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महाभारत युद्ध के दौरान ऐेसा हुआ था, जानिए 10 रोचक तथ्‍य

सोमवार,अक्टूबर 19, 2020
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महाभारत में द्रौपदी एक अहम् किरदार है। द्रौपदी के जीवन और चरित्र को समझना बहुत ही कठिन है। उन्हें तो सिर्फ कृष्ण ही समझ सकते थे। द्रौपदी श्रीकृष्ण की मित्र थी। मित्र ही मित्र को समझ सकता है। आज हम आपको द्रौपदी की वे पांच गलतियां बताना चाहते हैं ...
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महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद कृतवर्मा, कृपाचार्य, युयुत्सु, अश्वत्थामा, युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल, सहदेव, श्रीकृष्ण, सात्यकि आदि जीवित बचे थे। इसके अलावा धृतराष्ट्र, द्रौपदी, गांधारी, विदुर, संजय, बलराम, श्रीकृष्ण की पत्नियां आदि भी जीवित थे। ...
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संजय के पिता बुनकर थे। उनके पिता का नाम गावल्यगण था। उन्होंने महर्षि वेदव्यास से दीक्षा लेकर ब्राह्मणत्व ग्रहण किया था। अर्थात वे बुनकर से ब्राह्मण बन गए थे। वेदादि विद्याओं का अध्ययन करके वे धृतराष्ट्र की राजसभा के सम्मानित मंत्री भी बन गए थे।
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गांधारी का बड़ा पु‍त्र दुर्योधन और भीम दोनों की कुश्ती में उस्ताद थे। भीम ज्यादा शाक्तिशाली था इसलिए दुर्योधन भीम से बालपन से ही दुर्भावना रखता था। वह सोचने लगा कि नगर के उद्यान में सोते समय भीमसेन को गंगा में डाल दें और युधिष्ठिर तथा अर्जुन को कैद ...
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महाभारत के युद्ध के बाद बहुत से योद्धा बच गए थे। उनमें प्रमुख 18 थे। महाभारत के युद्ध के पश्चात कौरवों की तरफ से 3 और पांडवों की तरफ से 15 यानी कुल 18 योद्धा ही जीवित बचे थे जिनके नाम हैं- कौरव के : कृतवर्मा, कृपाचार्य और अश्वत्थामा, जबकि पांडवों की ...
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भारत में चाणक्य से पूर्व कई महान नीतिज्ञ हुए। जैसे भीष्म, विदुर, मनु, चर्वाक, शुक्राचार्य, बृहस्पति, परशुराम, गर्ग आदि अनेकों नीतिज्ञ हुए हैं। चाणक्य के बाद भी कई महान नीतिज्ञ हुए हैं जैसे भर्तृहरि, हर्षवर्धन, बाणभट्ट आदि। विदुर धृतराष्ट्र के सौतेले ...
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हज़ार साल के युद्ध और तपस्या के बाद फिर एक कवच टूटा और नारायण की मृत्यु हो गयी। फिर नर ने आकर नारायण को पुनर्जीवित कर दिया, और यह चक्र फिर फिर चलता रहा।
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भारत में जाति सर्वव्यापी तत्व है। जातियां तो दूसरे धर्मों में भी होती हैं और उनमें भी उच्च, निम्न तथा शुद्ध-अशुद्ध जातियों का भेद विद्यमान है, लेकिन बात सिर्फ हिन्दू जातियों की इसलिए होती है, क्योंकि हिन्दू बहुसंख्यक हैं और जातियों में फूट डालकर या ...
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अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या रामायण और महाभारत काल में भी मंदिर होते थे या कि वैदिक ऋषि अपने आश्रम में ध्यान करते थे और आम लोग घर में ही पूजा अर्चना करते थे? क्या ब्रह्मनिष्ठ लोग भी पूजा अर्चना करते थे?
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महाभारत में ऐसी कई घटनाएं घटी हैं जो व्यक्ति को भावुक कर देती हैं। जैसे बहुत ही कम उम्र में अभिमन्यु का छल से वध करना, द्रोणाचार्य और कर्ण का भी छल से वध कर देना। लेकिन यह तो युद्ध की घटनाएं हैं। युद्ध से अलग भी ऐसी कई कहानियां हैं जो हमें द्रवित कर ...
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महाभारत काल अर्थात द्वापर युग में हनुमानजी की उपस्थित और उनके पराक्रम का वर्णन मिलता है। आओ जानते हैं उन्हीं में से पांच प्रमुख पराक्रम के बारे में संक्षिप्त में।
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हमने पहले आपको महाभारत युद्ध के 10 गुप्त रहस्य और महाभारत युद्ध के 18 गुप्त रहस्य बताए थे और अब जानिए महाभारत युद्ध के ऐसे 5 रहस्य जिन्हें जानकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे कि आखिर इस युद्ध को करने से किसका फायदा हुआ?
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दुर्योधन की पत्नी का नाम भानुमति था। भानुमती के कारण ही यह मुहावरा बना है- कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा। भानुमती काम्बोज के राजा चन्द्रवर्मा की पुत्री थी। भानुपति बहुत ही सुंदर, आकर्षक, बुद्धिमान और ताकतवर थी। उसकी सुंदरता और ...
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आनंद रामायण में वर्णन है कि एक बार अर्जुन का हनुमानजी से मिलन हो जाता है। अर्जुन घमंड से हनुमानजी को कहता है कि मैं आपके समय होता तो पत्थर का रामसेतु बनवाने के बजाय अकेले ही अपने धनुष से ही मजबूत सेतु बना देता। आपके प्रभु श्रीराम ने ऐसा क्यों नहीं ...
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महाभारत काल में प्रत्येक योद्धा एक विशेष अस्त्र या शस्त्र को चलाने में निपुण था। पांडव पुत्र भीम की माता कुंती और पिता पवनदेव थे। भीम को वासुकि नाग ने दस हजार हाथियों का बल प्रदान किया था। भीम को गदा चलाना ही आता है परंतु वह एक और शस्त्र चलाना जानते ...
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भारतीय संस्कृति, वेद, पुराण, प्रचलित परंपरा और आयुर्वेद में ऐसे कई उपाय और नुस्खे बताए गए हैं जिससे हम साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए किसी भी रोगाणु, जीवाणु, विषाणु या संक्रमण से बच सकते हैं।
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वेदों के पितृयज्ञ को ही पुराणों में विस्तार मिला और उसे श्राद्ध कहा जाने लगा। पितृपक्ष तो आदिकाल से ही रहता आया है, लेकिन जब से इस पक्ष में पितरों के लिए श्राद्ध करने की परंपरा का प्रारंभ हुआ तब से अब तक इस परंपरा में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। यह ...
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कर्ण ने कृष्ण से पूछा - मेरा जन्म होते ही मेरी माँ ने मुझे त्याग दिया। क्या अवैध संतान होना मेरा दोष था ? द्रौपदी स्वयंवर में मेरा अपमान किया गया।
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भगवान श्रीकृष्ण ने तत्काल उठकर अपना दक्षिण हस्त उठाया और हनुमानजी को स्पर्श करके सावधान किया : रुको ! तुम्हारे क्रोध करने का समय नहीं है।
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