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12 अगस्त 2019 : श्रावण मास का अंतिम सोमवार, जानिए शुभ संयोग और राशि अनुसार पूजन

रविवार,अगस्त 11, 2019
Shravan somvar
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श्रावण मास में आने वाले सभी मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत भी किया जाता है। इसे मंगळागौरी, मंगळागौर भी कहा जाता है।
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श्रावण मास के मंगला गौरी व्रत के पूजन से पहले स्नान करें। एक पाटे पर लाल और सफेद वस्त्र बिछाकर सफेद कपड़े पर चावल की नौ
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श्रावण महीने की तिथियां पश्चिम एवं दक्षिण भारत (महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा और गुजरात के लिए)।
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श्रावण मास में तो भोलेनाथ के अभिषेक से अभिष्ट फल की प्राप्ति होती है। विभिन्न प्रकार के शिवलिंग का अभिषेक करने से अलग-अलग 30 मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
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हिन्दू कैलेंडर अनुसार आषाढ़ माह के बाद श्रावण माह लगता है। श्रावण और भाद्रपद 'वर्षा ऋतु' के मास हैं। वर्षा नया जीवन लेकर आती है। मोर के पांव में नृत्य बंध जाता है। यह माह जुलाई-सितंबर में पड़ता है।
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सावन शिवरात्रि श्रावण मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। सावन शिवरात्रि को उत्तर भारत में कांवड़िए गंगाजी से जल लाकर शिवजी का जलाभिषेक करते हैं। शिवरात्रि के बाद सावन में चलने वाली कांवड़ यात्रा समाप्त हो जाती है।
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श्रावण का महीना चल रहा है और इस माह में भगवान भोलेनाथ पूजा की जाती है। श्रावण का दूसरा सोमवार 29 जुलाई 2019 को है। इस दिन सोम प्रदोष भी रहेगा।
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सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक व्रतकथा के अनुसार एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का स्वर्गवास हो गया था। उसका अब कोई आश्रयदाता नहीं था
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श्रावण मास में कुछ खास चीजें बिलकुल नहीं खाई जाती हैं। इस बरसते-गरजते मौसम में कुछ फल सब्जियों को नहीं खाना चाहिए। क्योंकि इन सब्जियों में इस समय विषैलापन बढ़ जाता है जो सेहत के लिए ठीक नहीं होता।
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श्रावण, कार्तिक, माघ व वैशाख मास विशेष भक्ति करने व सिद्धि प्राप्त करने के माह होते हैं। इन महीनों में की गई भक्ति अनन्य फल देती है।
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श्रावण माह के विशेष दिनों में भगवान शिव का विविध रूपों में श्रृंगार होगा। इन दिनों श्रद्धालु व्रत-उपवास रख शिव आराधना में लीन रहेंगे। साथ ही कावड़ यात्रा का दौर भी शुरू हो जाएगा।
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शिव मानस पूजा इस स्तुति को पढ़ते हुए भक्तों द्वारा शिवशंकर को श्रद्धापूर्वक मानसिक रूप से समस्त पंचामृत दिव्य सामग्री समर्पित की जाती है।
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प्रतिदिन भगवान शंकर का पूजन करके दारिद्रयदहन शिवस्तोत्रम्‌ का पाठ करना चाहिए। इससे शिव की कृपा प्राप्ति होकर दारिद्रय का नाश होता है तथा अथाह धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।
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'शिव ताण्डव स्तोत्र' महान विद्वान एवं परम शिवभक्त लंकाधिपति रावण द्वारा विरचित भगवान शिव का बहुत चमत्कारी स्तोत्र है। रावण ने शिव की स्तुति कर उन्हें प्रसन्न करने के लिए इन श्लोकों का पाठ किया था। रावण की इस तपस्या से शिव प्रसन्न हुए थे। आप भी ...
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इस वर्ष सावन मास में चार सोमवार हैं, जो बहुत ही अद्भुत संयोग है। सावन में दो सोमवार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में पंचमी तिथि को हैं। इनमें से दो सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का भी संयोग बन रहा।
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विश्व में शिव की सबसे ऊंची मूर्ति नेपाल के चित्तपोल सांगा जिला भक्तापुर में स्थित है। खड़ी मुद्रा में इस मूर्ति का निर्माण कार्य 2004 में शुरू हुआ था
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सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें 'आदिदेव' भी कहा जाता है। 'आदि' का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम 'आदिश' भी है।भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा ...
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कभी आपने सोचा कि इन सब शिव प्रतीकों के पीछे का रहस्य क्या है? शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। आओ जानते हैं शिव प्रतीकों के रहस्य...
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रुद्राक्ष एकमुखी से चौदहमुखी तक पाए जाते हैं। रुद्राक्ष माला से जप करने तथा धारण करने से करोड़ों पुण्यों की प्राप्ति होती है।
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