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मकर संक्रांति की तरह तुला संक्रांति क्या है?

रविवार,अक्टूबर 13, 2019
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हर माह हमारे लिए कई त्योहारों की सौगात लेकर आता है। अक्टूबर माह में कई महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाएंगे। यहां आपके लिए पेश हैं अक्टूबर 2019 के मुख्य त्योहारों की सूची-
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प्रतिवर्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक अर्थात् पूरे श्राद्ध पक्ष में 16 दिनों तक संजा पर्व मनाया जाता है। कई स्थानों पर कन्याएं आश्विन मास की प्रतिपदा से इस व्रत की शुरुआत करती हैं।
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भाद्रपद माह के शुक्ल पूर्णिमा से पितृ मोक्ष अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष में कुंआरी कन्याओं द्वारा मनाया जाने वाला संजा पर्व भी हमारी विरासत है, जो मालवा-निमाड़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र आदि जगह प्रचलित है।
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कहते हैं कि देवी के विभिन्न रूप को उनके वाहन, पहनावे, हाथ और शस्त्रों के अनुसार पहचाना जाता है। देवी का वाहन उल्लू और गज है। बहुत सी जगह वह कमल पर विराजमान है। हर देवी का अलग ही रूप है। आजो जानते हैं कि गजलक्ष्मी कौन है।
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21 सितंबर 2019 को महालक्ष्मी पर्व यानी गजलक्ष्मी व्रत है। इस दिन को दीपावली से भी अधिक शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष में आने वाले गजलक्ष्मी व्रत में अगर अपनी राशि अनुसार विधि-विधान से पूजन किया जाए तो महालक्ष्मी विशेष प्रसन्न होती हैं
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मिट्टी का एक हाथी बनाएं या कुम्हार से बनवा लें जिस पर महालक्ष्मीजी की मूर्ति बैठी हो। सायंकाल जिस स्थान पर पूजन करना हो, उसे गोबर से लीपकर पवित्र करें। रंगोली बनाकर बाजोट पर लाल वस्त्र बिछाकर हाथी को रखें।
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वंश वृद्धि व संतान की लंबी आयु के लिए महिलाएं आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी 21 और 22 सितंबर को जिउतिया का व्रत रखेंगी।
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प्रदोष काल व्यापिनी अष्टमी को जीमूतवाहन का पूजन होता है। इस व्रत के लिए यह भी आवश्यक है कि पूर्वाह्न काल में पारण हेतु नवमी तिथि प्राप्त हो।
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इस बार जीवित्पुत्रिका व्रत दो दिनों का हो गया है। कुछ लोग 22 सितंबर को जिउतिया व्रत रखेंगे और 23 सितंबर की सुबह पारण करेंगे।
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ॐ जय पंचानन स्वामी प्रभु पंचानन स्वामी। अजर अमर अविनाशी, नमो अन्तर्यामी। चतुरानन संग सात ऋषि, शरण आपकी आये। अभय दान दे ऋषियन को, सार कष्ट मिटाए। 1। निगम गम पथ दाता हमें शरण पड़े तेरी। विषय विकार मिटाओ सारे, मत लाओ देरी। 2।
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श्री विश्वकर्मा विश्व के भगवान सर्वाधारणम्। शरणागतम् शरणागतम् शरणागतम् सुखाकारणम्।। कर शंख चक्र गदा मद्दम त्रिशुल दुष्ट संहारणम्। धनुबाण धारे निरखि छवि सुर नाग मुनि जन वारणम्।। डमरु कमण्डलु पुस्तकम् गज सुन्दरम् प्रभु धारणम्। संसार हित कौशल ...
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भगवान विश्वकर्मा की पूजा और यज्ञ विशेष विधि-विधान से होता है।
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तकनीकी जगत के भगवान विश्वकर्मा की पूजा का त्योहार 17 सितंबर, आज मनाया जा रहा है। इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है। इनको भगवान शिव का अवतार भी माना जाता है।
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भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और सृजन का देवता माना जाता है, उन्हें दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर भी कहा जाता है। अगर इस दिन कारोबारी और व्यवसायी लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा करें तो तरक्की मिलती है।
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धन-धान्य और सुख-समृद्धि के लिए भगवान विश्वकर्मा की पूजा करना आवश्यक और मंगलदायी है। आइए जानें राशि अनुसार विश्वकर्मा पूजन में क्या करें।
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भगवान विश्वकर्मा पूजा का त्योहार 17 सितंबर 2019 मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था।
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विश्वकर्मा एक महान ऋषि और ब्रह्ममानी थे। ऋग्वेद में उनका उल्लेख मिलता है। कहते हैं कि उन्होंने ही देवताओं की घर, नगर, अस्त्र-शस्त्र आदि का निर्माण किया था। वे महान शिल्पकार थे। आओ जानते हैं उनके संबंध में 5 अनसुनी बातें।
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गणेशोत्सव की समाप्ति के बाद अंगारकी चतुर्थी 17 सितंबर 2019, मंगलवार को मनाई जा रही है।
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भगवान विश्वकर्मा की कृपा पाने के लिए उनके 108 नामों का पाठ करना बहुत लाभदायी होता है। आइए पढ़ें श्री भगवान विश्वकर्मा के 108 नाम...
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