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Written By WD Feature Desk
Last Updated : शनिवार, 24 जनवरी 2026 (10:33 IST)

नर्मदा परिक्रमा का क्या है महत्व, कितने दिन चलना पड़ता है पैदल

नर्मदा नदी की पूजा करते भक्त और माता नर्मदा और कैप्शन में नर्मदा परिक्रमा का क्या है महत्व
Narmada Parikrama 2026: नर्मदा नदी की परिक्रमा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन बदल देने वाला अनुभव है। इसे 'प्रदक्षिणा' भी कहा जाता है, जिसमें नदी को हमेशा अपने दाईं (Right) ओर रखकर चला जाता है। पुराणों के अनुसार, इस कठिन यात्रा से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 

नर्मदा नदी परिक्रमा का क्या है महत्व? 

हिन्दू धर्म में परिक्रमा का बड़ा महत्त्व है। परिक्रमा से अभिप्राय है कि सामान्य स्थान या किसी व्यक्ति के चारों ओर उसकी बाहिनी तरफ से घूमना। इसको 'प्रदक्षिणा करना' भी कहते हैं, जो षोडशोपचार पूजा का एक अंग है। नर्मदा परिक्रमा या यात्रा एक धार्मिक यात्रा है। नर्मदा की परिक्रमा का ही ज्यादा महत्व रहा है। नर्मदाजी की प्रदक्षिणा यात्रा में एक ओर जहां रहस्य, रोमांच और खतरे हैं वहीं अनुभवों का भंडार भी है। इस यात्रा के बाद आपकी जिंदगी बदल जाएगी। परिक्रमा करने से पापों का नाश होकर व्यक्ति को मोक्ष मिलता है या वह मरने के बाद सद्गति को प्राप्त होता है। पुराणों के अनुसार नर्मदा परिक्रमा करने से उत्तम जीवन में कुछ नहीं।
 

नर्मदा नदी परिक्रमा का मार्ग और समय

यह यात्रा लगभग 3,312 किलोमीटर लंबी है, जो अमरकंटक से शुरू होकर समुद्र संगम (गुजरात) तक जाती है और फिर दूसरे तट से वापस अमरकंटक पर समाप्त होती है। अधिकांश भक्त ओंकारेश्वर से इसकी शुरुआत करते हैं।
 

नर्मदा नदी यात्रा की अवधि (साधन के अनुसार):

पैदल यात्रा: इसमें लगभग 3 से 4 महीने का समय लगता है। यदि पूर्ण शास्त्रीय नियमों (चातुर्मास विश्राम सहित) का पालन करें, तो इसमें 3 साल 3 महीने तक लग सकते हैं।
वाहन द्वारा: कार या बस से यह यात्रा 12 से 15 दिनों में पूरी की जा सकती है।
साइकिल/बाइक: इसमें लगभग 25 से 40 दिन का समय लगता है।
 

नर्मदा नदी परिक्रमा के प्रमुख नियम और सावधानियाँ

चतुर्मास का निषेध: बारिश के चार महीनों (आषाढ़ एकादशी से कार्तिक एकादशी) में परिक्रमा करना वर्जित माना गया है। गृहस्थों के लिए यात्रा शुरू करने का सबसे अच्छा समय नवंबर (कार्तिक पूर्णिमा) है।
खान-पान: पूरी यात्रा के दौरान सात्विक भोजन, ब्रह्मचर्य और सादगी का पालन अनिवार्य है।
मौसम का ध्यान: 2026 में यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो अक्टूबर से मार्च का समय चुनें, क्योंकि अप्रैल के बाद भीषण गर्मी परिक्रमा को अत्यंत कठिन बना देती है।
मुख्य पड़ाव: अमरकंटक, जबलपुर (भेड़ाघाट), ओंकारेश्वर, महेश्वर और विमलेश्वर (संगम स्थल) इस यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र हैं। अंत में समुद्र का जल ओंकारेश्वर शिवलिंग पर अर्पित कर यात्रा संपन्न होती है।
 
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