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मौना पंचमी 2026: क्यों मनाई जाती है यह पवित्र तिथि? जानिए महत्व और पौराणिक कथा

mauna panchami 2026
मौना पंचमी सनातन धर्म में एक अत्यंत पवित्र और फलदायी पर्व माना जाता है। यह व्रत श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की विशेष पूजा-अर्चना करने के साथ ही मौन व्रत धारण करने का विधान है। मरुस्थलीय इलाके में नागपंचमी मनाए जाने को नाग मरुस्थले पंचमी कहते हैं। मरुस्थल का अर्थ रेगिस्तान होता है। श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी का त्योहार धूम धाम से मनाया जाता है।
 

मौना पंचमी का महत्व

मानसिक शांति और संयम: इस दिन मौन (चुप) रहने का विशेष महत्व है। मौन व्रत रखने से मन की एकाग्रता बढ़ती है, क्रोध पर नियंत्रण मिलता है और आंतरिक ऊर्जा का संरक्षण होता है।
 
ज्ञान व बुद्धि की प्राप्ति: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के दक्षिणामूर्ति स्वरूप की पूजा की जाती है। यह स्वरूप ज्ञान, ध्यान, योग और विद्या के जगद्गुरु के रूप में जाना जाता है।
 
कालसर्प दोष व सर्पभय से मुक्ति: मौना पंचमी पर नाग देवता की पूजा करके उन्हें दूध और लावा चढ़ाया जाता है, जिससे गृह-क्लेश दूर होते हैं और परिवार में सर्प का भय समाप्त होता है।
 
मधुश्रावणी और अखंड सौभाग्य: मिथिलांचल और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में नवविवाहित महिलाओं के लिए यह पर्व बहुत खास होता है। इस दिन से मधुश्रावणी व्रत की शुरुआत होती है, जो पति की लंबी उम्र और सुखद दांपत्य जीवन के लिए रखा जाता है।
 

पौराणिक कथा:

मौना पंचमी और नाग पूजा से जुड़ी मुख्य पौराणिक कथा इस प्रकार है:
कथा:
पौराणिक काल में एक ब्राह्मण परिवार रहता था, जिसके सात पुत्र और उनकी बहुएं थीं। सबसे छोटी बहू बहुत ही धार्मिक, शांत और सुशील स्वभाव की थी। परंतु, अनजाने में उससे कुछ ऐसा हुआ जिससे नागदेवता क्रोधित हो गए।
 
एक दिन छोटी बहू को स्वप्न में नागराज ने दर्शन दिए। उसने नागराज की पूजा की और अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगी। उसकी अटूट भक्ति और शांत स्वभाव (मौन भाव) को देखकर नागदेवता अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने उसे अखंड सौभाग्यवती होने तथा परिवार की रक्षा का वरदान दिया।
 
इसके बाद जब श्रावण कृष्ण पंचमी का दिन आया, तब उसने मौन रहकर विधि-विधान से भगवान शिव और नागदेवता की पूजा की। इस पूजा के प्रभाव से उसके परिवार से सर्पदंश का भय हमेशा के लिए समाप्त हो गया और घर में सुख-समृद्धि का वास हुआ। तभी से श्रावण कृष्ण पंचमी को मौना पंचमी के रूप में मनाया जाने लगा, ताकि मौन रहकर भगवान शिव और नागराज को प्रसन्न किया जा सके।
 

संक्षिप्त पूजा विधि:

संकल्प व मौन: सुबह स्नान करके मौन रहने का संकल्प लें।
शिव-पूजन: भगवान शिव (या शिवलिंग) का जल और पंचामृत से अभिषेक करें।
नागदेवता का पूजन: गोबर या मिट्टी से नाग-नागिन की आकृति बनाकर या प्रतिमा पर दूध, रोली, चावल और लावा अर्पित करें।
मंत्र जाप: ॐ नमः शिवाय या नाग मंत्रों का मन ही मन जाप करें।
 
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