1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. आरती/चालीसा
  4. Baba Khatu Shyam Aarti

बाबा खाटू श्याम आरती हिंदी– अर्थ, लाभ और पाठ विधि | Baba Khatu Shyam Aarti

khatu shyam aarti
khatu shyam baba ki aarti
Aarti shyam baba ki: महाभारत के बर्बरीक के इस कलयुगी अवतारी देवता की आरती का गायन करना हृदय को असीम शांति से भर देता है। बाबा श्याम की आरती न केवल उनके दिव्य स्वरूप का गुणगान करती है, बल्कि भक्तों के जीवन से अंधकार को मिटाकर खुशियों का संचार करती है। जब मंदिर के पट खुलते हैं और "ॐ जय श्री श्याम हरे" की गूँज उठती है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। चाहे मंगल आरती हो या शयन आरती, बाबा के चरणों में शीश झुकाने मात्र से भक्तों के बिगड़े काम बन जाते हैं। पढ़िये बाबी की आरती।
 
 
 

1. खाटू श्याम आरती का अर्थ

खाटू श्याम जी की प्रसिद्ध आरती "ॐ जय श्री श्याम हरे" न केवल एक प्रार्थना है, बल्कि यह उनके जीवन, उनके त्याग और उनकी शक्तियों का वर्णन है। अर्थ यह है कि जब इंसान दुनिया से हार जाता है, तब बाबा श्याम उसे संभालते हैं। उनकी आरती करने का अर्थ है अपने अहंकार को त्यागकर उनके चरणों में खुद को सौंप देना।
 

2. खाटू श्याम आरती पाठ विधि

पूजन सामग्री: एक थाली में दीपक (शुद्ध घी या तिल के तेल का), कपूर (आरती के अंत में कपूर जलाना बहुत शुभ होता है), ताजे फूल (विशेषकर गुलाब)। इत्र (बाबा को इत्र बहुत प्रिय है)। भोग के लिए मावे का पेड़ा, खीर या चूरमा।
नियत समय: बाबा की आरती का सबसे उत्तम समय प्रातःकाल (मंगला) और संध्याकाल (शयन) होता है। घर में आप अपनी सुविधानुसार सुबह-शाम दीपक जलाते समय इसे कर सकते हैं।
स्वच्छता: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो, तो केसरिया या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है क्योंकि यह बाबा का प्रिय रंग है।

खाटू श्याम आरती की सही विधि:

आह्वान: सबसे पहले बाबा श्याम की मूर्ति या तस्वीर के सामने ज्योति प्रज्वलित करें और मन ही मन उनका ध्यान करें।
थाली घुमाने का तरीका: आरती की थाली को बाबा के चरणों से शुरू करके घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में घुमाएं।
चरणों की तरफ 4 बार।
नाभि की तरफ 2 बार।
मुखारविंद (चेहरे) की तरफ 1 बार।
अंत में पूरे शरीर की तरफ 7 बार घुमाएं।
भाव: आरती गाते समय लय और ताल का ध्यान रखें। तालियां बजाएं या छोटी घंटी का प्रयोग करें। मन में यह भाव रखें कि बाबा साक्षात आपके सामने विराजमान हैं।
पुष्पांजलि: आरती समाप्त होने के बाद बाबा पर फूल अर्पित करें और अपनी मनोकामना कहें।
हारे का सहारा: आरती के दौरान "हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा" का जयकारा जरूर लगाएं।
एकाग्रता: आरती के बीच में इधर-उधर की बातें न करें।
प्रसाद वितरण: आरती के बाद प्रसाद सबसे पहले बाबा को अर्पण करें, फिर घर के सभी सदस्यों में बांटें और अंत में स्वयं ग्रहण करें।
एक छोटा सुझाव: आरती के अंत में "क्षमा प्रार्थना" जरूर करें कि यदि पूजा या आरती में कोई भूल-चूक हो गई हो, तो बाबा उसे क्षमा करें।
 

3. खाटू श्याम आरती Lyrics:

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे।
ॐ जय श्री श्याम हरे..
 
रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो, कुंडल श्रवण पड़े।
ॐ जय श्री श्याम हरे..
 
गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर दीपक ज्योति जले।
ॐ जय श्री श्याम हरे..
 
मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे।
ॐ जय श्री श्याम हरे..
 
झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे।
भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे।
ॐ जय श्री श्याम हरे..
 
जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे।
ॐ जय श्री श्याम हरे..
 
श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत भक्तजन, मनवांछित फल पावे।
ॐ जय श्री श्याम हरे..
 
जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे।
निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे।
ॐ जय श्री श्याम हरे.. ।
 

4. खाटू श्याम आरती के लाभ

"जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख दूर टरे" जो भी भक्त सच्चे मन से बाबा का ध्यान करता है और यह आरती गाता है, उसके जीवन के सभी कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं और उसे मनोवांछित फल प्राप्त होता है। खाटू श्याम बाबा की आरती हमें 'समर्पण' सिखाती है। इसमें उन्हें 'हारे का सहारा' माना गया है। इसका अर्थ है कि जो भी व्यक्ति अपनी जिंदगी में सब जगह से हार चुका है उसे बाबा की शरण में जाना चाहिए। 
 

5. खाटू श्याम जी के बारे में पूछे जाने वाले प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1: खाटू श्याम जी वास्तव में कौन हैं?
उत्तर: खाटू श्याम जी महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक हैं। वे पांडव पुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। उन्हें कलयुग में भगवान श्री कृष्ण के 'श्याम' नाम से पूजे जाने का वरदान प्राप्त है।
 
प्रश्न 2: उन्हें "शीश के दानी" क्यों कहा जाता है? 
उत्तर: महाभारत युद्ध के दौरान, श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया था ताकि युद्ध का संतुलन न बिगड़े। बर्बरीक ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना सिर काटकर कृष्ण को अर्पित कर दिया, इसीलिए उन्हें 'शीश का दानी' कहा जाता है।
 
प्रश्न 3: खाटू श्याम जी को "हारे का सहारा" क्यों कहते हैं? 
उत्तर: बर्बरीक को उनकी माता ने शिक्षा दी थी कि जो पक्ष युद्ध में हार रहा हो, उसकी सहायता करना। जब वे युद्ध देखने जा रहे थे, तब उन्होंने प्रण लिया था कि वे हारने वाले का साथ देंगे। आज भी भक्तों का विश्वास है कि जब वे जीवन की मुश्किलों से हार जाते हैं, तो बाबा श्याम उन्हें संभालते हैं।
 
प्रश्न 4: खाटू श्याम जी का मंदिर कहाँ स्थित है? 
उत्तर: इनका मुख्य मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित है। यह जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर है।
 
प्रश्न 5: खाटू श्याम जी के पास कौन से 'तीन बाण' थे? 
उत्तर: बर्बरीक को देवी कामाख्या से तीन दिव्य बाण प्राप्त थे। माना जाता है कि उनके मात्र एक बाण से पूरी शत्रु सेना का विनाश हो सकता था और तीनों बाणों से ब्रह्मांड का अंत संभव था। इसीलिए उन्हें 'तीन बाण धारी' भी कहा जाता है।
 
प्रश्न 6: खाटू श्याम जी का मुख्य मेला कब लगता है? 
उत्तर: हर साल फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी को खाटू धाम में भारी लक्खी मेला लगता है। इसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु 'निशान' लेकर पहुंचते हैं।
 
प्रश्न 7: 'निशान' क्या होता है और इसे क्यों चढ़ाया जाता है? 
उत्तर: निशान एक प्रकार का केसरिया या नीला ध्वज (झंडा) होता है, जिस पर श्याम बाबा और श्री कृष्ण के चित्र बने होते हैं। इसे विजय और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। भक्त पैदल यात्रा कर इसे बाबा के चरणों में अर्पित करते हैं।
 
प्रश्न 8: बाबा श्याम को किन चीजों का भोग लगाया जाता है? 
उत्तर: बाबा को मुख्य रूप से चूरमा, खीर और मावे के पेड़े का भोग लगाया जाता है।
लेखक के बारे में
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें
अगला लेख
षटतिला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा 2026 में