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शिव चरित्र देता है सफल जीवन और जनकल्याण की प्रेरणा

मंगलवार,मार्च 2, 2021
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सबसे पहले सूर्य का आह्वान किया जाता है क्योंकि सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। रोली से रंगे हुए लाल अक्षत और लाल रंग के पुष्प लेकर निम्न मंत्र से सूर्य का आह्वान करें -
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यहां प्रस्तुत है महाशिवरात्रि के 15 ऐसे मंत्र जिनका जप जीवन में हर तरह की शुभता, अनुकूलता और प्रगति लाता है।
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महाशिवरात्रि का व्रत रखने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह व्रत पापों से मुक्ति दिलाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति की आत्मा शुद्ध हो जाती है।
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सबसे श्रेष्ठ दिन है महाशिवरात्रि का पावन पर्व, इस बार यह शुभ दिन11 मार्च 2021, गुरुवार को है। इस दिन सुबह 09 बजकर 22 मिनट तक महान कल्याणकारी 'शिवयोग' भी विद्यमान रहेगा। उसके बाद सभी कार्यों में सिद्धि दिलाने वाला 'सिद्धयोग' आरम्भ हो जाएगा।
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महाशिवरात्रि का पर्व सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन को भोलेनाथ के भक्त चरम उत्साह से मनाते हैं। आइए जानते हैं इस साल महाशिवरात्रि का पर्व कब आ रहा है...
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फागुन मास हिंदू पंचाग व कैलेंडर का आंतिम महीना होता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह महीना फरवरी-मार्च में पड़ता है परंतु इस बार संपूर्ण मार्च में ही रहेगा। इस वर्ष यह मास 28 फरवरी 2021 से लेकर 28 मार्च 2021 तक रहेगा। यह समय बसंत ऋतु का समय होता ...
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ज्योतिष शास्त्र में साधना के लिए तीन रात्रि विशेष मानी गई हैं। इनमें शरद पूर्णिमा को मोहरात्रि, दीपावली की कालरात्रि तथा महाशिवरात्रि को सिद्ध रात्रि कहा गया है।
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महाशिवरात्रि ऐसे लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो आध्यात्मिक मार्ग पर हैं। संसार में महत्वाकांक्षा रखने वाले और गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए भी यह उतना ही अहम है।
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शिव जी की पूजा के लिए महाशिवरात्रि का पर्व सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन को भोलेनाथ के भक्त चरम उत्साह से मनाते हैं। आइए जानते हैं इस साल महाशिवरात्रि का पर्व कब आ रहा है...
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भगवान शिव के अनमोल वचनों को 'आगम ग्रंथों' में संग्रहित किया गया है। आगम का अर्थ ज्ञान अर्जन। पारंपरिक रूप से शैव सिद्धांत में 28 आगम और 150 उप-आगम हैं।
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महाशिवरात्रि और बाद में हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्‍त के समय अपने घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते समय ये 17 मंत्र बोलें। 'जो शिव है वो गुरु है, जो गुरु है वो शिव है' इसलिए हम गुरुदेव का स्मरण करते हैं।
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बैराठ। राजस्थान प्रांत के जयपुर जिले में अरावली की पहाड़ियों में बैराठ नामक एक नगर है जिसे प्राचीनकाल में विराटनगर कहा जाता था। कहते हैं कि यहां पांचों पांडवों ने अपने अज्ञातवास का समय बिताया था। इस दौरान उन्होंने वहां एक शिवलिंग की स्थापना की थी। ...
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फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष यह पर्व 21 फरवरी, शुक्रवार यानी आज है। आइए जानते हैं, राशि के अनुसार भगवान शिव को कैसे मनाएं अपने लिए.. .
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21 फरवरी की शाम 5:20 मिनट पर चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। जो 22 फरवरी को शाम 7 बजकर 2 मिनट पर समाप्त होगी। रात्रि में पूजन का समय 12 बजकर 9 मिनट से रात्रि एक के बीच रहेगा।
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महाशिवरात्रि का दिवस होना भी आवश्यक नहीं है। पुराण में 4 प्रकार की शिवरात्रि पूजन का वर्णन है। मासिक शिवरात्रि, प्रथम आदि शिवरात्रि तथा महाशिवरात्रि। पुराण वर्णित अंतिम शिवरात्रि है- नित्य शिवरात्रि।
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हर कोई शिव भक्त इस बात को जानना चाहता है कि आखिर भगवान शंकर का जन्म कैसा हुआ और इनके माता-पिता का क्या नाम है। अलग-अलग पुराणों में भगवान शिव के जन्म और उनके माता-पिता के विषय में कई कथाएं प्रचलित हैं।
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भगवान शिव के 108 नामों का विशेष महत्व है। प्रदोष, शिवरात्रि, श्रावण मास, श्रावण सोमवार या प्रति सामान्य सोमवार को इन नामों का स्मरण करने से शिव की कृपा सहज प्राप्त हो जाती है।
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महाशिवरात्रि ऐसे लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो आध्यात्मिक मार्ग पर हैं। संसार में महत्वाकांक्षा रखने वाले और गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए भी यह उतना ही अहम है। गृहस्थ जीवन बिताने वाले लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह की वर्षगांठ के रूप ...
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भगवान शिव की विश्व में कई विशालकाय प्रतिमाएं हैं, लेकिन नेपाल में जो मूर्ति स्थापित है उससे ऊंची मूर्ति के बारे में अभी तक अज्ञात है। इस मूर्ति को देखा अद्भुत है।
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