
बाज की असली उड़ान अभी बाकी है, इरादों का इम्तिहान अभी बाकी है,
अरे अभी तो नापी है मुट्ठी भर जमीन, अभी पूरा आसमान बाकी है...
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस का अंदाज कुछ इसी तरह नजर आया था। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के बाद उन्होंने एक बार फिर इन्हीं लाइनों को दोहराया था। यह पंक्तियां उन पर पूरी तरह खरी भी उतरती हैं। महाराष्ट्र से बाहर भी उनकी लोकप्रियता है। वे केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा के उन नेताओं में शुमार हैं, जिनका नाम प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में भी लिया जाता है। फडणवीस महाराष्ट्र के 21वें मुख्यमंत्री हैं। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का तीसरा सबसे बड़ा और जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा राज्य, महाराष्ट्र, उच्चतम औद्योगिक उत्पादन (देश के उत्पादन का लगभग 25%) के साथ आर्थिक रूप से सबसे उन्नत राज्य बन गया।
वर्ष 2019 में शिवसेना के साथ गठबंधन टूटने के बाद जब फडणवीस विपक्ष में थे तो उन्होंने कहा था- 'मेरा पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समंदर हूं, लौटकर वापस आऊंगा'। यह बात भी सच साबित हुई। 2024 के विधानसभा चुनाव में वे पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर होकर उभरे और उन्होंने राज्य में तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके विरोधी हाथ मलते रह गए। सत्ता में वापसी के बाद उन्होंने अपने एक और पुराने बयान को सही साबित कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था- 'मैं आधुनिक अभिमन्यु हूं, मैं चक्रव्यूह को तोड़ना भी जानता हूं। दृढ़ इच्छाशक्ति के धनी देवेंद्र फडणवीस ने जो कहा था, वह कर भी दिखाया।
फडणवीस को कुशल प्रशासक के साथ ही भाजपा के लिए महाराष्ट्र में एक प्रमुख रणनीतिकार के रूप में भी देखा जाता है। उनके समर्थक उन्हें एक सक्षम और कुशल प्रशासक मानते हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में सुधार लाने का प्रयास किया। 2022 में मुख्यमंत्री पद छोड़कर उपमुख्यमंत्री बनने के उनके फैसले को राजनीतिक विश्लेषकों ने भाजपा के लिए एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा, जिसने महाराष्ट्र में पार्टी को सत्ता में बनाए रखने में मदद की।
महाराष्ट्र में 'देवा भाऊ' के नाम से मशहूर फडणवीस ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की, जो कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा एक छात्र संगठन है। 22 साल की उम्र में वे नागपुर नगर निगम में पार्षद बने। 1997 में उन्होंने 27 साल की उम्र में नागपुर के मेयर का पद संभाला। उनके नाम नागपुर का सबसे युवा मेयर होने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। फडणवीस 2001 तक इस पद पर रहे। 1999 में फडणवीस नागपुर पश्चिम सीट से पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए। तब से उन्होंने लगातार विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है। 2013 में वे महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में पार्टी ने 2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बाद वे महाराष्ट्र के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया।
फडणवीस को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता गंगाधर राव फडणवीस जनसंघ और बाद में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता रहे। गंगाधर राव ने नागपुर में राजनीतिक और सामाजिक जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी मां सरिता फडणवीस ने गृहिणी होने के साथ-साथ विदर्भ हाउसिंग बोर्ड के निदेशक पद की जिम्मेदारी भी निभाई। उनके माता-पिता दोनों ने ही देवेन्द्र के शुरुआती जीवन और राजनीतिक मूल्यों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके घर का माहौल ऐसा था, जहां राजनीतिक चर्चाएं और सामाजिक मुद्दों पर बातचीत होती रहती थी।
मुख्यमंत्री फडणवीस का बचपन नागपुर में ही बीता। उनकी शुरुआती पढ़ाई इंदिरा कॉन्वेंट स्कूल में हुई। एक दिलचस्प बात यह है कि उनके पिता ने आपातकाल के दौरान विरोध स्वरूप उन्हें कुछ समय के लिए इस स्कूल से निकालकर शारदा आश्रम स्कूल में दाखिला दिलाया था, क्योंकि स्कूल का नाम तत्कालीन प्रधानमंत्री के नाम पर था। उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई नागपुर के कॉलेज से पूरी की और बाद में नागपुर विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री (LLB) हासिल की। उनकी पत्नी अमृता फडणवीस पेशे से एक बैंकर होने के साथ-साथ एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। उनकी इकलौती बेटी का नाम दिविजा है। फडणवीस के बारे में कहा जाता है कि वे एकांतप्रिय व्यक्ति हैं। उन्हें लिखना, पढ़ना, फिल्में और वेब-सीरीज देखना, क्रिकेट खेलना और संगीत सुनना पसंद है।
मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना की शुरुआत। 21 से 65 वर्ष आयु वर्ग की गरीब महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपए दिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने मुंबई और नवी मुंबई में ग्रीन इंटीग्रेटेड डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने की घोषणा की है, जिससे लगभग 1 लाख करोड़ का निवेश आने और 20,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
निवेशकों की मदद के लिए एक विशेष डेस्क स्थापित करने और एक नई निवेश नीति बनाने के निर्देश दिए, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप हो।
उन्होंने गौरव योजना के तहत आपातकाल के दौरान जेल में बंद रहे व्यक्तियों और उनके जीवनसाथी को मिलने वाले मानदेय को दोगुना करने का निर्णय लिया है।
'नमो किसान सम्मान निधि' को बढ़ाने और किसानों के लिए एक डिजिटल मित्र चैट-बॉट विकसित करने का भी मुख्यमंत्री फडणवीस ने ऐलान किया।
यह उनकी सबसे महत्वाकांक्षी और चर्चित योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य राज्य के गांवों को सूखा-मुक्त बनाना था। इस अभियान के तहत गांवों में जल-संरक्षण के काम किए गए, जैसे- नदियों को गहरा और चौड़ा करना, छोटे चेक-डैम बनाना और तालाबों का निर्माण करना ताकि बारिश का पानी गांव में ही रोका जा सके। इस कार्यक्रम को न केवल किसानों से, बल्कि सभी वर्गों के लोगों से जबरदस्त समर्थन मिला। देखते ही देखते एक सरकारी कार्यक्रम जन आंदोलन में बदल गया। इस कार्यक्रम ने गांवों में सद्भाव को भी बढ़ावा दिया है। लोगों को संसाधन जुटाने और अपने स्थायी समाधान खोजने के लिए एकजुट होने का अधिकार दिया।
2017 में फडणवीस सरकार ने किसानों की डेढ़ लाख रुपए तक की कर्जमाफी की घोषणा की। इस योजना का उद्देश्य उन किसानों को राहत देना था जो फसल खराब होने या सूखे के कारण कर्ज चुकाने में असमर्थ थे।
इस योजना का उद्देश्य किसानों को दिन के समय सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराना था ताकि वे अपनी फसलों की सिंचाई कर सकें।
यह महाराष्ट्र का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट है। फडणवीस सरकार ने इसे 'गेम चेंजर' प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया, जिसका उद्देश्य मुंबई और नागपुर के बीच यात्रा के समय को कम करना और विदर्भ क्षेत्र में विकास को गति देना था।
उनके कार्यकाल में मुंबई और नागपुर जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं पर काम में तेजी लाई गई।
यह महाराष्ट्र सरकार की स्वास्थ्य योजना है, जिसका उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त तथा रियायती चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेघर और गरीब लोगों के लिए घर बनाने के लिए इस घरकुल आवास योजना की शुरुआत की गई थी।
इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था।
उनके नेतृत्व और निवेश एवं औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों के तहत, महाराष्ट्र ने 2016 में देश में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह का 50% आकर्षित करने की उपलब्धि हासिल की थी।
फडणवीस ने सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही सेवा का अधिकार अधिनियम लागू करने की घोषणा की। उस समय, यह देश में सार्वजनिक सेवाओं के कुशल वितरण को सुनिश्चित करने वाला अपनी तरह का पहला कानून था। अंततः 393 सेवाओं को ऑनलाइन लाया गया जिससे लाखों लोगों को लाभ हुआ।
आम आदमी की समस्याओं को आसानी से हल करने के लिए ‘आपले सरकार’ भी उनके द्वारा शुरू किया गया एक अनूठा शिकायत निवारण मंच है।
"इसमें कोई संदेह नहीं कि देवेंद्र फडणवीस की राजनीतिक कुशलता और चुनौतियों से जूझने की खूबी उन्हें और नेताओं से अलग बनाती है। उनके नाम राजनीतिक, सामाजिक और अन्य क्षेत्रों में कई उपलब्धियां दर्ज हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में भी देवेन्द्र फडणवीस का नाम प्रभावशाली बनकर उभरा है"