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आज होगी माघ मास की समाप्ति, जानें maghi purnima का पौराणिक महत्व

शनिवार,फ़रवरी 27, 2021
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माघ पूर्णिमा माघ मास का आखिरी दिन है। इसके अगले दिन से फाल्गुन मास शुरू हो जाएगा। पढ़ें 10 काम की बातें...
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जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की है और जो श्वेत वस्त्र धारण करती है,
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यश, विद्या, पराक्रम और बुद्धि के लिए बस यही 11 नाम पर्याप्त हैं। ये नाम असंभव को संभव बना देते हैं। अत: वसंत पंचमी पर इन नामों का जप अवश्य करें।
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मां संतोषी को प्रिय शुक्रवार के दिन विधि-विधान से पूजन, विधि, कथा सुनने तथा आरती आदि करने से जीवन में लाभदायी परिणाम प्राप्त होते है।
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इस बार संकष्टी चतुर्थी 31 जनवरी 2021 और 1 फरवरी को मनाया जा रहा है। 1 फरवरी को सोमवार भी है। श्री गणेश शिव जी के पुत्र हैं
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हमारी सांसों की संख्या के आधार पर 108 दानों की माला स्वीकृत की गई है। 24 घंटों में एक व्यक्ति 21,600 बार सांस लेता है। चूंकि 12 घंटे दिनचर्या में निकल जाते हैं,
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गृहस्वामिनी को गृहलक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। जहां गृहस्वामिनी का सम्मान नहीं होता है, गृह लक्ष्मी उस घर को त्याग देती है।
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पौष के महीने में सूर्य की उपासना की जाती है। यह महीना सूर्य देव की पूजा के लिए विशेष महत्‍व रखता है। पौष पूर्णिमा इस मास का बहुत ही पावन दिन माना जाता है।
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घर में शंख बजाने से नकारात्मक ऊर्जा व अतृप्त आत्माएं निकल जाती हैं। जानिए शंख के उपयोग से क्या-क्या फायदे होते हैं
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हिन्दू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए।
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मुंडन संस्कार के बारे में मान्यता है कि इससे शिशु का मस्तिष्क और बुद्धि दोनों ही पुष्ट होते हैं।
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भगवान शुक्र के साथ-साथ संतोषी माता तथा वैभवलक्ष्मी देवी का भी पूजन किया जाता है। तीनों व्रतों की विधियां अलग-अलग हैं।
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इस वर्ष पौष मास 31 दिसंबर 2020 से शुरू होकर 28 जनवरी 2021 तक जारी रहेगा। मान्यता है कि इस महीने में सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा करने से ऊर्जा, सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
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भगवान भैरव को एक रहस्यमी देवता माना जाता है। मुख्‍यत: तीन भैरवों की पूजा का प्रचलन है, एक काल भैरव, दूसरे बटुक भैरव और तीसरे आनंद भैरव। पौराणिक मान्यता के अनुसार शिव के रूधिर से भैरव की उत्पत्ति हुई। बाद में उक्त रूधिर के दो भाग हो गए- पहला बटुक ...
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भगवान दत्तात्रेय का जन्मोत्सव 29 दिसंबर को मनाया जाएगा। वे त्रिदेवों के शक्तिपुंज हैं। भगवान के प्रत्येक अवतार का एक विशिष्ट प्रयोजन होता है।
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महागुरु दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु, महेश के शक्तिपुंज हैं। वस्तुतः भगवान के प्रत्येक अवतार का एक विशिष्ट प्रायोजन होता है। महागुरु दत्तात्रेय के अवतार में हमें असाधारण वैशिष्ट्य का दर्शन होता है।
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भगवान सूर्य देव के 21 नाम अतिशय पवित्र माने गए हैं। इन सूर्य नामों का सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पाठ करने से मनुष्य निरोगी बनता है। भगवान सूर्य के 21 नामों का पाठ करने से मनुष्य को
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रविवार सूर्य देवता की पूजा का वार है। जीवन में सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है। रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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30 नवंबर को साल 2020 का अंतिम 'चंद्र ग्रहण' है, यह एक 'उपच्छाया चंद्र ग्रहण' है, जो कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, प्रशांत महासागर क्षेत्र और एशिया के हिस्सों दिखाई देगा।
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