श्री ताप्ती जयंती 2026: कब है, जानें पूजा का महत्व, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां ताप्ती जयंती (ताप्ती जन्मोत्सव) अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। सूर्यपुत्री मां ताप्ती देश की प्रमुख और पवित्र नदियों में से एक हैं, जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व विशेष रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में बहुत अधिक है। वर्ष 2026 में मां ताप्ती जयंती की तिथि, पूजा मुहूर्त और इसके महत्व की विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है।
श्री ताप्ती जयंती 2026 तिथि व मुहूर्त
साल 2026 में आषाढ़ शुक्ल सप्तमी तिथि 20 जुलाई 2026, सोमवार को पड़ रही है। उदय तिथि के अनुसार इस दिन ताप्ती जयंती का उत्सव मनाया जाएगा।
सप्तमी तिथि का आरंभ: 20 जुलाई 2026 को तड़के सुबह 03:30 बजे से
सप्तमी तिथि का समापन: 21 जुलाई 2026 को सुबह 04:03 बजे तक
पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त: सूर्योदय से लेकर दोपहर तक (इस दिन सोमवार होने के कारण शिव परिवार के साथ मां ताप्ती की पूजा का विशेष फल मिलेगा)।अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:19 से 01:11 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम को 07:17 से 07:39 तक।
मां ताप्ती का पौराणिक महत्व (जन्म कथा)
धार्मिक पुराणों (विशेषकर स्कंद पुराण और महाभारत) के अनुसार, मां ताप्ती को भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की सगी बहन माना गया है।
जन्म की कथा: सूर्य देव का तेज (गर्मी) इतना प्रचंड था कि पृथ्वी और देवलोक उसे सहन नहीं कर पा रहे थे। स्वयं सूर्य देव को भी अपने ताप को नियंत्रित करने में कठिनाई हो रही थी। तब उन्होंने अपने शरीर के तीव्र ताप (गर्मी) को शांत करने के लिए उसे एक जलधारा के रूप में धरती पर प्रवाहित कर दिया। सूर्य के इसी 'ताप' से उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'ताप्ती' या 'तापी' पड़ा। सूर्य की पुत्री और शनि की बहन होने के कारण इन्हें अत्यंत कल्याणकारी और पापों का नाश करने वाली नदी माना जाता है।
ताप्ती जयंती पर पूजा का महत्व
शनि दोष और सूर्य दोष से मुक्ति: चूंकि ताप्ती जी शनि देव की बहन और सूर्य देव की पुत्री हैं, इसलिए ताप्ती जयंती के दिन इनके जल में स्नान करने या इनकी पूजा करने से कुंडली के शनि दोष (साढ़ेसाती, ढैय्या) और सूर्य जनित दोषों का प्रभाव शांत होता है।
पापों से मुक्ति: मान्यताओं के अनुसार, गंगा नदी में स्नान करने से, नर्मदा जी के दर्शन मात्र से और ताप्ती नदी का स्मरण या नाम लेने मात्र से मनुष्य के कई जन्मों के पाप कट जाते हैं।
गौ हत्या जैसे महापाप से मुक्ति: पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि मां ताप्ती के पावन जल में स्नान करने से अनजाने में हुए बड़े से बड़े पापों का भी प्रायश्चित हो जाता है।
पितृ तर्पण के लिए फलदायी: इस दिन ताप्ती नदी के तट पर पिंडदान और पितृ तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि (घर पर या नदी तट पर कैसे करें पूजा?)
यदि आप ताप्ती नदी (बैतूल के मुलताई, बुरहानपुर या सूरत) के तट पर जा सकते हैं, तो वहाँ स्नान-दान करें। यदि ऐसा संभव न हो, तो घर पर ही इस विधि से पूजा करें:
स्नान: सुबह उठकर अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल या ताप्ती जल (यदि उपलब्ध हो) मिलाकर स्नान करें।
संकल्प व अर्घ्य: ताप्ती माता का ध्यान करते हुए सूर्य देव को जल (अर्घ्य) अर्पित करें।
पूजन: मां ताप्ती की कपूर, कुमकुम, हल्दी, अक्षत (चावल) और पीले फूलों से पूजा करें। उन्हें चुनरी अर्पित करें।
भोग: मां को मौसमी फल और खीर या हलवे का भोग लगाएं।
आरती व दीपदान:
शाम के समय मां ताप्ती की आरती करें और घर के मुख्य द्वार या किसी पवित्र स्थान (जैसे तुलसी जी के पास) दीपदान करें। नदी तट पर रहने वाले लोग इस दिन नदी में तैरते हुए दीए प्रवाहित करते हैं।

