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महावीर स्वामी और गौतम बुद्ध, जानिए दोनों के बीच क्या है खास 13 बातें

मंगलवार,अप्रैल 16, 2019
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओत-प्रोत था। उन्होंने एक लंगोटी तक का परिग्रह नहीं रखा।
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प्रत्येक वर्ष भगवान महावीर की जन्म-जयंती हम मनाते हैं। समस्त विश्व में जैन समाज और अन्य अहिंसा प्रेमी व्यक्तियों द्वारा बड़े हर्ष और उल्लास के साथ उनकी जयंती मनाई जाती है।
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राजस्थान में 'श्री महावीर जी' नाम से भगवान महावीर का भव्य विशाल मंदिर है। यह दिगंबर जैन धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। गंभीर नदी के तट पर स्थित इस मंदिर में 24वें तीर्थंकर श्री वर्धमान महावीर जी की मूर्ति विराजित है।
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यहां पढ़ें जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की आरती।
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महावीर एक राजा के परिवार में पैदा हुए थे। उनके घर-परिवार में ऐश्वर्य, धन-संपदा की कोई कमी नहीं थी, जिसका कि वे मनचाहा उपभोग भी कर सकते थे, परंतु युवावस्था
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रंग लाग्यो महावीर, थारो रंग लाग्यो। थारी भक्ति करवाने म्हारो भाव जाग्यो ॥ रंग लाग्यो…॥
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राजा सिद्धार्थ की गजशाला में सैकड़ों हाथी थे। एक दिन चारे को लेकर दो हाथी आपस में भिड़ गए। उनमें से एक हाथी उन्मत्त होकर गजशाला से भाग निकला।
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जय महावीर दया के सागर, जय श्री सन्मति ज्ञान उजागर। शांत छवि मूरत अति प्यारी, वेष दिगम्बर के तुम धारी। कोटि भानु से अति छबि छाजे, देखत तिमिर पाप सब भाजे।
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जीवन ही उनका संदेश है। उनके सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और अस्तेय आदि उपदेश एक खुली किताब की तरह हैं।
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मदिवस को आज महावीर जयंती के नाम से जाना जाता है। जैन समाज द्वारा पूरे भारत में भगवान महावीर के जन्म उत्सव के रूप मे 'महावीर जयंती' मनाई जाती है।
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भगवान महावीर स्वामी आदमी को उपदेश और दृष्टि देते हैं कि धर्म का सही अर्थ समझो। धर्म तुम्हें सुख, शांति, समृद्धि, समाधि, आज, अभी दे या कालक्रम से दे, इसका मूल्य नहीं है।
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महावीर स्वामी कहते हैं ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चारित्र, संयम और विनय की जड़ है।
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महावीर स्वामी कहते हैं- हे पुरुष, तू आत्मा के साथ ही युद्ध कर। बाहरी शत्रुओं के साथ किसलिए लड़ता है? आत्मा द्वारा ही आत्मा को जीतने से सच्चा सुख मिलता है।
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महाराजा सिद्धार्थ ने महारानी त्रिशला द्वारा देखे गए सपनों की जानकारी जब स्वप्नवेत्ताओं को दी तो स्वप्नवेत्ता बोले- राजन! महारानी ने मंगल सपनों के दर्शन किए हैं। स्वप्नवेत्ताओं ने सपनों की जो भावी व्याख्या की, उससे प्रभु महावीर का भविष्य प्रकट हुआ।
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महावीर कहते हैं कि धर्म सबसे उत्तम मंगल है। अहिंसा, संयम और तप ही धर्म है। महावीरजी कहते हैं- 'जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं।'
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संपूर्ण भारत में जैन धर्म के पवित्र स्थानों में से एक मंदिर राजस्थान में 'श्री महावीरजी' नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर श्री भगवान महावीर स्वामी का भव्य विशाल मंदिर है। यह दिगंबर जैन धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। गंभीर नदी के तट पर स्थित ...
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पुष्कलावती नामक देश के एक घने वन में भीलों की एक बस्ती थी। उनके सरदार का नाम पुरूरवा था। उसकी पत्नी का नाम कालिका था। दोनों वन में घात लगाकर बैठ जाते और आते-जाते यात्रियों को लूटकर उन्हें मार डालते। यही उनका काम था।
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जीवन ही उनका संदेश है। उनके सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और अस्तेय आदि उपदेश एक खुली किताब की तरह हैं। जो सत्य परंतु आम आदमी को कठिन प्रतीत होते हैं।
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महावीर स्वामी का प्रमुख संदेश था, 'जिओ और जीने दो'। उन्होंने जैनियों के तीन प्रमुख लक्षण बतलाए है, जो निम्न हैं...
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