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ये 15 वास्तु टिप्स आपकी जिंदगी बदल देंगे, आजमाएं तो सही

शुक्रवार,जून 28, 2019
vastu tips in hindi
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कोई भी पर्यावरण के बारे में कुछ भी पढ़ना और जानना नहीं चाहता है, क्योंकि यह उसके इंटरेस्ट की बात नहीं है, क्योंकि वह यह नहीं जानता है कि मेरे बच्चे मुझसे भी खतरनाक स्थिति में जीएंगे। अपनी को कट गई लेकिन कोई भी अपने बच्चों के बारे में नहीं सोचता है। ...
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हिन्दू धर्म में प्रकृति पूजन को प्रकृति संरक्षण के तौर पर मान्यता है। भारत में पेड़-पौधों, नदी-पर्वत, ग्रह-नक्षत्र, अग्नि-वायु सहित प्रकृति के विभिन्न रूपों के साथ मानवीय रिश्ते जोड़े गए हैं। पेड़ की तुलना संतान से की गई है तो नदी को मां स्वरूप माना ...
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घर के पूर्व में विशाल वृक्षों का न होना या कम होना शुभ है। फिर भी यदि हो तो उन्हें काटने के बजाय घरके उत्तर की ओर उनके दुष्प्रभावों को संतुलित करने हेतु आँवला, अमलतास, हरश्रृंगार, तुलसी के पौधों को लगाया जा सकता है।
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लाल किताब में वृक्षों का क्या महत्व है और जातक की कुंडली के अनुसार कौन-कौन-सा वृक्ष लाभकारी है या नहीं, इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
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5 जून को पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को मनाने की शुरूआत की थी जो प्रकृति को समर्पित दुनियाभर में सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण और जीवन का अटूट संबंध है, इसी से मनुष्य को जीने कीमूलभूत सुविधा उपलब्ध होती है
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पर्यावरण की सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम बनाया गया। इस अधिनियम के तहत कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को समयानुसार शामिल किया जाता रहा है।
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घर में पेड़ लगाने से हरियाली आती है और घर में रहने वाले लोग हमेशा स्वस्थ रहते हैं। लेकिन कई बार आपके द्वारा लगाए गए पेड़-पौधे अच्‍छे परिणाम नहीं देते, क्योंकि उनमें वास्तुदोष होता है। आइए जानें, वास्तु और पौधों का संबंध....
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हम में से हर कोई अपने दिमाग से कोई न कोई उपाय सोच कर धरती के क्षति ग्रस्त पर्यावरण को दुरुस्त करने में सहभागी बन पुण्य कमा सकता है। इसके लिए हम निम्न उपाय अपना सकते हैं.:-
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ऐसी मान्यता है कि प्रत्येक व्यक्ति की राशि का एक प्रतिनिधि वृक्ष होता है। इसके सान्निध्य और रोपण से शुभफल मिलता है।
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गार्डन बनाने के लिए जरूरी है कि सबसे पहले आप उसकी जगह तय कर लें। यदि आप फ्रंट में गार्डन बनाना चाहते हैं तो जगह को नाप लीजिए। कितने हिस्से में गार्डन रहेगा? कितना पाथ के लिए छोड़ना है? आदि।
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पर्यावरण के सभी अंगों को जैसे जल, वायु, भूमि को देवताओं से जोड़ा गया हैं, देवता ही माना गया है। हिन्दू दर्शन में मूल ईकाई जीव में मनुष्य में पंच तत्वों का समावेश माना गया है।
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पातालकोट के गांवों में एक ऐसा दिव्य पौधा पाया जाता है, जिसमें वास्तुदोष के निराकरण की सभी खूबियां मौजूद हैं।
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क्या आप भी धनवान लोगों को देखकर ये सोचते हैं कि काश आपके पास भी होता इतना पैसा, गाड़ी, बंगला और बैंक बैलेंस? अगर आपका जवाब हां है, तो जरूर जान लीजिए इन पौधों के बारे में, जिन्हें घर में लगाने से होती है धन की बरसात... और बनते हैं अमीर...
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जैन धर्म शास्त्रों में पर्यावरण को लेकर बहुत कुछ लिखा हुआ है। दुनिया के सभी धर्मों की अपेक्षा सबसे ज्यादा जैन धर्म ने प्रकृति के महत्व को समझा है और सभी को उचित सम्मान दिया है।
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ऐसे प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचें जिसे एक बार इस्तेमाल के बाद ही फेंकना होता है जैसे प्लास्टिक के पतले ग्लास, तरल पदार्थ पीने की स्ट्रॉ और इसी तरह का अन्य सामान।
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हम में से हर कोई अपने दिमाग से कोई न कोई उपाय सोच कर धरती के क्षति ग्रस्त पर्यावरण को दुरुस्त करने में सहभागी बन पुण्य कमा सकता है। इसके लिए हम निम्न उपाय अपना सकते हैं.:-
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आईआईटी, रुड़की के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसका उपयोग आम लोग भी प्लास्टिक कचरे से ईंट तथा टाइल जैसे उपयोगी उत्पाद बनाने में कर सकते हैं।
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पृथ्वी की संरचना, सूर्य से उसकी दूरी और अन्य भौतिक दशाओं के कारण यहां जीवन का अस्तित्व है। हवा, पानी, मिट्टी और विविध वनस्पतियां प्रकृति के ऐसे उपहार हैं, जिनकी वजह से धरती पर जीवन संभव हुआ है। पृथ्वी पर जीवन के विभिन्न रूप इसे एक अनूठा ग्रह बनाते ...
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फूलों ने ही तो जीवन सृजन किया है इसीलिए जब भी हमारे लगाए पौधे में फूल खिलते हैं तो हम भी खिल उठते हैं। शायद ही कोई होगा जिसे मैदानों, पर्वतों पर आच्छादित ताजी हरी घास-फूस की खुशबू भली न लगती हो। लेकिन जिस तरह से धरती से उसका हरित श्रंगार मिट रहा है ...
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