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महालक्ष्मी माता की आरती- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता

शनिवार,अक्टूबर 12, 2019
laxmi ji
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महालक्ष्मी को प्रसन्न करना है तो पढ़ें लक्ष्मी चालीसा- मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥
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जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता, तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
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कालरात्रि जय जय महाकाली काल के मुंह से बचाने वाली दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा महा चंडी तेरा अवतारा पृथ्वी और आकाश पर सारा महाकाली है तेरा पसारा खंडा खप्पर रखने वाली दुष्टों का लहू चखने वाली
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जय जय अंबे जय कात्यायनी । जय जगमाता जग की महारानी ।। बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहां वरदाती नाम पुकारा ।।
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जय तेरी हो स्कंद माता पांचवां नाम तुम्हारा आता सब के मन की जानन हारी जग जननी सब की महतारी तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं कई नामों से तुझे पुकारा मुझे एक है तेरा सहारा...
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चौथा जब नवरात्र हो, कूष्मांडा को ध्याते। जिसने रचा ब्रह्मांड यह, पूजन है उनका... आद्य शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप। इस शक्ति के तेज से कहीं छांव कहीं धूप॥
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जय मां चंद्रघंटा सुख धाम पूर्ण कीजो मेरे काम चंद्र समान तू शीतल दाती चंद्र तेज किरणों में समाती क्रोध को शांत बनाने वाली मीठे बोल सिखाने वाली मन की मालक मन भाती हो
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जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा।
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नवरात्रि के पहले दिन की जाती है मां शैलपुत्री की पूजा। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं मां शैलपुत्री की आरती..
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मां दुर्गा जी की आरती- जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति। तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री
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सभी पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं पवित्र श्री दुर्गा चालीसा। इसके नित्य पाठ से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और हर तरह के संकट दूर करती है।, 9 बार पाठ करें, हर इच्छा होगी पूरी...
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ॐ जय पंचानन स्वामी प्रभु पंचानन स्वामी। अजर अमर अविनाशी, नमो अन्तर्यामी। चतुरानन संग सात ऋषि, शरण आपकी आये। अभय दान दे ऋषियन को, सार कष्ट मिटाए। 1। निगम गम पथ दाता हमें शरण पड़े तेरी। विषय विकार मिटाओ सारे, मत लाओ देरी। 2।
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श्री विश्वकर्मा विश्व के भगवान सर्वाधारणम्। शरणागतम् शरणागतम् शरणागतम् सुखाकारणम्।। कर शंख चक्र गदा मद्दम त्रिशुल दुष्ट संहारणम्। धनुबाण धारे निरखि छवि सुर नाग मुनि जन वारणम्।। डमरु कमण्डलु पुस्तकम् गज सुन्दरम् प्रभु धारणम्। संसार हित कौशल ...
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श्री भगवान विश्वकर्मा चालीसा- भगवान विश्वकर्मा का चालीसा। श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊं, चरणकमल धरिध्यान। श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण, दीजै दया निधान।। जय श्री विश्वकर्म भगवाना। जय विश्वेश्वर कृपा निधाना।। शिल्पाचार्य परम उपकारी। भुवना-पुत्र नाम ...
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भगवान विश्वकर्मा जी की आरती। ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥ आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया। शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया।।
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आरती राधाजी की कीजै। टेक... कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा। आरती वृषभानु लली की कीजै। आरती... कृष्णचन्द्र की करी सहाई, मुंह में आनि रूप दिखाई। उस शक्ति की आरती कीजै। आरती... नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई, यमुना तट पर रास
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राधाजी का कवच श्रीब्रह्मवैवर्त पुराण से लिया गया है। कृष्णप्रिया राधाजी को वृंदावन की अधीश्वरी माना जाता है। अत: कृष्ण आराधना के साथ-साथ राधाजी की पूजा-पाठ, आरती-कवच सभी का बहुत महत्व है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत है 'श्री राधा कवचम्'। राधा अष्टमी ...
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कृष्णप्रिया राधा की पवित्र आरती- आरती राधाजी की कीजै। टेक... कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा।
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ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि त्वमेव केवलं कर्ताऽसि त्वमेव केवलं धर्ताऽसि त्वमेव केवलं हर्ताऽसि
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