Gupt Navratri 2026: 19 जनवरी 2026 सोमवार से माघ मास की गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो रही है। वर्ष में चार बार आती है नवरात्रि- माघ, चैत्र, आषाढ और अश्विन माह। चैत्र माह की नवरात्रि को बसंत नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं। बाकी बची दो आषाढ़ और पौष-माघ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं।
माघ गुप्त नवरात्रि हाइलाइट्स | Gupt Navratri 2026
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गुप्त नवरात्रि में साधना के 8 रहस्य
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माघ गुप्त नवरात्रि विशेष महत्व
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FAQs: गुप्त नवरात्रि 2026
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शुरुआत: 19 जनवरी 2026 (सोमवार)
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प्रकार: माघ गुप्त नवरात्रि
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साधना: शक्ति, तंत्र और महाविद्या उपासना
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विशेष: दुर्लभ साधना काल
माघ मास की गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी 2026, सोमवार से शुरू हो रही है। यह नवरात्रि साधना, तंत्र और शक्ति उपासना से जुड़ी मानी जाती है। हिंदू धर्म में वर्ष में कुल चार नवरात्रियां आती हैं- माघ, चैत्र, आषाढ़ और अश्विन। जहां चैत्र नवरात्रि (बसंत) और अश्विन नवरात्रि (शारदीय) आम भक्तों के लिए होती हैं, वहीं माघ और आषाढ़ की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है, जिनका महत्व विशेष साधकों के लिए माना गया है। आइए जानते हैं माघ गुप्त नवरात्रि से जुड़े साधना के 8 रहस्य, जिनका उल्लेख शास्त्रों और तांत्रिक परंपराओं में मिलता है।
गुप्त नवरात्रि में साधना के 8 रहस्य
1️. सामान्य नवरात्रि से अलग होती है गुप्त नवरात्रि
चैत्र और अश्विन नवरात्रि सर्वसाधारण भक्तों के लिए होती हैं, जिनमें सात्विक या दक्षिणमार्गी साधना की जाती है।
2️. गुप्त नवरात्रि में होती है तंत्र साधना
माघ और आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि में वाममार्गी या तांत्रिक साधना को विशेष महत्व दिया जाता है।
3️. दस महाविद्याओं की होती है उपासना
गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना और सिद्धि प्राप्ति के लिए मानी जाती है। इस दौरान दस महाविद्याओं की पूजा का विशेष महत्व होता है।
4️. देवी भागवत में वर्णित है साधना का विधान
देवी भागवत के अनुसार, जैसे नवरात्रि में नौ दुर्गा स्वरूपों की पूजा होती है, वैसे ही गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।
5️. कठोर नियमों के साथ होती है साधना
इस काल में देवी उपासक कड़े व्रत, संयम और नियमों के साथ साधना करते हैं। साधना को गुप्त रखने की परंपरा भी इसी से जुड़ी है।
6️. दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति का प्रयास
गुप्त नवरात्रि में कई साधक लंबे अनुष्ठान और साधना कर विशेष सिद्धियों की प्राप्ति का प्रयास करते हैं।
7️. किन महाविद्याओं की होती है पूजा?
गुप्त नवरात्रि में साधक इन महाविद्याओं की उपासना करते हैं-
मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी।
8️. नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का काल
मान्यता है कि जब भगवान विष्णु शयन काल में होते हैं, तब देव शक्तियां क्षीण होने लगती हैं। इस दौरान रुद्र, यम और वरुण जैसी शक्तियों का प्रभाव बढ़ता है। इन विपत्तियों से रक्षा के लिए गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना की जाती है।
माघ गुप्त नवरात्रि विशेष महत्व
गुप्त नवरात्रि का समय शक्ति साधना, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
नोट: यह जानकारी धार्मिक ग्रंथों और परंपरागत मान्यताओं पर आधारित है।
FAQs: गुप्त नवरात्रि 2026
Q1. गुप्त नवरात्रि क्या होती है और यह क्यों खास मानी जाती है?
A. गुप्त नवरात्रि माघ और आषाढ़ माह में आती है। इसे शक्ति और तंत्र साधना का विशेष काल माना जाता है, जिसमें दस महाविद्याओं की उपासना का महत्व होता है।
Q2. गुप्त नवरात्रि 2026 कब से शुरू हो रही है?
A. माघ मास की गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी 2026, सोमवार से शुरू हो रही है।
Q3. क्या गुप्त नवरात्रि में आम भक्त पूजा कर सकते हैं?
A. हां, आम भक्त मां दुर्गा की सात्विक पूजा, जप और व्रत कर सकते हैं। तांत्रिक साधना अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।
Q4. गुप्त नवरात्रि में किन देवियों की पूजा की जाती है?
A. इस दौरान मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है।
Q5. गुप्त नवरात्रि में क्या सावधानियां रखनी चाहिए?
A. इस दौरान साधना को गुप्त रखना, संयम बनाए रखना और नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है।