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Devi Kushmanda ki Katha : नवरात्रि के चौथे दिन होगी मां कूष्मांडा की आराधना, पढ़ें पावन कथा

गुरुवार,अप्रैल 15, 2021
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नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा-आराधना की जाती है। नवरात्रि में इस दिन भी रोज की भांति सबसे पहले कलश की पूजा कर माता कूष्मांडा को नमन करें।
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सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति मानी जाने वाली मां कूष्मांडा की आराधना नवरात्रि में चौथे दिन की जाती है। यहां पढ़ें उनकी आरती-
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नवरात्रि पर माता दुर्गा की उपासना की जाती है। पुराणों में नवरात्रि की माता नौ दुर्गा के अलग अलग वाहनों का वर्णन मिलता है। जैसे शैलपुत्री माता वृषभ पर सवार है तो कालरात्रि माता गधे पर। इसी तरह प्रत्येक देवी का वाहन अलग अलग है, परंतु माता का मुख्‍य ...
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वर्ष में दो बार नवरात्रि उत्सव का आयोजन होता है। पहले को चैत्र नवरात्रि और दूसरे को आश्‍विन माह की शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। इस तरह पूरे वर्ष में 18 दिन ही दुर्गा के होते हैं जिसमें से शारदीय नवरात्रि के नौ दिन ही उत्सव मनाया जाता है, ...
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नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी चंद्रघंटा की पूजा-आराधना की जाती है। देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है।
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नवरात्र में भक्त मां की आराधना के लिए पूरे 9 दिन अखंड ज्योत लगाकर भक्ति करते हैं। जानिए अखंड ज्योत का महत्व।
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नवरात्रि में तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। इस देवी की आराधना से मनचाही सफलता मिलती है। आइए पढ़ें चंद्रघंटा माता की आरती :
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लाल किताब के अनुसार बुधवार का दिन माता दुर्गा का दिन माना जाता है। पुराणों अनुसार बुध ग्रह का वाहन सिंह है और इनकी तुलना शक्ति से की गई है। जिस प्रकार भक्तों का दुख: हरने हेतु भगवती दुर्गा सिंह पर सवार होकर विचरण करती रहती हैं उसी प्रकार बुध भी अपने ...
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वर्ष में चार बार नवरात्रि उत्सव का आयोजन होता है। इसमें से दो खास है पहले को चैत्र नवरात्रि, और दूसरे को आश्‍विन माह की शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। इस तरह पूरे वर्ष में 18 दिन ही दुर्गा के होते हैं जिसमें से शारदीय नवरात्रि के नौ दिन ही ...
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नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा होती है, लेकिन क्या यह सच है कि सिर्फ नौ देवियों की ही पूजा होती है? क्या है नौ देवियों का रहस्य आओ जानते हैं इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
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नवरात्रि में तीसरे दिन चंद्रघंटा देवी की पूजा का महत्व है। देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं।
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यह मां नर्मदा की स्तुति दुर्गा अष्टमी-नवमी के दिन करें। सबका उद्धार करने वालीं मां बीमारी से मुक्ति दिलाएंगी।
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चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 13 अप्रैल से प्रारंभ हो चुकी जो 22 अप्रैल तक रहेगी। यदि आप नवरात्रि का व्रत रख रहें हैं तो आपको 9 खास बातों का जान लेना चाहिए।
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देवी ब्रह्मचारिणी की की कृपा से सर्वत्र सिद्धि तथा विजय की प्राप्ति होती है। जो साधक मां के इस रूप की पूजा करते हैं उन्हें तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की प्राप्ति होती है
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मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है।
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नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी के नाम, पढ़ें उनकी पावन आरती-
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देवी पुराण के अनुसार मां भगवती की पूजा-अर्चना करते समय सर्वप्रथम कलश / घट की स्थापना की जाती है। घट स्थापना करना अर्थात नवरात्रि की कालावधि में ब्रह्मांड में कार्यरत शक्ति तत्व का घट में आवाहन कर उसे कार्यरत करना।
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इस साल शक्ति की उपासना का ये पर्व यानी चैत्र नवरात्रि मंगलवार, 13 अप्रैल 2021 से शुरू हैं। 21 अप्रैल तक ये पर्व चलेगा। नवरात्रि के आरंभ के साथ ही हिन्दू नववर्ष-2021 की शुरुआत भी होगी। इस बार का महिसासुर मर्दिनी का आगमन दुराचारी,राक्षसी प्रवृत्ति के ...
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इस माह की दिनांक 13 अप्रैल, दिन मंगलवार से चैत्र नवरात्र प्रारंभ होने जा रही है। हमारे सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। हिन्दू वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ, मासों में 4 बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है ...
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