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लाल किताब के 7 उपाय अपनाएं, इस बार दिवाली पर अपार धन पाएं

शनिवार,अक्टूबर 19, 2019
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ग्रह सोया है तो मेहनत करने के बाद भी सफलता नहीं मिलेगी। लाल किताब के अनुसार किसी की कुंडली में दो तरह की स्थिति होती है सोया भाव और सोया ग्रह। जब कोई महत्वपूर्ण भाव या ग्रह सोया होता है जो व्यक्ति को उसके जीवन में उसके अनुसार फल नहीं मिलते हैं।
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हर व्यक्ति का सपना होता है खुद का जमीन का मकान होना। बड़े शहरों में लोग यह सपना देखते ही रहते हैं और आधी से ज्यादा उम्र निकल जाती है। ऐसे में हम लाएं हैं आपके लिए लाल किताब के कुछ ऐसे 10 उपाय जिन्हें करने से भगवान ने चाहा तो आपका सपना निश्‍चित ही ...
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लाल किताब में किसी भी ग्रह के कुंडली के विशेष जगह पर होने पर कुछ बातों की मनाही कई गई है। ग्रहों में यदि सूर्य ग्रह आपकी कुंडली में निम्न जगह पर स्थित है तो आप भूलकर भी यह कार्य ना करें।
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लाल किताब के अनुसार पितृ दोष और पितृ ऋण से पीड़ित कुंडली शापित कुंडली कही जाती है। ऐसा व्यक्ति अपने मातृपक्ष अर्थात माता के अतिरिक्त मामा-मामी मौसा-मौसी, नाना-नानी तथा पितृपक्ष अर्थात दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई आदि को कष्ट व दुख देता है और उनकी ...
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कुछ विद्वान मानते हैं कि काल सर्प दोष नहीं होता और कुछ इसे मानते हैं। दरअसल राहु और केतु के कारण ही काल सर्प दोष होता है। इसलिए लाल किताब में राहु और केतु के अचूक उपाय बताए गए हैं। आओ जानते हैं काल सर्प दोष के बारे में संक्षिप्त जानकारी और अचूक
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यदि आप पर ग्रह-नक्षत्रों की बुरी दशा चल रही है या आप संकटों से घिरे हैं। यह भी हो सकता है कि पिछले कई माह से आप समस्याओं से घिरे हुए हैं।
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पहले यह जाना जरूरी है कि मंगल दोष क्या होता है। जब किसी कुण्डली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल होता है तब मंगलिक दोष लगता है। इस दोष को विवाह के लिए अशुभ माना जाता है। लेकिन लाल किताब के अनुसार दो तरह के मंगल होते हैं ...
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लाल किताब के बारे आप सभी ने सुना है आइए आज हम आपको बताते हैं लाल किताब के रोचक उपाय ...
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अधिकतर लोग अब 30 और कुछ 35 के बाद ही शादी करने लगे हैं। लिव इन रिलेशनशिप के अनैतिक प्रचलन के चलते अब लोग 40 की उम्र तक भी विवाह नहीं करते और मजे से रहते हैं। ऐसे लोगों का कोई परिवार नहीं होता। यह स्वार्थ का संबंध जब एक न एक दिन ‍टूटता है तब जिंदगीभर ...
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शनि, राहु और केतु आपके जीवन पर किस तरह और क्यों प्रभाव डालते हैं और इनके प्रकोप से कैसे बचा जाए। जानकारी ही बचाव है तो जानिए।
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लोग अपने कर्म से ज्यादा भाग्य पर भरोसा करते हैं। हाथों में भाग्य रेखा होती है उसी तरह कुंडली में नवां स्थान भाग्य का माना गया है। हालांकि कर्म और भाग्य दोनों ही एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। कर्म के सिद्धांत को समझे बगैकर आप भाग्य को नहीं समझ सकते हैं। ...
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लाल किताब में दो प्रकार से कुंडली बनाई जाती है। पहले प्रकार में हाथ की रेखा, पर्वत, भाव, राशि का निरीक्षण और निशानों को जांच परखकर कुंडली बनाई है और दूसरे प्रकार में प्रचलित ज्योतिष शास्त्र की पद्धति द्वारा बनी हुई कुंडली को परिवर्तित करके नई कुंडली ...
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लालकिताब में राशियों का नहीं ग्रहों का भावानुसार ही महत्व माना गया है। जैसे कोई ग्रह ज्योतिष अनुसार किसी राशि में उच्च और उसकी विपरित राशि में नीच का होता है, लेकिन लाल किताब में पहला भाव मेष राशि का होकर क्रमश: बारवां भाव मीन राशि का होता है अत: ...
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यदि आप हस्तरेखा विशेषज्ञ नहीं भी बनना चाहते हैं तो भी आपको यह जानना चाहिए कि हाथों में ग्रह और राशि का स्थान कौन सा होता है और उसका प्रभाव कैसा रहता है? आओ जानते हैं इस संबंध में संक्षिप्त, सामान्य लेकिन रोचक जानकारी हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार जिसे ...
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लाल किताब का ज्ञान एक रहस्यमयी ज्ञान है। लाल किताब में उपायों के अलावा आचार संहिता का भी उल्लेख मिलता है। जिस उसूल कह सकते हैं। दरअसल, लाल किताब के अनुसार यदि आपने अपने कर्म सही रखे तो आपको ज्योतिष के किसी उपाय या किसी भी तरह की पूजा पाठ करने की ...
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लाल किताब में वृक्षों का क्या महत्व है और जातक की कुंडली के अनुसार कौन-कौन-सा वृक्ष लाभकारी है या नहीं, इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
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बारहवें भाव में शनि अशुभ फल दे रहा हो तो कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। मांस, मदिरा, अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए। लाल किताब की इन बातों पर अमल कर शनि से प्राप्त परेशानियों को हम समाप्त कर सकते हैं।
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सूर्य पुत्र शनिदेव को न्यायाधीश माना जाता है। सभी को उनके अच्छे-बुरे कर्मों की सजा देते हैं। दण्डाधिकारी होने से उनका स्वभाव क्रूर भी माना गया है। कहते हैं कि यदि आपके कर्म अच्छे हैं तो शनि की दशा दु:ख देने वाली नहीं होती है बल्कि अपार धन, सुख-संपदा ...
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ऐसा कई लोग हैं जो कि भगवान शनि के दंड से डरते हैं। कहते हैं कि भगवान शनिदेव किसी को भी नहीं छोड़ते हैं क्योंकि वे न्याय के देवता है। वे प्रत्येक व्यक्ति के बुरे कर्मों का उस दंड देते ही हैं, लेकिन यदि आपने पांच काम किए तो शनिदेव आप पर सदा प्रसन्न ...
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