0

Ahoi Ashtami Katha In Hindi : अहोई अष्टमी व्रत की पौराणिक कथा यहां पढ़ें

रविवार,अक्टूबर 20, 2019
ahoi ashtami katha
0
1
अहोई अष्टमी का शुभ पर्व 21 अक्टूबर 2019 को है। इस दिन अहोई माता का पूजन और वंदना की जाती है। यह व्रत संतान की शुभता, सुरक्षा, लंबी उम्र और आरोग्य के लिए किया जाता है। आइए जानें 10 जरूरी बातें....
1
2
कार्तिक माह की कृष्‍ण अष्टमी को अहोई माता का व्रत रखा जाता है। कहते हैं कि अहोई का अर्थ अनहोनी को को होनी बनाना होता है। इस दिन अहोई माता की पूजा की जाती है। अहोई अष्टमी का व्रत महिलाएं अपनी संतानों की लंबी आयु के लिए रखती हैं। कुछ महिलाएं इस व्रत ...
2
3
अहोई माता की पूजा और व्रत का संतान की रक्षा, सुख और समृद्धि के लिए विशेष महत्व है। कार्तिक महीने की अष्टमी बेहद विशेष होती है। इस अष्टमी को अहोई अष्टमी कहते हैं।
3
4
इस वर्ष 19 अक्टूबर, शनिवार को स्कंद षष्ठी मनाई जा रही है। हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मनाई जाती है।
4
4
5
19 अक्टूबर 2019, शनिवार को स्कंद षष्ठी व्रत मनाया जा रहा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी ति‍थि को स्कंद षष्ठी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र कार्तिकेय की विधिपूर्वक पूजा की जाती है।
5
6
मथुरा नगरी से लगभग 26 किलोमीटर दूर गोवर्धन परिक्रमा में राधा कुंड नाम एक स्थान आता है जो कि परिक्रमा का प्रमुख पड़वा है। आओ जानते हैं इस स्थान के बारे में महत्वपूर्ण 6 जानकारी।
6
7
सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं। एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति की अवधि ही सौर मास है। वैसे तो सूर्य की संक्रांति 12 हैं, लेकिन इनमें से 4 संक्रांति ही महत्वपूर्ण हैं जिनमें मेष, तुला, कर्क और मकर संक्रांति प्रमुख ...
7
8
ज्योतिषियों के अनुसार इस बार पुष्‍य नक्षत्र दो दिन रहेगा। 21 को सोम पुष्य और 22 को मंगल पुष्य नक्षत्र रहेगा। यह नक्षत्र 21 अक्टूबर शाम 5:33 बजे से प्रारंभ होकर 22 अक्टूबर मंगलवार को शाम 4:40 बजे तक रहेगा। इन दोनों दिन अन्य शुभ योगों का संयोग भी ...
8
8
9
हर माह हमारे लिए कई त्योहारों की सौगात लेकर आता है। अक्टूबर माह में कई महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाएंगे। यहां आपके लिए पेश हैं अक्टूबर 2019 के मुख्य त्योहारों की सूची-
9
10
प्रतिवर्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक अर्थात् पूरे श्राद्ध पक्ष में 16 दिनों तक संजा पर्व मनाया जाता है। कई स्थानों पर कन्याएं आश्विन मास की प्रतिपदा से इस व्रत की शुरुआत करती हैं।
10
11
भाद्रपद माह के शुक्ल पूर्णिमा से पितृ मोक्ष अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष में कुंआरी कन्याओं द्वारा मनाया जाने वाला संजा पर्व भी हमारी विरासत है, जो मालवा-निमाड़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र आदि जगह प्रचलित है।
11
12
कहते हैं कि देवी के विभिन्न रूप को उनके वाहन, पहनावे, हाथ और शस्त्रों के अनुसार पहचाना जाता है। देवी का वाहन उल्लू और गज है। बहुत सी जगह वह कमल पर विराजमान है। हर देवी का अलग ही रूप है। आजो जानते हैं कि गजलक्ष्मी कौन है।
12
13
21 सितंबर 2019 को महालक्ष्मी पर्व यानी गजलक्ष्मी व्रत है। इस दिन को दीपावली से भी अधिक शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष में आने वाले गजलक्ष्मी व्रत में अगर अपनी राशि अनुसार विधि-विधान से पूजन किया जाए तो महालक्ष्मी विशेष प्रसन्न होती हैं
13
14
मिट्टी का एक हाथी बनाएं या कुम्हार से बनवा लें जिस पर महालक्ष्मीजी की मूर्ति बैठी हो। सायंकाल जिस स्थान पर पूजन करना हो, उसे गोबर से लीपकर पवित्र करें। रंगोली बनाकर बाजोट पर लाल वस्त्र बिछाकर हाथी को रखें।
14
15
वंश वृद्धि व संतान की लंबी आयु के लिए महिलाएं आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी 21 और 22 सितंबर को जिउतिया का व्रत रखेंगी।
15
16
प्रदोष काल व्यापिनी अष्टमी को जीमूतवाहन का पूजन होता है। इस व्रत के लिए यह भी आवश्यक है कि पूर्वाह्न काल में पारण हेतु नवमी तिथि प्राप्त हो।
16
17
इस बार जीवित्पुत्रिका व्रत दो दिनों का हो गया है। कुछ लोग 22 सितंबर को जिउतिया व्रत रखेंगे और 23 सितंबर की सुबह पारण करेंगे।
17
18
ॐ जय पंचानन स्वामी प्रभु पंचानन स्वामी। अजर अमर अविनाशी, नमो अन्तर्यामी। चतुरानन संग सात ऋषि, शरण आपकी आये। अभय दान दे ऋषियन को, सार कष्ट मिटाए। 1। निगम गम पथ दाता हमें शरण पड़े तेरी। विषय विकार मिटाओ सारे, मत लाओ देरी। 2।
18
19
श्री विश्वकर्मा विश्व के भगवान सर्वाधारणम्। शरणागतम् शरणागतम् शरणागतम् सुखाकारणम्।। कर शंख चक्र गदा मद्दम त्रिशुल दुष्ट संहारणम्। धनुबाण धारे निरखि छवि सुर नाग मुनि जन वारणम्।। डमरु कमण्डलु पुस्तकम् गज सुन्दरम् प्रभु धारणम्। संसार हित कौशल ...
19