Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में यह त्योहार 15 फरवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा। चूँकि मुख्य पूजा मध्यरात्रि (निशीथ काल) में होती है, इसलिए 15 फरवरी की रात ही शिव पूजा होगी। इसी के साथ यहां जानिए कि कौनसे दुर्लभ योग में कितनी बजे दीपक जलाने से क्या फायदा होगा।
महाशिवरात्रि 2026
वर्ष: 2083
माह: माघ मास
दिनांक: 15 फरवरी 2026
दिन: रविवार
तिथि: त्रयोदशी के बाद चतुर्दशी
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ के बाद श्रवण
शुभ मुहूर्त: अभिजीत और निशिता मुहूर्त
शुभ योग: सर्वार्थ सिद्धि योग
शुभ ग्रह योग:-
लक्ष्मी योग: मकर राशि में मंगल और चंद्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है।
बुधादित्य और शुक्रादित्य योग: योगकुंभ राशि में सूर्य-बुध के मिलन से बुधादित्य योग और सूर्य-शुक्र के साथ होने से शुक्र-आदित्य योग बन रहा है।
चतुर्ग्रही योग: कुंभ राशि में चतुर्ग्रही योग का निर्माण भी हो रहा है। ये योग व्यक्ति के मान-सम्मान और तेज में वृद्धि करते हैं।
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 05:04 बजे से।
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम 05:34 बजे तक।
शिव मंदिर में दीपदान: दरिद्रता दूर करने और अक्षय पुण्य पाने का दिव्य मार्ग
सनातन धर्म में 'दीपदान' का विशेष महत्व है, खासकर जब बात महादेव की हो। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शाम के समय शिवलिंग के समक्ष श्रद्धापूर्वक जलाया गया एक दीपक न केवल अंधकार दूर करता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में ऐश्वर्य और अपार धन-संपत्ति के द्वार खोल देता है।
शिवलिंग के समक्ष दीप प्रज्वलन: सही विधि और नियम
यदि आप नियमित रूप से शाम को प्रदोष काल में या रात्रि 9 बजे के समय शिव मंदिर जाते हैं, तो दीपक जलाते समय इन शास्त्रोक्त नियमों का पालन अवश्य करें:
1. दीपक की दिशा और स्थान
घी का दीपक: यदि आप गाय के घी का दीपक जला रहे हैं, तो इसे भगवान की प्रतिमा या शिवलिंग के बाईं ओर (Left side) रखें।
तेल का दीपक: यदि आप तेल का दीपक जला रहे हैं, तो इसे दाईं ओर (Right side) रखना शुभ माना जाता है।
2. बत्ती का विशेष चुनाव
घी के लिए: रुई की सफेद बत्ती का उपयोग करें।
तेल के लिए: लाल धागे या कलावा की बत्ती (लाल बत्ती) का उपयोग करना सर्वोत्तम होता है।
3. 8 या 12 मुखी दीपक का चमत्कार
साधारण दीपक के अलावा, यदि आप 8 या 12 मुखी दीपक प्रज्वलित करते हैं, तो यह 'अक्षय पुण्य' प्रदान करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह प्रयोग जटिल समस्याओं के अंत और शीघ्र शिव कृपा प्राप्ति के लिए अचूक माना गया है।
4. मंत्र शक्ति का जुड़ाव
दीपक रखते समय शांत मन से 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का निरंतर जप करें। यह क्रिया दीपक की लौ की ऊर्जा को आपके सूक्ष्म शरीर से जोड़ देती है।
विशेष परामर्श (Expert Tip):
शाम का समय (प्रदोष काल) शिव आराधना के लिए सबसे शक्तिशाली माना जाता है। इस समय किया गया दीपदान कर्ज से मुक्ति और मानसिक शांति के लिए विशेष फलदायी है।