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Written By WD Feature Desk
Last Updated : मंगलवार, 13 जनवरी 2026 (19:23 IST)

पतंग उत्सव कब से मनाया जा रहा है, जानिए इसका प्राचीन इतिहास

पतंग का इतिहास
The history of kites and festivals: पतंग कहां से आई, किसने की इसकी उत्पत्ति यह रहस्य अभी भी बरकरार है, लेकिन यह भी एक सत्य है कि पतंग का उत्सव या पतंग उड़ाने का प्रचलन प्राचीनकाल से ही भारत में रहा है। जब हम प्राचीनकाल की बात करते हैं तो यह मुगल, गुप्त और बौद्ध काल से भी पुरानी बाते होती हैं।कुछ भी हो, पतंग उड़ाने की प्रथा प्राचीन होते हुए भी सार्व-देशीय भी है। भारत में तो इसे परंपरागत रूप से उड़ाया जाता है। मलेशिया, जापान, चीन, थाईलैंड, वियतनाम आदि देशों में भी पतंग उड़ाई जाती है। चलिए जानते हैं पतंग महोत्सव और पंचग उड़ाने का इतिहास।
 
पतंग' शब्द बहुत प्राचीन है। सूर्य के लिए भी 'पतंग' शब्द का प्रयोग हुआ है। पक्षियों को भी पतंग कहा जाता रहा है। 'कीट-पतंगे' शब्द आज भी प्रयोग में है। संभव है इन्हीं शब्दों से वर्तमान पतंग का नामकरण किया गया हो। शायद आसमान के नक्षत्र और उड़ते पक्षियों को देखकर मनुष्य के मन में कुछ उड़ाने की प्रेरणा मिली हो। संभव है इसी से पतंग का सामंजस्य बिठाया गया होगा। 
1. तमिल रामायण: तमिळ की तन्दनानरामायण के अनुसार, भगवान श्री राम ने मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की शुरुआत की थी, जो स्वर्ग (इंद्रलोक) तक गई थी। तमिल रामायण, जिसे कंब रामायणम या रामावतारम कहते हैं, 12वीं शताब्दी (लगभग 1178 ईस्वी) में प्रसिद्ध कवि कंबन (Kamban) द्वारा लिखी गई थी, जो चोल राजा कुलोतुंग तृतीय के समकालीन थे।
 
2. मराठी संत: 13वीं शताब्दी के मराठी संत नामदेव की कविताओं में 'गुड़ी' का जिक्र मिलता है।
 
3. मधुमालती: 16वीं शताब्दी के कवि मंझन की 'मधुमालती' में भी 'पतंग' शब्द का उल्लेख है।
 
2. रामचरितमानस: रामचरितमानस में महाकवि तुलसीदास ने ऐसे प्रसंगों का उल्लेख किया है, जब श्रीराम ने अपने भाइयों के साथ पतंग उड़ाई थी। इस संदर्भ में बाल कांड में उल्लेख मिलता है।
 
'राम इक दिन चंग उड़ाई।
इंद्रलोक में पहुंची जाई॥'
संदेह: यह वे प्रसंग हैं जिनके आधार पर पतंग की प्राचीनता का पता चलता है, लेकिन सवाल यह है कि इस तरह का प्रसंग तो वाल्मीकि जी की रामायण में नहीं मिलता है। यह तो हो सकता है कि तुलसीदासजी ने यह प्रसंग जोड़ दिया हो!... तुलसीदाजी का 1532 में हुआ था। इसका अर्थ है कि यह तो मात्र 500 साल पुरानी बात है। यानी तब भारत में पतंग का प्रचलन था तभी तो इसे प्रसंग में लिया गया। 
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4. क्या चीन से आई पतंग?
कुछ इतिहासकार मानते हैं कि पतंग का जनक चीन है, लेकिन धीरे-धीरे यह उत्सव एशियाई देशों में फैलता गया। चीन के वेइफांग शहर में काइट फेस्टिवल मनाया जाता है। इस फेस्‍टिवल में रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्‍ट्रेलिया, जापान, फ्रांस, कनाडा और इंडोनेशिया समेत अन्‍य देशों के हजारों लोग देखने आते हैं। यह हर साल 20 से 25 अप्रेल के बीच मनाया जाता है। कहते हैं कि बौद्ध काल में चीन से भारत आए बौद्ध लोगों ने इसकी शुरुआत की थी। भारत में, विशेष रूप से गुजरात, राजस्थान और पंजाब में, यह पर्व मकर संक्रांति से जुड़ गया।
5. क्या पर्सिया से आई पतंग?
कुछ इतिहासकार मानते हैं कि भारत में पतंग उड़ाने का प्राचलन मुस्लिम काल में प्रारंभ हुआ क्योंकि इस काल में पर्सिया यानी ईरान से आए लोगों ने भारत में पतंग उड़ाने का प्रचलन प्रारंभ किया। यहां से आए मुस्लिम व्यापारियों ने इसकी शुरुआत की। मुगलों और नवाबों (विशेषकर लखनऊ के नवाबों) के समय में पतंगबाजी एक राजसी खेल बन गई थी। नवाब आसफ़ुद्दौला के शासनकाल में यह मनोरंजन का प्रमुख साधन थी। 
 
संदेह: पर्सिया से आई पतंग का दावा इसलिए सच नहीं है क्योंकि मुगल या मुस्लिम काल के पहले से ही भारत में पतंग उड़ाने का प्रचलन रहा है जिसके कई प्रमाण मिलते हैं। जैसे तमिल की कंबन रामायण जो 12वीं शताब्दी में लिखी गई थी उसमें इसके प्रमाण मिलते हैं। 12वीं शताब्ती में तो मुस्लिमों का आक्रामण प्रारंभ ही हुआ था।
 
निष्कर्ष: पतंग का जनक देश भारत और चीन में से कोई एक हो सकता है। इस पर शोध किए जाने की जरूरत है, लेकिन इसे मुगल काल से जोड़ना अनुचित है।