचीन और भव्य है। यहां प्रस्तुत है संक्षिप्त जानकारी।
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राक्षसराज रावण महापंडित था। उसकी विशाल सेना थी और उसने कई युद्ध लड़े थे। भगवान राम ने उसका वध कर दिया था। आओ जानते हैं उसके परिवार के बारे में।
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रावण बहुत ही ज्ञानी महापंडित होने के साथ ही ज्योतिष, वास्तु और विज्ञान का ज्ञान भी रखता था। वह दिव्य और मायावी शक्तियों का ज्ञाता था। आओ जानते हैं उसके 10 ऐसे कायों के बारे में जिसे जानकर आप आश्चर्य करेंगे।
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नवदुर्गा के सभी रूप माता पार्वती से जुड़े हैं। माता पार्वती के इन रूप में उनका संपूर्ण जीवन और चरित्र समाया हुआ है। माता पार्वती को दुर्गा के समान माना जाता है इसीलिए उन्हें अम्बा और दुर्गा भी कहा जाता है। वैसे तो उनके इन नौ रूपों के देशभर में कई ...
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व्रत ही तप है। यह उपवास भी है। हालांकि दोनों में थोड़ा फर्क है। व्रत में मानसिक विकारों को हटाया जाता है तो उपवास में शारीरिक। मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह के संयम का नवरात्रि में पालन करना जरूरी है अन्यथा आप नवरात्रि में व्रत या उपवास ना ही रखें ...
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गुजरात में सोमनाथ के मंदिर में स्थित भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक और पहला ज्योतिर्लिंग है। आक्रमण के पहले सोमनाथ मंदिर का इतिहास बड़ा ही विलक्षण और गौरवशाली था।
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नवरात्रि का पर्व साधना और भक्ति का पर्व है। वर्ष में चार नवरात्रियां अर्थात 36 रात्रियां होती हैं। इसमें से चैत्र एवं अश्‍विन माह की नवरात्रियां गृहस्थों की साधना के लिए और आषाढ़ एवं पौष की नवरात्रियां साधुओं द्वारा की जा रही गुप्त साधना के लिए होती ...
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भूले-बिसरे समस्त पितरों का इस अमावस्या को श्राद्ध किए जाने को लेकर ही इस तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। अश्‍विन माह की अमावस्या तिथि पितरों के श्राद्ध के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। आओ जानते हैं इसके बारे में 3 महत्वपूर्ण बातें।
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कर्मों के अनुसार किसी भी आत्मा को गति मिलती है। देह छोड़ गए लोगों में से बहुत से अतृप्त होते हैं। कहते हैं कि अतृप्त आत्मा को सद्गति नहीं मिलती है और वह भटकता रहता है। जानिए अतृप्त रहने के 5 कारण।
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माता सती और पार्वती की कई बहनें थीं। सभी देवियां हैं। उन्हीं में से एक देवी तारा के बारे में जानिए महत्वपूर्ण जानकारी।
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नारी में क्षमा, प्रेम, उदारता, लज्जा, विनय, समता, शांति, धीरता, वीरता, सेवा, सत्य, पर दुःख कातरता, शील, सद्भाव, सद्गुण और सौंदर्य इन सभी गुणों से युक्त नारी गरिमामयी बन पाती है। वर्तमान युग में महिलाएं हर मोर्चे पर अपनी योग्यता का प्रदर्शन कर सफलता ...
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नवदुर्गा के पवित्र पर्व के माध्यम से हमें दुनिया की प्रत्येक महिला के 9 रूपों का दर्शन होता है। प्रत्येक महिला खुद को 9 रूपों में व्यक्त करती ही है। जो महिला माता पार्वती के इन 9 रूपों के रहस्य को समझ लेती है, उसका जीवन सफल हुआ समझो।
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पाकिस्तान में यूं तो हजारों मंदिर थे लेकिन अब गिनती के ही मंदिर बचे हैं। उनमें से भी दुर्गा के मंदिर कम ही हैं। आओ जानते हैं पाकिस्तान के 3 दुर्गा मंदिरों के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
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आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष श्राद्ध अमावस्या कहते हैं। यह दिन पितृपक्ष का आखिरी दिन होता है। अगर आप पितृपक्ष में श्राद्ध कर चुके हैं तो भी सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करना जरूरी होता। आओ जानते हैं इस संबंध में 4 खास ...
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'सृष्टि के आदिकाल में न सत् था न असत्, न वायु था न आकाश, न मृत्यु थी और न अमरता, न रात थी न दिन, उस समय केवल वही एक था जो वायुरहित स्थिति में भी अपनी शक्ति से सांस ले रहा था। उसके अतिरिक्त कुछ नहीं था।'- ऋग्वेद (नासदीयसूक्त) 10-129
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गति बहुत महत्वपूर्ण है। गति होती है ध्वनि कंपन और कर्म से। यह दोनों ही स्थिति चित्त का हिस्सा बन जाती है। कर्म, विचार और भावनाएं भी एक गति ही है, जिससे चित्त की वृत्तियां निर्मित होती है। योग के अनुसार चित्त की वृत्तियों से मुक्ति होकर स्थिर हो जाना ...
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उपनिषद कहते हैं कि मृत्यु शरीर की होती है, आत्मा की नहीं। जिस आत्मा ने खुद को शरीर से अलग करके नहीं देखा, वही जन्म, मृत्यु और उसके बीच के जीवन के दुखद चक्र से गुजरता रहेगा। यह गीता का उपदेश है कि 'न कोई मरता है और न कोई मारता है तो फिर मौत से क्यों ...
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मुक्ति और मोक्ष में फर्क है। मुक्ति से बढ़कर है मोक्ष। मोक्ष को प्राप्त करना आसान नहीं है। जब कोई व्यक्ति अपने मृतकों का श्राद्ध करता है तो वह उसकी मुक्ति की कामना करता है। मुक्ति एक साधारण शब्द है। श्राद्ध कर्म मुक्ति कर्म है। यह क्यों किया जाता है ...
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