Holashtak 2026: होलाष्टक का समय ज्योतिष और धर्म की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च (होलिका दहन) तक रहेगा। इन 8 दिनों में ग्रहों का स्वभाव काफी उग्र रहता है, इसलिए कुछ विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं। यहाँ विस्तृत विवरण दिया गया है कि इन 8 दिनों में आपको क्या करना चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए।
होलाष्टक में ग्रहों का उग्र क्रम (किस दिन कौन सा ग्रह)
मान्यता है कि इन 8 दिनों में हर दिन एक ग्रह उग्र होता है, इसलिए मन बेचैन हो सकता है:
1. पहला दिन (अष्टमी):- चंद्रमा- शिवजी को जल और दूध अर्पित करें।
2. दूसरा दिन (नवमी):- सूर्य- विष्णुजी को गुड़ की खीर अर्पित करें।
3. तीसरा दिन (दशमी):- शनि- शनि भगवान को तेल और काले तिल अर्पित करें।
4. चौथा दिन (एकादशी):- शुक्र- माता लक्ष्मी को कमल का फूल अर्पित करें।
5. पांचवां दिन (द्वादशी):- गुरु (बृहस्पति)- भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को पीले फूल अर्पित करें।
6. छठा दिन (त्रयोदशी):- बुध- माता दुर्गा को चुनरी अर्पित करें।
7. सातवां दिन (चतुर्दशी):- मंगल- हनुमानजी को सिंदुर, गुड़ और चना अर्पित करें।
8. आठवां दिन (पूर्णिमा):- चंद्रमा और भैरव महाराज को कच्चा दूध अर्पित करें।
विशेष सलाह: इन 8 दिनों में वातावरण में नकारात्मकता और उग्रता अधिक होती है। इसलिए, ध्यान और धैर्य को अपना हथियार बनाएं। यदि घर में नकारात्मकता महसूस हो, तो सुबह-शाम कपूर जलाएं और गंगाजल का छिड़काव करें।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
16 संस्कार: विवाह, सगाई, मुंडन, नामकरण, जनेऊ, या यज्ञोपवीत जैसे कोई भी संस्कार न करें।
नया व्यवसाय: नया बिजनेस शुरू करने या किसी नई साझेदारी (Partnership) में जाने से बचें।
खरीददारी: नया घर (गृह प्रवेश), गाड़ी, सोना-चांदी या प्रॉपर्टी खरीदने से बचना चाहिए।
भवन निर्माण: घर की नींव रखना या नया निर्माण कार्य शुरू करना शुभ नहीं माना जाता।
विवाद: इन दिनों मन अस्थिर रहता है, इसलिए बहस, झगड़े या किसी के प्रति कड़वे बोल बोलने से बचें।
क्या करें (शुभ कार्य)
ईष्ट देव की पूजा: अपने गुरु या ईष्ट देव का ध्यान करें। भगवान विष्णु और शिव की आराधना अत्यंत फलदायी होती है।
मंत्र जाप: महामृत्युंजय मंत्र, हनुमान चालीसा, या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप मानसिक शांति देता है।
दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े या धन का दान करें। गायों को चारा खिलाना भी शुभ होता है।
साफ-सफाई: होलाष्टक शुरू होने से पहले घर की गंदगी और टूटी-फूटी चीजें निकाल दें (वास्तु दोष दूर करने के लिए)।
होलिका दहन की तैयारी: पहले दिन से ही सार्वजनिक स्थान पर 'होली का डंडा' स्थापित किया जाता है। लोग वहां सूखी लकड़ियाँ और उपले इकट्ठा करना शुरू करते हैं।