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हास्य-कविता : कार करोला बनी करेला

सोमवार,जून 13, 2022
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ह्यूस्टन। टेक्‍सास में रहने वाली आठवीं कक्षा की 14 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी हरिणी लोगान ने 90 सेकंड में 22 शब्दों की सही वर्तनी और अर्थ बताकर 2022 की स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता में जीत हासिल की। उन्होंने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में ...
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ज्येष्ठ का महीना, सूर्य का भभकना, जलाशयों का सूखना, जल जंतुओं का तड़पना।
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ग्रीष्म ऋतु है कितनी अच्छी, लंबी छुट्टी लाती है, पढ़ने लिखने होमवर्क से, राहत हमें दिलाती है।
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एक सुबह सुहानी खिल आई इठलाती, नभ ललचाए आ बैठे सुबह की गोद में, धूप देख शरमा पड़ी, सूरज हो गया रुआंसा, गगन की मादकता से धरा को मिली राहत
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भारतीय-अमेरिकी ((Indian American) पदार्थ वैज्ञानिक, इंजीनियर और प्रोफेसर डॉ. अरुण मजूमदार (Dr. Arun Majumdar) को स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय (Stanford University) के जलवायु परिवर्तन और निरंतरता पर केंद्रित नए स्कूल का पहला डीन नामित किया गया है।
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अमेरिका की स्टेट नॉर्थ कैरोलाइना के शार्लिट शहर के 'साहित्य संगम' ग्रुप की पहली कविता गोष्ठी की रिपोर्ट यहां पेश की जा रही है।
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कैसे एक व्यक्ति की सोच, उठाया गया एक सार्थक कदम और प्रयास भविष्य निश्चित कर, अस्तित्व को मजबूत कर, सभी को एकजुट कर सभी की ख़ुशियों का कारण बन जाता है। भविष्य को लेकर देखा गया एक सपना साकार होकर भविष्य को वर्तमान में संजो लेता है।
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अमेरिका ने यारों, बूढ़ा कर दिया, वरना हम भी, जवान थे अच्छे-खासे।
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भरा आकाश और नभ मंडल बारूद और धुएं की बौछार है, सिसक रही मानवता ये कैसा नरसंहार है, जहां थी तारों की लड़ियां वहां बमों की भरमार है... कांप रहा नभमंडल सारा ये कैसा अत्याचार है
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रह रह कर मन उदास हो उठता है, एक अंधेरे कोने में सिमटने लगता है हजार दुख छिपाकर एक खुशी मनाएं कैसे, मां ठीक है लेकिन मामा चले गए
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जब सहन करते हैं, जब मर्यादा उलांघते हैं, जब आकांक्षाएं ऊंची रखते हैं, जब उम्मीदों को ठुकराते हैं, जब चाल चल जाते हैं
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एक समुंदर पानी का, एक समुंदर रेत का, एक जमीन बंजर एक पहाड़ विशाल, मध्य जीवन रिक्त है
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स्वास्थ, सद्‌बुद्धि, हिम्मत, मेहनत, चार पाए हैं ऐसी खटिया के जिन पर टिक कर, आराम से कटती है जिंदगी
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आज मेरी तस्वीरें चिढ़ा रही हैं मुझे, जब मैं उनसे नजरें मिला रही हूं कुछ पुरानी तस्वीरें कॉलेज के दिनों की, प्रयोगशाला में सफेद कोट पहने
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सुंदर, नाजुक, कोमल-कोमल, मानो कोई खिली थी नन्ही-सी कली, देख-देख मैं मन ही मन खुश होती लहराती मेरे मन की बगिया
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आज अरसे बाद घर लौटी हूं। घर जी हां, घर अपना घर, वफादार घर जिसकी छत के नीचे आकर एक अजीब-सा अपनापन महसूस होता है। अभी-अभी धूप की तेजी बढ़ने के साथ ध्यान गया, रौशनी चारों
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ढींगरा फैमिली फाउंडेशन (Dhingra Family Foundation, USA) अमेरिका ने अपने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन ने अपने कथा-कविता सम्मान (International Story Poetry Award by Shivna Prakashan) घोषित कर दिए हैं।
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याद आती है भारत की दिवाली ! यहां तो बस लगता है खाली खाली !! न यहां वह वातावरण है और न है संग ! व्यस्त जीवन के कारण न है वह उमंग!!
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दीपावली के त्योहार पर मिठाई का अपना अलग ही मजा है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं 5 तरह के मीठे व्यंजन बनाने की सरल विधियां...
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