Gupt Navratri: गुप्त नवरात्रि को शक्ति साधना और तंत्र उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण समय माना जाता है। वर्ष में आने वाली चार नवरात्रियों में से माघ और आषाढ़ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस दौरान की जाने वाली साधनाएं आम नवरात्रि से अलग और अधिक गूढ़ मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में मां कालिका की साधना विशेष फलदायी होती है। लेकिन सवाल यह है- गुप्त नवरात्रि में मां कालिका की साधना को इतना खास क्यों माना जाता है?
गुप्त नवरात्रि हाइलाइट्स | Gupt Navratri Highlights
1. गुप्त नवरात्रि क्या होती है?
2. मां कालिका की साधना क्यों मानी जाती है विशेष
3. गुप्त नवरात्रि में साधना का सही समय
4. गुप्त नवरात्रि में मां कालिका की साधना विशेष मान्यता
5. गुप्त नवरात्रि में साधना करते समय सावधानियां
6. गुप्त नवरात्रि में साधना का लाभ
7. गुप्त नवरात्रि की खास साधना
8. गुप्त नवरात्रि और मां कालिका साधना के सवाल- FAQs
1. गुप्त नवरात्रि क्या होती है?
जहां चैत्र और अश्विन नवरात्रि सामान्य भक्तों के लिए होती हैं, वहीं गुप्त नवरात्रि साधकों और उपासकों के लिए मानी जाती है। इस दौरान साधना को गुप्त रखने की परंपरा है, इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहा गया है।
2. मां कालिका की साधना क्यों मानी जाती है विशेष?
मां कालिका शक्ति का स्वरूप हैं उग्र: मां कालिका को समय, परिवर्तन और शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। उनकी साधना से भय, नकारात्मकता और बाधाओं से मुक्ति की मान्यता है।
3. गुप्त नवरात्रि में साधना का सही समय
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक और शक्ति साधनाएं जल्दी फल देती हैं। इसी कारण मां कालिका की उपासना इस समय विशेष मानी जाती है।
4. गुप्त नवरात्रि में मां कालिका की साधना विशेष मान्यता
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की मान्यता
मान्यता है कि इस काल में नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय होती हैं। मां कालिका की साधना को इनसे रक्षा करने वाला कवच माना जाता है। यदि आप इस काल में साधना करने हैं तो नकारात्मक शक्तियां को खुद से दूर करके उच्च आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त कर सकते हैं।
5. गुप्त नवरात्रि में साधना करते समय सावधानियां
मां कालिका की उपासना में मौन और संयम के साथ ही नियमों की प्रधानता है। सात्विक आचरण को विशेष महत्व बताया गया है, जो गुप्त नवरात्रि की आत्मा मानी जाती है। यदि इसका ध्यान नहीं रखा गया तो साधना व्यर्थ सिद्ध होती है और साधक को इसका नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
6. गुप्त नवरात्रि में साधना का लाभ
कहा जाता है कि मां कालिका की साधना से आत्मविश्वास, साहस और मानसिक स्थिरता में वृद्धि होती है। जातक अपने हर कार्य में निर्णय लेने की क्षमता प्राप्त करके आत्म विश्वास के साथ आगे बढ़ता जाता है। साधक की सभी मनोकामना पूर्ण होती है या वह जिस उद्देश्य के लिए साधना कर रहा था वह उद्येश्य पूर्ण होता है।
✔साधक को आंतरिक शक्ति देती है
✔भय और संशय को दूर करती है
✔आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलती है
✔सभी मनोकामना होती है पूर्ण
7. गुप्त नवरात्रि की खास साधना
मंत्र: काली : ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा:।
साबर मंत्र :
ॐ नमो काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिह्वा वाली,
चार वीर भैरों चौरासी, चार बत्ती पूजूं पान ए मिठाई,
अब बोलो काली की दुहाई।
इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करने से आर्थिक लाभ मिलता है। इससे धन संबंधित परेशानी दूर हो जाती है। माता काली की कृपा से सब काम संभव हो जाते हैं। 15 दिन में एक बार किसी भी मंगलवार या शुक्रवार के दिन काली माता को मीठा पान व मिठाई का भोग लगाते रहें।
दूसरा साबर मंत्र
।।ऊँ कालिका खडग खप्पर लिए ठाड़ी
ज्योति तेरी है निराली
पीती भर भर रक्त की प्याली
कर भक्तों की रखवाली
ना करे रक्षा तो महाबली भैरव की दुहाई।।
गुप्त नवरात्रि की पूजन विधि:
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गुप्त नवरात्रि पर्व के दिनों में सुबह जल्द उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें।
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देवी पूजन की सभी सामग्री को एकत्रित करें। पूजा की थाल सजाएं।
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मां दुर्गा की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र में सजाएं।
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मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोएं और नवमी तक प्रति दिन पानी का छिड़काव करें।
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पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें।
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इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियां लगाएं और उस पर नारियल रखें।
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फिर कलश को लाल कपड़े से लपेटें और कलावा के माध्यम से उसे बांधें।
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अब इसे मिट्टी के बर्तन के पास रख दें।
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फूल, कपूर, अगरबत्ती, ज्योत के साथ पंचोपचार पूजा करें।
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पूरे परिवार सहित माता का स्वागत करें, उनका पूजन, आरती करके भोग लगाएं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें।
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नौ दिनों तक मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें।
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अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं।
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गुप्त नवरात्रि अंतिम दिन दुर्गा पूजा के बाद घट विसर्जन करें।
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मां की आरती गाएं, उन्हें फूल, अक्षत चढ़ाएं और बेदी से कलश को उठाएं।
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इस तरह नवरात्रि के पूरे दिनों में मां की आराधना करें।
8. गुप्त नवरात्रि और मां कालिका साधना पर प्रश्न उत्तर सवाल- FAQs
Q1. गुप्त नवरात्रि में मां कालिका की पूजा कौन कर सकता है?
A. आम भक्त मां कालिका की सात्विक पूजा कर सकते हैं। तांत्रिक साधना अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।
Q2. क्या गुप्त नवरात्रि में व्रत रखना जरूरी है?
A. व्रत अनिवार्य नहीं है, लेकिन संयम और सात्विक जीवन शैली अपनाना शुभ माना जाता है।
Q3. मां कालिका की साधना में क्या सावधानी रखें?
A. साधना को गुप्त रखें, क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहें तथा नियमों का पालन करें। मंत्रों का उच्चारण सही करें और पूजा में किसी भी प्रकार से त्रुटि न रखें।