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शिव चालीसा और आरती पढ़ने का क्या है सही तरीका? जानें पूजा का पूरा नियम

shivling shiv chalisa and aarti niyam
श्रावण मास, सोमवार, शिव चतुर्दशी, प्रदोष व्रत, शिवरा‍त्रि और महाशिवरात्रि पर अधिकतर भक्त शिव चालीसा का पाठ करते हैं और पूजा के बाद आरती करते हैं। भगवान शिव की पूजा में शिव चालीसा का पाठ और आरती करने की एक सरल, प्रामाणिक और शास्त्रसम्मत विधि है। इसे सही नियमों और भाव के साथ करने से पूर्ण फल और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
 

1. पूर्व तैयारी और नियम

समय: सुबह (ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय) या संध्या पूजा का समय सबसे उत्तम माना जाता है।
शारीरिक स्वच्छता: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (सफेद, पीले या हल्के रंग के वस्त्र उत्तम) धारण करें।
दिशा: पाठ करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
आसन: बैठकर पाठ करने के लिए ऊनी या कुशा का आसन प्रयोग करें। सीधे जमीन पर बैठकर पाठ न करें।
सामग्री: तांबे के लोटे में शुद्ध जल (चाहे तो थोड़ा गंगाजल मिलाकर), देसी घी का दीपक, धूप/अगरबत्ती, सफेद फूल, अक्षत (चावल), और संभव हो तो बेलपत्र।

2. शिव चालीसा पढ़ने की सही विधि

1.दीप प्रज्वलन व संकल्प:

पूजा की शुरुआत.
घर के मंदिर में शिव जी की प्रतिमा, चित्र या शिवलिंग के समक्ष बैठें। सबसे पहले देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। मन ही मन भगवान शिव का ध्यान कर पूजा का संकल्प लें।
 
गणेश जी व गुरु वंदना
शिव चालीसा शुरू करने से पहले श्री गणेश जी का ध्यान करें (ॐ गं गणपतये नमः)। यदि आपके कोई गुरु हैं तो उनका स्मरण करें, अन्यथा भगवान शिव को ही गुरु मानकर नमन करें।
 

जल अर्पण या स्थापन

पवित्र जल की उपस्थिति
यदि पास में शिवलिंग है तो ॐ नमः शिवाय बोलते हुए जल/दूध अर्पित करें। यदि चित्र है तो लोटे में जल भरकर अपने पास रख लें।
 

शिव चालीसा का स्पष्ट पाठ

शुद्ध उच्चारण और मध्यम स्वर
स्वर: न बहुत तेज चिल्लाकर और न ही केवल मन में दबाकर; मध्यम स्पष्ट आवाज में पाठ करें।
ध्यान: शब्दों के अर्थ और शिव जी के रूप का मन में ध्यान करते हुए धीमी गति से पाठ करें। जल्दबाजी में पाठ न करें।
 

माता पार्वती व शक्ति स्मरण

पाठ के अंत में: चालीसा पूर्ण होने के बाद माता पार्वती और गणेश-कार्तिकेय जी का स्मरण कर हाथ जोड़कर नमन करें।
 

3. शिव आरती करने की सही विधि

शिव चालीसा समाप्त होने के बाद ही आरती की जाती है।
आरती की तैयारी: कपूर या घी के दीपक से आरती की थाली सजाएं। थाली में एक आचमनी (छोटा चम्मच) जल भी रखें।
खड़े होकर आरती: आरती हमेशा खड़े होकर, थोड़ा झुककर और दोनों हाथों से थाली पकड़कर की जाती है।
घुमाने का तरीका: आरती की थाली को भगवान शिव के सामने 'ॐ' की आकृति में या घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में घुमाएं:
  • 4 बार चरणों की ओर
  • 2 बार नाभि की ओर
  • 1 बार मुख मंडल की ओर
  • 7 बार पूरे शरीर के समक्ष (सर्वांग)
 
आरती के बाद आचमन: आरती पूरी होने पर थाली के चारों ओर आचमनी से थोड़ा जल घुमाकर (आरती शांत करके) छोड़ दें।
आरती ग्रहण व क्षमा याचना: स्वयं और परिवारजन आरती पर हाथ सेककर सिर/आंखों से लगाएं। अंत में जाने-अनजाने हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें:  
 
"आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥"
 

मुख्य सावधानियां

अशुद्धता में पाठ न करें: सूतक या शारीरिक अशुद्धता के समय चालीसा का पाठ वर्जित माना जाता है।
तांबे के पात्र का ध्यान: शिव जी को तांबे के लोटे से जल अर्पित करना शुभ होता है, लेकिन तांबे के बर्तन में दूध डालकर अर्पित न करें (दूध के लिए पीतल या चांदी का लोटा लें)।
शांति और एकाग्रता: पाठ के दौरान बार-बार उठना, दूसरों से बात करना या फोन देखना पाठ के फल को कम कर देता है। 
 
 
 
 
 
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