गुरुवार, 26 मार्च 2026
  1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. नवरात्रि
  4. navarna mantra ke fayde grah shanti shakti sadhana
Written By WD Feature Desk
Last Updated : शनिवार, 14 मार्च 2026 (17:39 IST)

नवार्ण मंत्र इतना शक्तिशाली क्यों माना जाता है? ग्रह शांति और शक्ति साधना से जुड़ा रहस्य

mata durga and navarna mantra
Navarna mantra: नवार्ण मंत्र ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे सनातन धर्म के शाक्त संप्रदाय (शक्ति की उपासना) का सबसे शक्तिशाली और प्रभावी मंत्र माना जाता है। 'नवार्ण' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: 'नव' (नौ) और 'अर्ण' (अक्षर)। यानी नौ अक्षरों वाला मंत्र। नवरात्रि में इस मंत्र को जपने का महत्व बढ़ जाता है। नवरात्रि में इसके जप से जहां सिद्धि और शक्ति प्राप्त होती है वहीं यह नौ ग्रहों के दोष को शांत करता है। 
 

1. मंत्र का स्वरूप

वह मूल मंत्र इस प्रकार है:
"ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"
 

2. मंत्र के नौ अक्षरों का अर्थ

इस मंत्र का प्रत्येक अक्षर माँ दुर्गा की एक विशेष शक्ति और एक विशिष्ट ग्रह से जुड़ा है:
अक्षर संबंधित शक्ति (देवी) संबंधित ग्रह
ऐं माँ सरस्वती (ज्ञान की देवी) सूर्य
ह्रीं माँ लक्ष्मी (ऐश्वर्य की देवी) चन्द्रमा
क्लीं माँ काली (शक्ति की देवी) मंगल
चा माँ शैलपुत्री बुध
मुं माँ ब्रह्मचारिणी बृहस्पति (गुरु)
डा माँ चंद्रघंटा शुक्र
यै माँ कुष्माण्डा शनि
वि माँ कात्यायनी राहु
च्चे माँ कालरात्रि/महागौरी/सिद्धिदात्री केतु

3. बीज मंत्रों का विशेष महत्व

इस मंत्र के पहले तीन शब्द 'त्रिशक्ति' को दर्शाते हैं:
ऐं: यह महासरस्वती का बीज मंत्र है, जो बुद्धि और ज्ञान प्रदान करता है।
ह्रीं: यह महालक्ष्मी का बीज मंत्र है, जो धन, सम्मान और समृद्धि देता है।
क्लीं: यह महाकाली का बीज मंत्र है, जो शत्रुओं का नाश और आकर्षण शक्ति प्रदान करता है।
चामुण्डायै विच्चे: इसका अर्थ है कि हे माँ चामुंडा (जो चण्ड और मुण्ड का विनाश करने वाली हैं), आप मुझे ज्ञान के बंधन से मुक्त करें या मुझे आत्मज्ञान प्रदान करें।
 

4. नवार्ण मंत्र के लाभ

नकारात्मकता का नाश: यह मंत्र भय, तनाव और ऊपरी बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है।
ग्रह शांति: चूंकि नौ अक्षर नौ ग्रहों को नियंत्रित करते हैं, इसलिए इसके जाप से कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं।
आत्मविश्वास: इस मंत्र के नियमित जाप से मानसिक शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है।
 

मंत्र की शक्ति और संरचना

'नव' (नौ) और 'अर्ण' (अक्षर) से बना यह नौ अक्षरों का मंत्र साक्षात आदिशक्ति के नौ रूपों का प्रतीक है। इसका प्रत्येक अक्षर एक विशिष्ट देवी शक्ति को जागृत करता है, जो क्रमवार सूर्य से लेकर केतु तक, सभी नौ ग्रहों को नियंत्रित करती है। जहाँ मंत्र का पहला अक्षर 'ऐं' सूर्य और माँ शैलपुत्री से जुड़ा है, वहीं अंतिम अक्षर 'च्चे' केतु और माँ सिद्धिदात्री की कृपा बरसाता है।
 
नवार्ण मंत्र के नौ अक्षरों में पहला अक्षर ऐं है, जो सूर्य ग्रह को नियंत्रित करता है। ऐं का संबंध दुर्गा की पहली शक्ति शैल पुत्री से है, जिसकी उपासना 'प्रथम नवरात्रि' को की जाती है। दूसरा अक्षर ह्रीं है, जो चंद्रमा ग्रह को नियंत्रित करता है। इसका संबंध दुर्गा की दूसरी शक्ति ब्रह्मचारिणी से है, जिसकी पूजा दूसरे नवरात्रि को होती है।तीसरा अक्षर क्लीं है, चौथा अक्षर चा, पांचवां अक्षर मुं, छठा अक्षर डा, सातवां अक्षर यै, आठवां अक्षर वि तथा नौवा अक्षर चै है। जो क्रमशः मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु तथा केतु ग्रहों को नियंत्रित करता है। 
 

ब्रह्मांडीय संतुलन और पुरुषार्थ

यह मंत्र केवल ग्रहों की शांति तक सीमित नहीं है। इसके मूल में ब्रह्मा, विष्णु, महेश की त्रिदेव शक्ति और महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती की त्रिदेवी ऊर्जा समाहित है। पूर्ण निष्ठा से इसका जाप करने पर साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।
 

जाप की विधि और रूपांतरण

आध्यात्मिक लाभ के लिए 108 दानों की माला पर प्रतिदिन कम से कम तीन माला जाप करना श्रेष्ठ है। विशेष बात यह है कि दुर्गा सप्तशती में विजयादशमी के महत्व को जोड़ते हुए इसके आगे 'ॐ' लगाकर इसे दशाक्षर मंत्र का रूप भी दिया गया है। चाहे नौ अक्षर हों या दस, श्रद्धा और एकाग्रता होने पर इसका कल्याणकारी प्रभाव समान रूप से मिलता है।
 

सावधानी

शास्त्रों के अनुसार, नवार्ण मंत्र अत्यंत प्रभावशाली और 'जागृत' मंत्र है। इसका पूर्ण लाभ लेने के लिए इसे 'विनियोग', 'ऋष्यादि न्यास' और 'कर न्यास' के साथ करना श्रेष्ठ माना जाता है। अक्सर इसे दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले और बाद में जपा जाता है।