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श्री गायत्री चालीसा : हर तरह की सिद्धि देता है, करता है हर मनोकामना पूरी

बुधवार,जून 12, 2019
Maa Gayatri
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मां गंगा की पवित्र आरती- ॐ जय गंगे माता, श्री गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता। ॐ जय गंगे माता...
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मां गंगा की पवित्र आरती- जय गंगा मैया मां जय सुरसरी मैया। भवबारिधि उद्धारिणी अतिहि सुदृढ़ नैया।।
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इस स्तोत्र को श्रद्धापूर्वक करने से सभी अरिष्टों का नाश होता है। अधिक लाभ के लिए इस स्तोत्र से नित्य हवन करें तथा ...
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अयि गिरि नन्दिनी नन्दिती मेदिनि इस दिव्य स्तुति को पढ़ने से सौभाग्य चमकता है, सफलता के दरवाजे अपने आप खुलने लगते हैं...
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शनि भगवान की आरती- ॐ जय जय शनि महाराज, स्वामी जय जय शनि महाराज। कृपा करो हम दीन रंक पर, दुःख हरियो प्रभु आज ॥ॐ॥
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अगर आप शनि साढ़ेसाती, शनि ढैया या शनि की महादशा से पीड़ित हैं उन्हें दशरथकृत शनि स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए।
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शनि स्तोत्र- नमस्ते कोणसंस्थाय पिंगलाय नमोस्तुते। नमस्ते वभ्रूरूपाय कृष्णाय च नमोस्तु ते॥ नमस्ते रौद्रदेहाय नमस्ते ...
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मास वैशाख कृतिका युत, हरण मही को भार। शुक्ल चतुर्दशी सोम दिन, लियो नरसिंह अवतार।। धन्य तुम्हारो सिंह तनु, धन्य तुम्हारो ...
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आरती कीजै नरसिंह कुंवर की। वेद विमल यश गाऊं मेरे प्रभुजी।। पहली आरती प्रह्लाद उबारे, हिरणाकुश नख उदर विदारे।
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धार्मिक शास्त्रों में मान्यता है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन प्रभु श्रीराम एवं माता सीता का विधि-विधान से पूजन करता है, उसे ...
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श्री जानकी स्तुति- जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्। जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्।।1।।
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माता सीता की आरती : आरति श्रीजनक-दुलारी की। सीताजी रघुबर-प्यारी की।। जगत-जननि जगकी विस्तारिणि, नित्य सत्य साकेत ...
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गंगा मैया की आरती- जय गंगा मैया मां जय सुरसरी मैया। भवबारिधि उद्धारिणी अतिहि सुदृढ़ नैया।। हरी पद पदम प्रसूता विमल ...
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श्री गंगाजी की पवित्र आरती- चन्द्र-सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता।ॐ जय गंगे माता...
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शिव पुराण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ ने भी शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए 'शनि चालीसा' का पाठ किया था। अत: आप भी ...
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बातों को कर लो बंद, कथा ग्यारस की सुन लो जी ।।2।। बिना पुत्र का बाप, खेतों में रोवेजी। मेरे हका हुआ है खेत, पुत्र बिना ...
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सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बाल-बरन तनु । भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु ।। गहन-दहन-निरदहन लंक निःसंक, बंक-भुव ...
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श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं ...
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आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।
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