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Written By WD Feature Desk
Last Modified: शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026 (14:49 IST)

महाशिवरात्रि पर घर पर ही करें इस विधि से रुद्राभिषेक और शिव परिवार की इस तरह करें पूजा

Mahashivratri 2026, शिवलिंग
Rudra abhishek ki vidhi: महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक करने का खास महत्व है। यदि आप घर पर ही रुद्राभिषेक करना चाहते हैं तो यहां पर बहुत ही सरल विधि के साथ जानिए कि शिवलिंग की पूजा करते समय शिव परिवार की पूजा को करना न भूलें क्योंकि शिवलिंग में ही शिव परिवार के लिए खास स्थान होता है।
 

रुद्राभिषेक पूजा की सरल विधि- rudra abhishek ki vidhi:

  1. शिवलिंग को उत्तर दिशा में स्थापित करके पूर्व में मुख करके रुद्राभिषेक करते हैं।
  2. पहले शिवलिंग का शुद्ध जल या गंगाजल से जलाभिषेक करें।
  3. इसके बाद पंचामृत (दूध, दही, शहद, शक्कर, घी) समेत गन्ने का रस आदि सभी तरल पदार्थ से उनका अभिषेक करें।
  4. अभिषेक करते समय शिवजी का पंचाक्षरी मंत्र- ॐ नम: शिवाय का जप करते रहें।
  5. उपरोक्त अभिषेक करने के बाद पुन: जलाभिषेक करें।
  6. इसके बाद शिवजी को चंदन और भस्म का लेप लगाएं।
  7. लेप लगाते समय  महामृत्युंजय मंत्र या रुद्राष्टकम मंत्र का जाप करें। 
  8. इसके बाद उन्हें पान का पत्ता, बेलपत्र सहित सभी बची हुई पूजा सामग्री करें।
  9. इसके बाद उन्हें उनकी पसंद का भोग लगाएं और इसके बाद 108 बार शिव मंत्र का जप करें।
  10. जप करने के बाद उनकी आरती उतारते हैं।
  11. आरती के बाद प्रसाद वितरण करते हैं।

रुद्राभिषेक पूजा का लाभ | Benefits of Rudrabhishek Puja: 

1. मनोकामना पूर्ति।
2. रोगों से मुक्ति और उत्तम स्वास्थ्य।
3. ग्रह दोषों का शमन। 
4. नकारात्मक ऊर्जा का नाश और सकारात्मकता।
5. मोक्ष की प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति।
 

शिवलिंग में है शिव परिवार की पूजा का स्थान: 

1. शिवलिंग के 3 हिस्से:
शिवलिंग के 3 हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा जो नीचे चारों ओर भूमिगत रहता है। मध्य भाग में आठों ओर एक समान पीतल बैठक बनी होती है। अंत में इसका शीर्ष भाग, जो कि अंडाकार होता है जिसकी कि पूजा की जाती है। ये 3 भाग ब्रह्मा (नीचे), विष्णु (मध्य) और शिव (शीर्ष) के प्रतीक हैं।
 
2. शिवलिंग के सात प्रमुख स्थान:
1. सीधा चरण: श्री गणेश जी का स्थान।
2. लेफ्ट चरण: श्री कार्तिकेय जी का स्थान।
3. दोनों चरणों के बीच सर्पाकार भाग: अशोक सुंदरी (भगवान शंकर की छोटी पुत्री) का स्थान।
4. शिवलिंग के नीचे गोल भाग: माता पार्वती का हस्तकमल।
5. शिवलिंग स्वयं: महादेव जी का स्थान।
6. जहाँ से जल नीचे गिरता है: 33 कोटि देवी देवता का स्थान।
7. शिवलिंग के ऊपर कलश में शंकर भगवान की 5 पुत्रियों का स्थान।
 
शिव परिवार की पूजा: शिवलिंग के प्रत्येक भाग पर जल अर्पित करके सभी स्थानों पर फूल अर्पित करके पूजा करें।