साल 2026 में पुरुषोत्तम मास (अधिक ज्येष्ठ मास) की शुरुआत 17 मई 2026 से हो चुकी है और यह 15 जून 2026 तक चलेगा। इस पूरे महीने में सांसारिक मांगलिक कार्य (जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश) वर्जित होते हैं, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह समय व्रत, दान, पुण्य और स्नान के साथ ही पूजा पाठ का भी रहता है। पुरुषोत्तम मास के दौरान कुछ विशेष तिथियां ऐसी आती हैं, जिनमें व्रत रखने और विशिष्ट देवताओं की पूजा करने से अक्षय पुण्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इन महत्वपूर्ण तिथियों और पूजनीय देवताओं के बारे में।
-
20 मई: वरद चतुर्थी
-
23 मई: अधिकमास दुर्गाष्टमी
-
25 मई: गंगा दशहरा
-
27 मई: पद्मिनी एकादशी
-
28 मई: गुरु प्रदोष
-
31 मई: अधिकमास पूर्णिमा
-
03 जून: विभुवन संकष्टी चतुर्थी
-
11 जून: परमा एकादशी
-
12 जून: शुक्र प्रदोष
-
14 जून: अधिकमास अमावस्या
-
15 जून: मिथुन संक्रांति
1. पुरुषोत्तम मास की दो महत्वपूर्ण एकादशियां (सर्वश्रेष्ठ व्रत)
इस मास में पड़ने वाली एकादशियां सबसे अधिक फलदायी मानी जाती हैं। सामान्य वर्ष में 24 एकादशियां होती हैं, लेकिन अधिक मास के कारण इस साल कुल 26 एकादशियां होंगी।
पद्मिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष): इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के 'किरिटी रूप' (मुकुटधारी विष्णु) की पूजा की जाती है। यह व्रत कीर्ति, संतान सुख और मोक्ष देने वाला माना गया है।
परमा एकादशी (कृष्ण पक्ष): इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के 'कमलापति' रूप की पूजा की जाती है। यह व्रत घोर दरिद्रता और संकटों का नाश करने वाला माना गया है।
देवता: साक्षात भगवान विष्णु (श्रीहरि) और माता लक्ष्मी।
2. अधिक मास की प्रदोष व्रत और शिवरात्रि (शिव-शक्ति पूजा)
भले ही यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन हरि (विष्णु) और हर (शिव) एक ही हैं।
प्रदोष व्रत (त्रयोदशी तिथि) और मासिक शिवरात्रि (चतुर्दशी तिथि): पुरुषोत्तम मास में आने वाले प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के दिन व्रत रखने से कुंडली के सभी ग्रह दोष (विशेषकर शनि और राहु-केतु के दोष) शांत होते हैं।
देवता: भगवान शिव और माता पार्वती। इस दिन शिवलिंग पर पंचामृत और जल अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है।
3. अधिक मास की अमावस्या और पूर्णिमा (15 जून 2026 - समापन)
महत्व: अधिक मास की पूर्णिमा (जिस दिन इस मास का समापन होगा) और अमावस्या के दिन व्रत, पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष विधान है। इस दिन व्रत रखने से पूरे महीने की पूजा का फल मिल जाता है।
देवता और पूजा: इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी जाती है। साथ ही, पितरों (पूर्वजों) के निमित्त तर्पण और दान किया जाता है ताकि उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहे।
पुरुषोत्तम मास में मुख्य रूप से किन देवताओं की पूजा करें?
भगवान पुरुषोत्तम (श्रीकृष्ण/विष्णु): चूंकि भगवान विष्णु ने स्वयं इस महीने को अपना नाम 'पुरुषोत्तम' दिया है, इसलिए वे इस मास के मुख्य अधिष्ठाता देव हैं। पूरे महीने "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।
श्रीमद्भागवत महापुराण और श्री रामचरितमानस की पूजा: इस मास में साक्षात धार्मिक ग्रंथों को भगवान का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उनका पाठ किया जाता है।
सूर्य देव की पूजा: अधिक मास सूर्य और चंद्रमा के चक्र को संतुलित करने के लिए आता है। इसलिए प्रतिदिन सुबह सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल (अर्घ्य) देना और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना आरोग्य (अच्छे स्वास्थ्य) की प्राप्ति कराता है।
हनुमान जी की पूजा: इस महीने में हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से सभी प्रकार के भय और संकट दूर होते हैं।
व्रत का नियम: यदि आप पूरे महीने का व्रत नहीं रख सकते, तो केवल दोनों एकादशी, प्रदोष और पूर्णिमा के दिन जल या फलाहार ग्रहण करके व्रत रख सकते हैं। इस दौरान सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज का) ही ग्रहण करें।