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  4. When will the festival of Rangpanchami be celebrated, what is its significance and story
Written By WD Feature Desk
Last Updated : शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026 (09:46 IST)

Rang Panchami 2026: रंगपंचमी का त्योहार कब मनाया जाएगा, क्या है इसका महत्व और कथा

रंगपंचमी का कलरफुल फोटो
How to celebrate Rang Panchami: रंगपंचमी का त्योहार न केवल हिंदू धर्म की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, बल्कि यह भारतीय समाज की विविधता और एकता का प्रतीक भी है। रंगपंचमी का त्योहार होली के ठीक पांच दिन बाद मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश (विशेषकर इंदौर) और राजस्थान के कुछ हिस्सों में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। रंगपंचमी का महत्व मुख्यतः रंगों के द्वारा प्रेम, भाईचारे, और सजीवता के संदेश को फैलाने से जुड़ा हुआ है। इस दिन लोग एक-दूसरे पर रंग डालकर खुशियां मनाते हैं और सामाजिक एकता को बढ़ावा देते हैं।ALSO READ: Dhulendi in 2026: रंगों वाली होली का पर्व 3 को मनाएं या कि 4 मार्च को जानिए सही तारीख
 
  • रंगपंचमी 2026 की तिथि
  • पौराणिक कथाएं
  • इंदौर की प्रसिद्ध 'गेर'
  • रंगपंचमी-FAQs
  •  

आइए जानते हैं 2026 में इसकी तिथि और इसके पीछे की खास वजहें:

 

रंगपंचमी 2026 की तिथि

साल 2026 में रंगपंचमी 8 मार्च, रविवार को मनाई जाएगी।
 

रंगपंचमी का महत्व

होली पर हम रंगों से खेलते हैं, लेकिन रंगपंचमी का महत्व थोड़ा अधिक आध्यात्मिक और सात्विक है। यह दिन दैवीय प्रेम और उल्लास का प्रतीक माना जाता है, जिसमें लोग होली के रंगों का आनंद लेते हैं। माना जाता है कि इस दिन हवा में उड़ाए गए रंग या अबीर-गुलाल देवताओं को आकर्षित करते हैं।ALSO READ: होलाष्टक के 8 दिन क्यों माने जाते हैं अशुभ? जानें 12 राशियों पर क्या पड़ेगा असर

इसे 'देवताओं की होली' भी कहा जाता है। इस दिन देवी-देवताओं को रंग-गुलाल अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन रंगों के प्रभाव से रज और तम गुण (नकारात्मक ऊर्जा) समाप्त होते हैं और सतोगुण (सकारात्मक ऊर्जा) का संचार होता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत के उल्लास को पांचवें दिन तक जारी रखने का प्रतीक है।
 

पौराणिक कथाएं

रंगपंचमी से जुड़ी कोई एक निश्चित कथा नहीं है, लेकिन दो प्रमुख मान्यताएं सबसे ज्यादा प्रचलित हैं:
 
कामदेव का पुनर्जन्म: पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया था, तब रति (कामदेव की पत्नी) की प्रार्थना पर शिवजी ने कामदेव को दोबारा जीवित करने का वरदान दिया। जिस दिन कामदेव का पुनर्जन्म हुआ (अशरीरी रूप में), वह पंचमी का दिन था। इसी खुशी में देवताओं ने रंग उत्सव मनाया।
 
श्रीकृष्ण और राधा: द्वापर युग में, श्रीकृष्ण ने राधा रानी और गोपियों के साथ होली खेलने के बाद पंचमी के दिन विशेष उत्सव मनाया था। तभी से ब्रज और अन्य क्षेत्रों में पंचमी पर रंग खेलने की परंपरा शुरू हुई।
 
इसके अलावा एक और कथा भी प्रसिद्ध है, जिसमें होलिका दहन और हिरण्यकश्यप की बुराई से जुड़ा हुआ है। इस दिन को बुराई के ऊपर अच्छाई की विजय के रूप में भी मनाया जाता है, खासकर होली के अगले दिन रंगों के खेल के साथ।

 

इंदौर की प्रसिद्ध 'गेर'

अगर रंगपंचमी की बात हो तो इंदौर (मध्य प्रदेश) का जिक्र जरूरी है। यहां इस दिन विशाल 'गेर' (फाग यात्रा) निकाली जाती है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं और पूरी सड़क रंगों से सराबोर हो जाती है। इसे यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल कराने के प्रयास भी जारी हैं।

रंगपंचमी-FAQs

 
1. रंगपंचमी कब मनाई जाती है?
रंगपंचमी होली के अगले पांचवे दिन मनाई जाती है, यानी फाल्गुन महीने की पंचमी तिथि को।
 
2. क्या रंगपंचमी पर विशेष पूजा होती है?
रंगपंचमी पर पूजा का विशेष महत्व नहीं होता, बल्कि यह खुशी और उल्लास का दिन है। हालांकि, कुछ स्थानों पर लोग भगवान कृष्ण या अन्य देवताओं की पूजा कर सकते हैं, ताकि वे जीवन में रंगों के समान खुशियां लाने की प्रार्थना करें।
 
3. रंगपंचमी का महत्व क्या है?
रंगपंचमी का महत्व होली के रंगों को लेकर होता है, जो जीवन में सुख, समृद्धि और एकता का प्रतीक होते हैं। इसे विशेष रूप से बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रूप में मनाया जाता है, जैसे होली में भगवान श्री कृष्ण और राधा के साथ रंग खेलते थे।
 
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