Mahavir Jayanti: भगवान महावीर की जयंती जैन धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे बड़ा उत्सव है। साल 2026 में यह पावन पर्व 30 मार्च, दिन सोमवार को मनाया जा रहा है। भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे, जिन्होंने दुनिया को सत्य, अहिंसा और शांति का मार्ग दिखाया।
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'जियो और जीने दो' (Live and Let Live)
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अहिंसा (Non-Violence)
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अपरिग्रह (Non-Possessiveness)
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अनेकांतवाद (Multiple Viewpoints)
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आत्म-विजय (Victory over Self)
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भगवान महावीर के जीवन की एक झलक
यहां उनके जीवन और उपदेशों से जुड़ी कुछ बेहद प्रेरणादायक बातें दी गई हैं जो आज के दौर में और भी प्रासंगिक हैं:
1. 'जियो और जीने दो' (Live and Let Live)
यह भगवान महावीर का सबसे प्रसिद्ध संदेश है। उनका मानना था कि इस संसार में सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव के पास भी प्राण हैं और उसे जीने का उतना ही अधिकार है जितना हमें। उन्होंने सिखाया कि हमें दूसरों के प्रति दया और करुणा का भाव रखना चाहिए।
2. अहिंसा (Non-Violence)
महावीर स्वामी के अनुसार अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा न करना ही नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म से भी किसी को कष्ट न पहुंचाना है।
'अहिंसा परमो धर्म:' — अर्थात अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है।
3. अपरिग्रह (Non-Possessiveness)
आज की भागदौड़ और लालच भरी दुनिया में 'अपरिग्रह' का सिद्धांत बहुत जरूरी है। इसका अर्थ है—आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संचय न करना। महावीर जी ने सिखाया कि इच्छाओं का अंत ही दुखों का अंत है। जितना कम मोह होगा, उतनी ही अधिक मानसिक शांति मिलेगी।
4. अनेकांतवाद (Multiple Viewpoints)
भगवान महावीर ने सिखाया कि सत्य के कई पहलू हो सकते हैं। एक ही बात को अलग-अलग लोग अपने नजरिए से देखते हैं और वे सब अपने-अपने स्थान पर सही हो सकते हैं। यह विचार हमें दूसरों के विचारों का सम्मान करना और सहिष्णु (Tolerant) बनना सिखाता है।
5. आत्म-विजय (Victory over Self)
भगवान महावीर ने कहा था— 'हजारों शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने से बेहतर है कि खुद पर विजय प्राप्त की जाए।' जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों और अपने मन पर काबू पा लेता है, वही सच्चा महावीर है।
भगवान महावीर के जीवन की एक झलक
जन्म: वर्द्धमान महावीर का जन्म बिहार के कुंडलपुर/ वैशाली में हुआ था।
वैराग्य: 30 वर्ष की आयु में उन्होंने राजसी ठाठ-बाट त्याग दिए और सत्य की खोज में निकल पड़े।
तपस्या: 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद उन्हें 'केवल ज्ञान' यानी सर्वोच्च ज्ञान प्राप्त हुआ।
निर्वाण: उन्होंने अपनी शिक्षाओं के माध्यम से लाखों लोगों का जीवन बदला और अंततः पावापुरी में मोक्ष प्राप्त किया।
भगवान महावीर के ये विचार हमें एक संतुलित और सार्थक जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
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