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Last Modified: सोमवार, 18 मई 2026 (14:21 IST)

पुरुषोत्तम मास 2026: इस पवित्र महीने में इन तीर्थों की यात्रा से मिलेगा कई जन्मों का पुण्यफल

In the image featuring a river and a temple, the caption reads: 'Where to travel during Purushottam Maas?'
हिंदू धर्म में पुरुषोत्तम मास को अधिक मास या मलमास भी कहते हैं। यह माह, दान, स्नान, अध्यात्म, भक्ति और पुण्य कमाने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भगवान विष्णु (श्रीहरि) इस मास के स्वामी हैं, इसलिए इस दौरान की गई धार्मिक यात्राओं और तीर्थ स्थानों के दर्शन का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक मिलता है। पुरुषोत्तम मास में यदि आप तीर्थ यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो निम्नलिखित स्थानों की यात्रा सबसे पवित्र और पुण्यदायी मानी जाती है।

1. ब्रज मंडल और गोवर्धन (उत्तर प्रदेश)- सर्वोत्तम स्थान

पुरुषोत्तम मास में ब्रज क्षेत्र (मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन) की यात्रा को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है। मान्यता है कि इस पूरे महीने में भगवान श्रीकृष्ण (जो साक्षात पुरुषोत्तम हैं) अपने पूरे परिकर और सभी देवी-देवताओं के साथ ब्रज में ही निवास करते हैं।
क्या करें: इस महीने में गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा (21 किलोमीटर) करने का विशेष महत्व है। इसके अलावा 84 कोस की ब्रज यात्रा भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
 

2. पुरुषोत्तम पुरी या जगन्नाथ पुरी (ओडिशा)

चार धामों में से एक जगन्नाथ पुरी को साक्षात 'पुरुषोत्तम क्षेत्र' कहा जाता है। चूंकि इस मास के अधिपति भगवान पुरुषोत्तम (विष्णु) हैं, इसलिए जगन्नाथ जी के दर्शन करना इस समय सर्वोत्तम माना जाता है।
क्या करें: महाप्रभु जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र जी के दर्शन करें और पवित्र महोदधि (पुरी का समुद्र) में स्नान करें।

3. तीर्थराज प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

प्रयागराज को सभी तीर्थों का राजा कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि अधिक मास के दौरान देश के सभी पवित्र तीर्थ अदृश्य रूप से प्रयागराज में आकर निवास करते हैं।
क्या करें: त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती) पर स्नान, दान और घाट पर बैठकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
 

4. मोक्षनगरी काशी (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)

यूं तो काशी भगवान शिव की नगरी है, लेकिन मलमास या पुरुषोत्तम मास में यहां के 'मणिकर्णिका घाट' और 'विष्णु चरणपादुका' के दर्शन का विशेष महत्व है। काशी में इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान करने से जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं।

5. हरिहर क्षेत्र और सोनपुर (बिहार)

बिहार का हरिहर क्षेत्र (गंडक और गंगा का संगम) पुरुषोत्तम मास के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। 'हरि' यानी विष्णु और 'हर' यानी शिव; इन दोनों की संयुक्त ऊर्जा इस स्थान पर मौजूद है। यहां मलमास के दौरान स्नान और दीपदान करने की सदियों पुरानी परंपरा है।
 

यात्रा न कर पाएं, तो घर पर कैसे पाएं तीर्थ का पुण्य?

यदि किसी कारणवश आप लंबी यात्रा पर नहीं जा सकते, तो शास्त्रों में घर पर ही तीर्थ का पुण्य पाने के उपाय बताए गए हैं:
पवित्र नदियों का स्मरण: अपने घर में स्नान के जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं और स्नान करते समय 'गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती...' मंत्र का जप करें। इससे घर पर ही पवित्र नदियों में स्नान का पुण्य मिलता है।
अपने शहर के विष्णु मंदिर जाएं: पुरुषोत्तम मास में अपने निवास स्थान के पास स्थित किसी भी लक्ष्मी-नारायण, श्री कृष्ण या राम मंदिर में जाकर दर्शन करें, दीपदान करें और गीता का पाठ करें।
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वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
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