दुर्गा आरती: जय अम्बे गौरी| Durga aarti om jai ambe gauri
Navratri aarti lyrics: भगवान श्री दुर्गा माता की आरती "ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी" हिंदू धर्म में सबसे अधिक गाई जाने वाली और लोकप्रिय आरतियों में से एक है। इसी के साथ ही मराठी आरती दुर्गे दुर्गटभारी तुजविण संसारी भी लोकप्रिय है। पढ़िए दोनों आरतियां को लिखित और इमेज फॉर्मेट में। किसी भी पूजा, अनुष्ठान या नए कार्य की शुरुआत में श्री दुर्गाजी की यह आरती अनिवार्य रूप से की जाती है।
दुर्गा आरती : जय अम्बे गौरी | om jai ambe gauri aarti in hindi
ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।-2
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ टेक॥
मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को।-2
उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको।।ॐ जय अम्बे।।
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।-2
रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै।।ॐ जय अम्बे।।
केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी।-2
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी।।ॐ जय अम्बे।।
कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती।-2
कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति।।ॐ जय अम्बे।।
शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती।-2
धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती।।ॐ जय अम्बे।।
चण्ड मुण्ड संहार, शोणित बीज हरे।
मधु कैटब दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।ॐ जय अम्बे।।
ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।-2
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।।ॐ जय अम्बे।।
चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू।-2
बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू।।ॐ जय अम्बे।।
तुम ही जग की माता, तुमही हो भरता।
भक्तन के दु:खहर्ता, सुख संपत्तिकर्ता।।ॐ जय अम्बे।।
भुजा चार अति शोभित वरमुद्रा धारी।-2
मनवांछित फल पावत, सेवत नरनारी।।ॐ जय अम्बे।।
कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती।-2
श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति।।ॐ जय अम्बे।।
श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै।-2
कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै।।ॐ जय अम्बे।।
ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।।-2
।।इति दुर्गा आरती।।
श्री दुर्गा देवीची आरती | durge durgat bhari lyrics in hindi Marathi
दुर्गे दुर्गटभारी तुजविण संसारी
अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी
वारी वारी जन्म मरणांतें वारी
हारी पडलो आता संकट निवारी ।।१।।
जय देवी जय देवी महिषासुरमथिनी
सुरवर ईश्वरदे तारक संजीवनी
जय देवी जय देवी ।।धृ।।
त्रिभुवनी भुवनी पाहता तुज ऐसे नाही
चारी श्रमले परंतु न बोलवे काही
साही विवाद करता पडले प्रवाही
ते तू भक्तांलागी पावसि लवलाही ।।२।।
प्रसन्नवदने प्रसन्न होशी निजदासा
क्लेशापासुन सोडवी तोडी भवपाशा
अंबे तुजवाचून कोण पुरवील आशा
नरहरि तल्लिन झाला पदपंकजलेशा ।।३।।

