गुरु-पुष्य योग में खरीदारी करने के 5 बड़े फायदे निम्नलिखित हैं:
1. चिरस्थायी समृद्धि
पुष्य नक्षत्र का स्वभाव 'स्थायित्व' प्रदान करना है। इस योग में खरीदी गई कोई भी वस्तु- विशेषकर सोना, चांदी, भूमि, या मकान आपके पास लंबे समय तक टिकती है और उसमें निरंतर वृद्धि होती है। माना जाता है कि इस दिन घर लाई गई संपत्ति कभी नष्ट नहीं होती। गुरु-पुष्य योग चिरस्थायी समृद्धि यानी लंबे समय तक टिकने वाला लाभ माना गया है।
2. मां लक्ष्मी और गुरु बृहस्पति की संयुक्त कृपा
गुरुवार के देवता बृहस्पति देव, जो भाग्य और वैभव के कारक हैं और पुष्य नक्षत्र के अधिपति शनि देव, जो स्थायित्व के प्रतीक माने जाते हैं। इसके साथ ही, पुष्य नक्षत्र को धन की देवी मां लक्ष्मी का अत्यंत प्रिय नक्षत्र माना गया है। इसलिए, इस दिन खरीदारी करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है और मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
3. बिना मुहूर्त के भी हर खरीदारी शुभ
पुष्य नक्षत्र को 'नक्षत्रों का राजा' कहा जाता है। इस योग को इतना स्वतः-सिद्ध और पवित्र माना गया है कि इस दिन खरीदारी करने के लिए आपको किसी विशेष चौघड़िए या अन्य पंचांग मुहूर्त को देखने की आवश्यकता नहीं होती। इस पूरे दिन किया गया हर कार्य और खरीदारी शुभ फल ही देती है।
4. अक्षय फल की प्राप्ति
'अक्षय' का अर्थ है जिसका कभी क्षय या नाश न हो। इस महायोग में आप जो भी कीमती वस्तु, वाहन, या इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदते हैं, वह आपके लिए भाग्यशाली साबित होती है। उस वस्तु का उपयोग आपके जीवन में सुख और सकारात्मकता लेकर आता है।
5. निवेश में भारी मुनाफा
यदि आप शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड, गोल्ड बॉन्ड या किसी नई बिजनेस प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह समय सर्वोत्तम है। गुरु-पुष्य योग में किए गए निवेश में जोखिम की संभावना न्यूनतम हो जाती है और भविष्य में इसके मल्टीफोल्ड अर्थात् कई गुना बढ़ने के योग बनते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।