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Written By WD Feature Desk
Last Updated : मंगलवार, 10 मार्च 2026 (12:59 IST)

नवरात्रि में कैसे करें घटस्थापना? जानें कलश पूजन की संपूर्ण विधि

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चैत्र नवरात्रि का पर्व इस बार 19 मार्च 2026 गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है। शारदीय हो या चैत्र, दोनों ही नवरात्रि के नौ दिनों की शक्ति साधना का केंद्र 'घट' और 'कलश' होता है। इसे स्थापित करने का अर्थ है- अपने घर में साक्षात देवत्व को आमंत्रित करना और उन्हें उक्त जगह स्थापित करके उनकी पूजा करना। आइए जानते हैं कलश और घट स्थापना की संपूर्ण विधि।
 

1. मिट्टी के पात्र (घट) की तैयारी

घट: सबसे पहले एक चौड़े मुँह वाला मिट्टी का पात्र (घट) लें। यह सृष्टि और प्रकृति का प्रतीक है।
परत दर परत सृजन: पात्र में सबसे पहले थोड़ी शुद्ध मिट्टी डालें, फिर मुट्ठी भर जौ (ज्वारे) छिड़कें। इसके ऊपर फिर से मिट्टी की एक परत बिछाएं।
यही प्रक्रिया दोहराएं: एक बार फिर जौ और फिर मिट्टी डालें। अब पात्र को ऊपर तक भरकर उस पर हल्का सा जल छिड़कें ताकि नमी बनी रहे।
आसन: घर के ईशान कोण में एक लकड़ी की चौकी (पाट) रखें, उस पर साफ लाल कपड़ा बिछाएं और इस मिट्टी के पात्र को वहां स्थापित करें।
 

2. मंगल कलश की स्थापना

कलश: कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है, जिसमें सभी तीर्थों और देवताओं का वास होता है।
कलश तैयार करें: तांबे या मिट्टी के कलश में शुद्ध जल भरें। इसके कंठ (गले) पर पवित्र मौली (कलावा) बांधें।
शुभ चिह्न: कलश के मुख्य भाग पर रोली या चंदन से स्वास्तिक बनाएं।
पल्लव और नारियल: कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच पत्ते रखें। एक जटाधारी नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर, कलावा बांधकर पत्तों के बीचों-बीच इस प्रकार रखें कि नारियल का मुख ऊपर की ओर या साधक की ओर हो। अब इस कलश को मिट्टी वाले पात्र के ऊपर बीच में रख दें।
 

3. देवी और देवताओं का आह्वान

स्वागत: एक बार जब स्थापना पूर्ण हो जाए, तब पूरे भक्ति भाव से देवताओं का स्वागत करें।
प्रथम पूज्य का स्मरण: सबसे पहले भगवान गणेश की वंदना करें। उनके बिना कोई भी मंगल कार्य अधूरा है।
देवताओं का निमंत्रण: हाथ जोड़कर सभी देवी-देवताओं और माता दुर्गा का आह्वान करें। प्रार्थना करें: "हे समस्त दिव्य शक्तियों, आप अगले 9 दिनों के लिए इस कलश में विराजमान होकर हमें अनुग्रहित करें।"
 

4. पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन

षोडशोपचार पूजन: कलश का पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करते हैं। कलश को तिलक लगाएं, अक्षत (चावल) चढ़ाएं और ताजे फूलों की माला अर्पित करें।
भोग और सुगंध: कलश के समीप फल, मिठाई और प्रसाद रखें। माता को इत्र और नैवेद्य अर्पित कर धूप-दीप जलाएं।
विशेष टिप: ध्यान रहे कि इन नौ दिनों में जौ वाले पात्र में नमी बनी रहे। जैसे-जैसे ये जौ अंकुरित होकर बढ़ेंगे, वैसे-वैसे घर में सुख-समृद्धि का आगमन माना जाता है।
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