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Pushya Nakshatra : आज और कल है खरीदी का महामुहूर्त, सोम और मंगल पुष्य में राशि अनुसार क्या लाएं घर में

सोमवार,अक्टूबर 21, 2019
pushya nakshtra
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21 अक्टूबर और 22 अक्टूबर 2019 को बन रहे हैं खरीदी के सबसे शुभ और मंगलमयी संयोग। पुष्य नक्षत्र मां लक्ष्मी का अत्यंत प्रिय नक्षत्र है। इसमें मां लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए उपाय किए जाते हैं। आइए जानें क्या करें इस दिन..
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पुष्य नक्षत्र में कोई भी वस्तु बिना किसी मुहूर्त देखे खरीदी जा सकती है। यह खरीदी सुख, संपत्ति, समृद्धि, संपन्नता, अपार धन, आरोग्य और सफलता के सुनहरे अवसर लेकर आती है।
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अहोई अष्टमी का व्रत 21 अक्टूबर 2019 यानी आज है।महिलाएं अपनी संतान के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं तो आइए जानते हैं क्या है अहोई अष्टमी के शुभ संयोग...
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वर्ष 2019 में पुष्य नक्षत्र 21 अक्टूबर दोपहर 01:39 से 22 अक्टूबर दोपहर 3:38 तक रहेगा। समय में पंचांग भेद हो सकता है। इस बार दो दिन पुष्य नक्षत्र होने से महत्व अधिक बढ़ गया है।
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दीपावली के पहले आने वाला पुष्य नक्षत्र बहुत ही शुभ होता है। इस बार 21 और 22 अक्टूबर सोमवार और मंगलवार को पुष्य का शुभ योग बन रहा है। इसे खरीदारी का महामुहूर्त भी कहते हैं।
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प्राचीन काल में एक साहूकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुएं थी। इस साहूकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी। दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ चली गई।
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अहोई अष्टमी का शुभ पर्व 21 अक्टूबर 2019 को है। इस दिन अहोई माता का पूजन और वंदना की जाती है। यह व्रत संतान की शुभता, सुरक्षा, लंबी उम्र और आरोग्य के लिए किया जाता है। आइए जानें 10 जरूरी बातें....
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पुष्य नक्षत्र का इंतजार दिवाली से भी ज्यादा किया जाता है क्योंकि इस दिन कोई भी शुभ धातु या संपत्ति लेकर मां लक्ष्मी को आकर्षित किया जाता है। आइए जानते हैं कौन से 6 प्रकार के कार्य इस दौरान अतिशुभ माने जाते हैं, जिन्हें करने से समृद्धि का शुभ वरदान ...
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पुष्य नक्षत्र जब दीपावली के पहले आता है तब उसका विशेष महत्व बढ़ जाता है। इस वर्ष 21 और 22 अक्टूबर यानी सोमवार और मंगलवार को पुष्य नक्षत्र आ रहा है। लेकिन खरीदी के लिए सोमवार की शाम से भी अधिक शुभ मंगलवार की सुबह और पूरा दिन है।
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रामायण काल में दीपोत्सव मनाए जाने का जिक्र मिलता है। राम के अयोध्या आगमन के दौरान दीपोत्सव मनाया गया था। लेकिन क्या महाभारत काल में भी दिवाली मनाई जाती थी? इस संबंध में दो घटनाएं जुड़ी हुई है।
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लाल किताब में शुक्र ग्रह के देवी-देवताओं में लक्ष्मी माता को उसका अधिपति देव माना गया है। शुक्रवार देवी लक्ष्मी का वार है। आओ जानते हैं लाल किताब इस संबंध में क्या कहती है और क्या 7 उपाय करना चाहिए
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धनतेरस केे दिन कुछ विशेष धातुओं और चीजों को खरीदना शुभ माना जाता है, जिससे साल भर घर में बरकत बनी रहती है।
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घर में सुख शांति और प्रसन्नता का वातावरण बना रहे इसलिए कई लोग घर की साज-सज्जा व रंगाई के लिए वास्तु और फेंगशुई के टिप्स भी आजमाते हैं।
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दीपावली के पांच दिवसीय त्योहार से पूर्व 21 अक्टूबर 2019, सोमवार को पुष्य नक्षत्र आ रहा है, जो 22 अक्टूबर दोपहर तक जारी रहेगा। इस मुहूर्त में प्रॉपर्टी,
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धन तेरस पर भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा होती है। उन्हें आयुर्वेद का जन्मदाता और देवताओं का चिकित्सक माना जाता है। भगवान विष्णु के 24 अवतारों में 12वां अवतार धन्वंतरि का था।
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यहां कार्तिकेय जी के दिव्‍य नाम दिए जा रहे हैं। जो इनका पाठ करता है, वह धन, कीर्ति तथा स्‍वर्गलोक प्राप्‍त कर लेता है; इसमें संशय नहीं है। कार्तिकेय के प्रसिद्ध नामों की सूची इस प्रकार है।
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अहोई माता की पूजा और व्रत का संतान की रक्षा, सुख और समृद्धि के लिए विशेष महत्व है। कार्तिक महीने की अष्टमी बेहद विशेष होती है। इस अष्टमी को अहोई अष्टमी कहते हैं।
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इस वर्ष 19 अक्टूबर, शनिवार को स्कंद षष्ठी मनाई जा रही है। हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मनाई जाती है।
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17 अक्टूबर 2019 को सूर्य कन्या राशि को छोड़कर तुला में प्रवेश कर गए हैं। करीब एक महीने तक तुला राशि में ही रहेंगे सूर्य।
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