Bhagoria Mela Madhya Pradesh: भगोरिया पर्व एक लोकप्रिय और अनोखा त्योहार है, जो मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के झाबुआ और आलीराजपुर जिले में होली से ठीक पहले मनाया जाता है। इस बार यह पर्व से 24 फरवरी 2026, दिन मंगलवार से शुरू हो चुका है, जो कि 2 मार्च तक मनाया जाएगा।
ALSO READ: Holika Dahan 2026: पूर्णिमा को है ग्रहण, कब करें होलिका दहन..!
यह पर्व विशेष रूप से आदिवासी समुदाय द्वारा मनाया जाता है और इसके साथ कई रोमांचक और रंगीन परंपराएं जुड़ी होती हैं। भगोरिया मुख्य रूप से झाबुआ, अलीराजपुर, धार और खरगोन जिलों का सबसे प्रसिद्ध और रंगीन लोक उत्सव है।इस पर्व के माध्यम से लोग अपने रिश्तों को मजबूत करते हैं और अपने सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास करते हैं। यह पर्व होली से सात दिन पहले शुरू होता है और होलिका दहन के दिन समाप्त होता है।
-
भगोरिया का इतिहास
-
प्रेम विवाह की परंपरा
-
रंगों का खेल
-
पारंपरिक नृत्य
-
प्राकृतिक संसाधनों से बनी वस्त्रों की सजावट
-
आधिकारिक मेलों का आयोजन
भगोरिया का इतिहास
कहा जाता है कि भगोरिया पर्व के दौरान लड़के और लड़कियां अपने परिवारों से छिपकर एक-दूसरे से मिलते हैं और एक-दूसरे को पसंद करने का मौका पाते हैं। यह एक प्रकार से "किसी को पसंद करने और विवाह प्रस्ताव" का प्रतीक है।
परंपराएं और रोचक पहलु
1. प्रेम विवाह की परंपरा
भगोरिया नाम का अर्थ- 'भगोरिया' शब्द 'भाग' (भागना) से भी जोड़कर देखा जाता है। भगोरिया पर्व में आदिवासी युवा एक-दूसरे से खुले तौर पर मिलते हैं, और एक-दूसरे को देख कर पसंद करते हैं। अगर किसी लड़के या लड़की को दूसरा पसंद आ जाता है, तो वह अपने रिश्तेदारों के साथ उसकी तरफ रंग फेंकते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें पसंद किया गया है।
2. रंगों का खेल
होली के जैसे, भगोरिया पर्व में भी रंगों का खेल होता है। आदिवासी लोग एक-दूसरे को रंगों से रंगते हैं, डांस करते हैं, और इस समय किसी भी प्रकार की बुराई को दूर करने की परंपरा होती है। यह खुशी और उमंग का समय होता है।
3. पारंपरिक नृत्य
इस पर्व के दौरान आदिवासी लोग पारंपरिक नृत्य, जैसे गेर (गरबा), आदिवासी नृत्य करते हैं। ये नृत्य उनके सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा होते हैं और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने में मदद करते हैं।
ALSO READ: Holashtak 2026: होलाष्टक में क्या न करें?
4. प्राकृतिक संसाधनों से बनी वस्त्रों की सजावट
भगोरिया पर्व के समय आदिवासी लोग प्राकृतिक वस्त्र पहनते हैं, जिनमें हाथ से बने गहने, चूड़ियां, और पंखे भी शामिल होते हैं। यह सजावट उनके आदिवासी रीति-रिवाजों को प्रदर्शित करती है।
5. आधिकारिक मेलों का आयोजन
भगोरिया पर्व के दौरान बहुत बड़े मेले आयोजित किए जाते हैं, जहां पर स्थानीय हस्तशिल्प, खिलौने, खाद्य पदार्थ और पारंपरिक वस्त्र बिकते हैं। यहां पर भी बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं, और यह मेले आदिवासी संस्कृति को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन जाते हैं।
6. चिकन, मांसाहारी भोजन और पारंपरिक भोज
इस दिन आदिवासी लोग पारंपरिक मांसाहारी भोजन जैसे चिकन, मांस, और ताजे फल खाते हैं, जो उनके सांस्कृतिक आहार का हिस्सा होते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
ALSO READ: Holi 2026 Date Confused: 2 मार्च को भद्रा तो 3 को ग्रहण, जानें ज्योतिषाचार्यों के अनुसार कब जलेगी होली?