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Written By WD Feature Desk
Last Updated : शनिवार, 14 फ़रवरी 2026 (16:08 IST)

महाशिवरात्रि का अर्थ, पूजा विधि, मंत्र, आरती, चालीसा, कथा और लाभ FAQs

The image shows the worship of a Shivling, and the caption provides complete information about Maha Shivratri.
प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि हिंदू वर्ष के फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है और शिवरात्रि श्रावण मास की कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है। महाशिवरात्रि पर वैद्यनाथ भगवान की उत्सव भी रहता है। जानिए महाशिवरात्रि का अर्थ, पूजा विधि, आरती, मंत्र, चालीसा, कथा और लाभ सहित संपूर्ण जानकारी।
 
 

1. महाशिवरात्रि का अर्थ

महाशिवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है "शिव की महान रात"। "रात्रि" शब्द अंधकार का प्रतीक है। महाशिवरात्रि का अर्थ है वह रात जो हमें अज्ञानता, अहंकार और अंधकार से मुक्त कर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है।
 

2. महाशिवरात्रि पर शिव पूजा विधि

पूजन सामग्री:
शिवलिंग या भगवान शिव की मूर्ति, कुशासन, सुगंधित पुष्प, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, पंचफल, पंचमेवा, पंचरस, इत्र, गंध, रोली, मौली, जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, शिव-पार्वती की श्रृंगार सामग्री, वस्त्राभूषण आदि।
 
पूजा विधि:
  • महाशिवरात्रि की चार प्रहर पूजा होती है। प्रत्येक प्रहर में इसी विधि से करें पूजा।
  • प्रात:काल स्नान-ध्यान से निवृत हो शिवजी का स्मरण करते हुए व्रत एवं पूजा का संपल्प लें।
  • घर पर पूजा कर रहे हैं तो एक पाट पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर घट एवं कलश की स्थापना करें।
  • इसके बाद एक बड़ी सी थाली में शिवलिंग या शिवमूर्ति को स्थापित करके उस थाल को पाट पर स्थापित करें।
  • अब धूप दीप को प्रज्वलित करें। इसके बाद कलश की पूजा करें।
  • कलश पूजा के बाद शिवमूर्ति या शिवलिंग को जल से स्नान कराएं। 
  • फिर पंचामृत से स्नान कराएं। पंचामृत के बाद पुन: जलाभिषेक करें।
  • फिर शिवजी के मस्तक पर चंदन, भस्म और लगाएं और फिर उन्हें हार और फूल चढ़ाकर माला पहनाएं।
  • पूजन में अनामिका अंगुली (छोटी उंगली के पास वाली यानी रिंग फिंगर) से इत्र, गंध, चंदन आदि लगाना चाहिए।
  • इसके बाद 16 प्रकार की संपूर्ण सामग्री एक एक करके अर्पित करें।
  • पूजा करने के बाद प्रसाद या नैवेद्य (भोग) चढ़ाएं और प्रसाद अर्पित करें।
  • ध्यान रखें कि नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नैवेद्य में नहीं किया जाता है।
  • नैवेद्य अर्पित करने के बाद अंत में शिवजी की आरती करें। आरती के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें।
  • शिव मंत्र: ॐ नम: शिवाय।....ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
 

3. महाशिवरात्रि पर शिव आरती- Lyrics

ॐ जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
 
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
 
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
 
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
 
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
 
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
 
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
 

4. महाशिवरात्रि पर शिव चालीसा

।।दोहा।। 
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
 
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
 
॥दोहा॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
मंदिर में शिवलिंग की पूजा करते हुए भक्तगण

5. महाशिवरात्रि की कथा

एक समय चित्रभानु नामक शिकारी, जो साहूकार का कर्जदार था, अनजाने में शिवरात्रि के दिन एक शिवमठ में बंदी रहने के कारण कथा सुनता रहा। रात में शिकार की खोज में वह एक बेल के पेड़ पर चढ़ा, जिसके नीचे शिवलिंग था। रात भर वह व्याकुल होकर शिकार का इंतजार करता रहा और इस दौरान:
  • उसने अनजाने में शिवलिंग पर बेलपत्र गिराए।
  • भूख-प्यास के कारण उसका उपवास हो गया।
  • पूरी रात जागने से उसका जागरण संपन्न हुआ।
रात के चार प्रहरों में उसके सामने तीन हिरणियां और एक मृग आए। उन सभी ने अपने परिवार के प्रति कर्तव्य निभाने के लिए शिकारी से जीवनदान मांगा और वापस आने का वचन दिया। शिकारी की करुणा जागी और उसने सबको जाने दिया। सुबह जब वह पूरा मृग परिवार सत्य वचन निभाते हुए शिकारी के सामने आत्मसमर्पण करने आया, तो शिकारी का हृदय परिवर्तन हो गया।
परिणाम: अनजाने में हुए इस व्रत और दया भाव से शिकारी के पाप धुल गए। मृत्यु के बाद उसे शिवलोक की प्राप्ति हुई।
 

6. महाशिवरात्रि का लाभ

कर्मों का क्षय: मान्यता है कि इस रात पूरी श्रद्धा से शिव की आराधना करने पर जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। जैसा कि आपने शिकारी की कथा में पढ़ा, अनजाने में किया गया व्रत भी जीवन बदल देता है।
मानसिक शांति: शिव को 'मन' का अधिष्ठाता भी माना जाता है। इस रात "ॐ नमः शिवाय" का जप करने से तनाव, चिंता और मानसिक विकारों से मुक्ति मिलती है।
इच्छाशक्ति की वृद्धि: उपवास और जागरण व्यक्ति के संयम और इच्छाशक्ति (Will Power) को मजबूत करते हैं।
ग्रह दोषों से मुक्ति: विशेषकर जिनका चंद्रमा कमजोर है या जिन पर शनि की साढ़ेसाती/ढैय्या चल रही है, उनके लिए शिव की पूजा अमृत समान मानी जाती है।
पारिवारिक सुख: अविवाहितों को सुयोग्य जीवनसाथी और विवाहितों को सुखी गृहस्थ जीवन (शिव-शक्ति की कृपा से) का आशीर्वाद मिलता है।
भय से मुक्ति: महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
 

7. महाशिवरात्रि पर पूछे जाने वाले प्रश्‍न-FAQs

1. महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में क्या अंतर है?
हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को 'मासिक शिवरात्रि' कहते हैं, लेकिन फाल्गुन मास की चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि सबसे बड़ी होती है, इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। माना जाता है कि इसी दिन सृष्टि का आरंभ हुआ था और शिव-शक्ति का मिलन हुआ था।
 
2. क्या महाशिवरात्रि पर पूरे दिन सोना वर्जित है?
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। दिन में सोना व्रत के फल को कम कर सकता है। चूंकि इस रात ऊर्जा का प्रवाह ऊपर की ओर होता है, इसलिए जागकर रीढ़ की हड्डी सीधी रखने की सलाह दी जाती है।
 
3. शिवलिंग पर क्या चढ़ाना सबसे शुभ होता है?
शिवलिंग पर मुख्य रूप से ये 5 चीजें चढ़ाई जाती हैं:
बिल्वपत्र: (बिना कटा-फटा और तीन पत्तियों वाला)
धतूरा और भांग: (वैराग्य का प्रतीक)
कच्चा दूध और गंगाजल: (शांति के लिए)
शहद: (वाणी की मधुरता के लिए)
सफेद चंदन: (शीतलता के लिए)
 
4. क्या अविवाहित महिलाएं महाशिवरात्रि का व्रत रख सकती हैं?
हाँ, बिल्कुल। अविवाहित महिलाएं सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति के लिए यह व्रत रखती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती को 'आदर्श जोड़ा' माना जाता है।
 
5. व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?
क्या खाएं: फल, दूध, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, और मेवे (फलाहार)।
क्या न खाएं: अनाज (गेहूं, चावल), दालें, प्याज, लहसुन और मांसाहार। नमक की जगह सेंधा नमक का प्रयोग करें।
 
6. चार प्रहर की पूजा क्या होती है?
महाशिवरात्रि की रात को चार हिस्सों (प्रहर) में बांटा जाता है। हर प्रहर में शिव का अलग-अलग अभिषेक होता है:
प्रथम प्रहर: दूध से अभिषेक।
द्वितीय प्रहर: दही से अभिषेक।
तृतीय प्रहर: घी से अभिषेक।
चतुर्थ प्रहर: शहद से अभिषेक।
 
7. शिवलिंग की पूरी परिक्रमा क्यों नहीं की जाती?
शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा आधी की जाती है। जहाँ से अभिषेक का जल निकलता है (निर्मली या जलधारी), उसे लांघना नहीं चाहिए। वहीं से वापस मुड़ जाना चाहिए।