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हाथ की रेखाओं के द्वारा जन्म कुंडली बनाना सीखें

मंगलवार,सितम्बर 29, 2020
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24 जनवरी को शनि ने धनु से मकर राशि में गोचर किया था। फिर 11 मई को ही वे वक्री हुए और अब 29 सितंबर 2020 को वे पुन: मार्गी होंगे। ऐसे में लाल किताब के अनुसार इसे बचने के उपाय जानिए।
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ज्योतिष और लाल किताब के अनुसार कुंडली के बारह भावों को क्या कहते हैं और इन भावों से क्या क्या देखा जाता है। जानिए संक्षिप्त में।
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राहु 23 सितंबर 2020 दिन बुधवार को वृषभ में वक्री होगा एवं केतु वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। राहु इस राशि में अप्रैल 2022 तक रहेगा। इसी प्रकार 29 सितंबर को शनि अब पूरे 142 दिन बाद यानी 29 सितंबर को सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर वक्री से मार्गी हो रहे
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यदि जीवन समस्याओं व दुखों से भरा हो, तो 100 ग्राम साबुत चावल किसी तालाब में डाल दें।
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यदि आप या आपके घर का कोई सदस्य लंबे समय से बीमारी हो या बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही रहो तो यहां लाल किताब के कुछ सामान्य उपाय बताए जा रहे हैं परंतु इन उपायों को लाल किताब के किसी जानकार से पूछकर ही करें।
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कुंडली में पितृ शाप होता है। इसके होने से शिक्षा और संतान में रुकावट आती है और जातक कई तरह से परेशान रहता है। आओ जानते हैं कि यह पितृ शाप या श्राप क्या होता है।
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हर माह राशियां परिवर्तित होती है और शनि, राहु, केतु एवं बृहस्पति को छोड़कर लगगभ सभी ग्रह प्रत्येक माह में एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में जाते हैं। इससे किसी को फर्क पड़ता है तो किसी को नहीं। आओ जानते हैं कि लाल किताब में क्या होगा इसका परमानेंटली ...
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परंपरागत और वैदिक ज्योतिष से भिन्न है लाल किताब में युति के अलग मायने होते हैं। जैसे ज्योतिष में बुध और सूर्य की युति को बुधादित्य योग कहते हैं परंतु लाल किताब के अनुसार बुध और सूर्य मिलकर एक नया ग्रह बन जाते हैं, जिसे नकली ग्रह, बनावटी ग्रह या ...
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खड़े नमक की तरह दिखने वाली फिटकरी सेंधा नमक की तरह चट्टानों से मिलती है। इसके कई तरह के औषधीय उपयोग हैं। औषधीय उपयोग के अलावा ज्योतिषियों अनुसार फिटकरी के कुछ और भी प्रयोग होते हैं जिनको करने से जीवन में लाभ प्राप्त किया जा सकता है। आओ जानते हैं 5 ...
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दरअसल, केतु मिथुन राशि का स्वामी है। 15ए अंश तक धनु और वृश्चिक राशि में उच्च का होता है। 15ए अंश तक मिथुन राशि में नीच का, सिंह राशि में मूल त्रिकोण का और मीन में स्वक्षेत्री होता है। वृष राशि में ही यह नीच का होता है। लाल किताब के अनुसार शुक्र शनि ...
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15ए अंश तक मिथुन राशि में नीच का, सिंह राशि में मूल त्रिकोण का और मीन में स्वक्षेत्री होता है। वृष राशि में ही यह नीच का होता है। लाल किताब के अनुसार शुक्र शनि मिलकर उच्च के केतु और चंद्र शनि मिलकर नीच के केतु होते हैं। लेकिन यहां केतु के ग्यारहवें ...
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15ए अंश तक मिथुन राशि में नीच का, सिंह राशि में मूल त्रिकोण का और मीन में स्वक्षेत्री होता है। वृष राशि में ही यह नीच का होता है। लाल किताब के अनुसार शुक्र शनि मिलकर उच्च के केतु और चंद्र शनि मिलकर नीच के केतु होते हैं। लेकिन यहां केतु के दसवें घर ...
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वृष राशि में ही यह नीच का होता है। लाल किताब के अनुसार शुक्र शनि मिलकर उच्च के केतु और चंद्र शनि मिलकर नीच के केतु होते हैं। लेकिन यहां केतु के नौवें घर में होने या मंदा होने पर क्या सावधानी रखें, जानिए।
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वृष राशि में ही यह नीच का होता है। लाल किताब के अनुसार शुक्र शनि मिलकर उच्च के केतु और चंद्र शनि मिलकर नीच के केतु होते हैं। लेकिन यहां केतु के आठवें घर में होने या मंदा होने पर क्या सावधानी रखें, जानिए।
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बारहवें भाव में शनि अशुभ फल दे रहा हो तो कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। मांस, मदिरा, अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए। लाल किताब की इन बातों पर अमल कर शनि से प्राप्त परेशानियों को हम समाप्त कर सकते हैं।
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वृष राशि में ही यह नीच का होता है। लाल किताब के अनुसार शुक्र शनि मिलकर उच्च के केतु और चंद्र शनि मिलकर नीच के केतु होते हैं। लेकिन यहां केतु के सातवें घर में होने या मंदा होने पर क्या सावधानी रखें, जानिए।
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लाल किताब के अनुसार शुक्र शनि मिलकर उच्च के केतु और चंद्र शनि मिलकर नीच के केतु होते हैं। लेकिन यहां केतु के छठवें घर में होने या मंदा होने पर क्या सावधानी रखें, जानिए।
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15ए अंश तक मिथुन राशि में नीच का, सिंह राशि में मूल त्रिकोण का और मीन में स्वक्षेत्री होता है। वृष राशि में ही यह नीच का होता है। लाल किताब के अनुसार शुक्र शनि मिलकर उच्च के केतु और चंद्र शनि मिलकर नीच के केतु होते हैं। लेकिन यहां केतु के पांचवें घर ...
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कुण्डली में राहु-केतु परस्पर 6 राशि और 180 अंश की दूरी पर दृष्टिगोचर होते हैं जो सामान्यतः आमने-सामने की राशियों में स्थित प्रतीत होते हैं। केतु का पक्का घर छठा है। केतु धनु में उच्च और मिथुन में नीच का होता है। कुछ विद्वान मंगल की राशि में वृश्चिक ...
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