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Written By WD News Desk
Last Updated : मंगलवार, 13 जनवरी 2026 (12:56 IST)

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग, क्या करें और क्या नहीं

मकर संक्रांति
साल 2026 में मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का एक साथ होना बेहद दुर्लभ और पुण्यदायी संयोग है। परंपरा से मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव है, वहीं षटतिला एकादशी भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और पापों के नाश का दिन है। इस विशेष दिन पर किए गए दान और तप का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। यहां विस्तार से बताया गया है कि आपको इस दिन क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए।
 
2. मकर संक्राति का पुण्‍य काल:
मकर संक्रांति पुण्य काल: 14 जनवरी को दोपहर बाद 03:13 से शाम को 05:45 तक रहेगा। अर्थात करीब 02 घण्टे 32 मिनट्स तक यह पुण्य काल रहेगा। 
मकर संक्रांति का महापुण्य काल: 14 जनवरी को दोपहर बाद 03:13 से 04:58 के बीच। अर्थात करीब 01 घण्टा 45 मिनट्स महापुण्‍य काल रहेगा।
विशेष: उपरोक्त काल में ही मकर संक्रांति मनाया जाना शास्त्र सम्मत है। अर्थात 14 जनवरी को दोपहर 03:13 से शाम को 05:45 के बीच मकर संक्रांति मनाएं।
3.षटतिला एकादशी तिथि:
एकादशी तिथि प्रारम्भ: जनवरी 13, 2026 को दोपहर 03:17 से।
एकादशी तिथि समाप्त: जनवरी 14, 2026 को शाम 05:52 तक।
विशेष: शाम 05:52 तक चावल का न तो दान करें और न ही इसे किसी भी रूप में ग्रहण करें। तिथि समाप्ति के बाद दान और ग्रहण दोनों कर सकते हैं। इससे पहले संक्रांति काल में अन्य वस्तुओं का दान कर सकते हैं और उन्हें ग्रहण भी कर सकते हैं। जैसे तिल, गुड़, घी, आटा, तेल या अन्य सामग्री।
 
षटतिला एकादशी पर क्या करें:
चूंकि यह षटतिला एकादशी है, इसलिए इस दिन 'तिल' का महत्व सबसे अधिक है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन तिल का उपयोग 6 तरीकों से करना चाहिए।
 
1. तिल स्नान: पानी में तिल मिलाकर स्नान करें। यह शारीरिक और आध्यात्मिक शुद्धि देता है।
2. तिल का उबटन: शरीर पर तिल का उबटन लगाएं।
3. तिल का हवन: पूजा के दौरान काले तिल से हवन करें।
4. तिल तर्पण: पितरों की शांति के लिए जल में तिल मिलाकर तर्पण करें।
5. तिल का भोजन: प्रसाद के रूप में तिल का सेवन करें।
6. तिल दान: गरीबों या ब्राह्मणों को तिल और गुड़ का दान करें।
अन्य शुभ कार्य:
1. पवित्र स्नान: यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी (गंगा, यमुना, आदि) में स्नान करें।
2. सूर्य देव की पूजा: मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य के जल में लाल चंदन, फूल और तिल डालें।
3. विष्णु सहस्रनाम का पाठ: एकादशी होने के कारण भगवान विष्णु की आराधना करें।
4. खिचड़ी दान: मकर संक्रांति पर चावल और दाल की खिचड़ी का दान करना और उसे ग्रहण करना बहुत शुभ माना जाता है, लेकिन इस दिन षटतिला एकादशी भी है इसलिए एकादशी तिथि समाप्ति के बाद ही यह कार्य करें।
 
मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी पर क्या न करें (वर्जित कार्य):
इस दुर्लभ संयोग पर कुछ सावधानियां रखना अनिवार्य है ताकि व्रत और पर्व का पूर्ण फल मिल सके:

तामसिक भोजन से बचें: इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
चावल का सेवन और दान: एकादशी तिथि पर चावल खाना वर्जित माना जाता है (चाहे वह मकर संक्रांति की खिचड़ी ही क्यों न हो)। यदि आप एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो खिचड़ी का दान भी नहीं। हालांकि कुछ विद्वानों के अनुसार दान तो कर सकते हैं लेकिन सेवन नहीं। लेकिन हमारे सलाह है कि तिथि के समापन के बाद ही यह कार्य करें।
क्रोध और वाद-विवाद: इस दिन शांत रहें। किसी की बुराई न करें और न ही झूठ बोलें।
ब्रह्मचर्य का पालन: शारीरिक संबंध बनाने से बचें और मन को ईश्वर भक्ति में लगाएं।
देर तक न सोएं: सूर्योदय के समय बिस्तर त्याग दें। इस दिन दिन में सोना भी वर्जित माना गया है।
दान का विशेष महत्व: 
मकर संक्रांति और एकादशी के मेल पर इन वस्तुओं का दान "अक्षय पुण्य" (कभी न खत्म होने वाला फल) देता है।
  1. काले तिल और गुड़।
  2. गर्म कपड़े और कंबल।
  3. खिचड़ी (चावल, उड़द दाल, नमक)।
  4. घी और नए बर्तन।
विशेष टिप: यदि आप एकादशी का उपवास कर रहे हैं, तो मकर संक्रांति की खिचड़ी का सेवन अगले दिन 'पारण' के समय करना श्रेष्ठ रहेगा।
 
 
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