मार्च 2026 में सोम प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा, क्या है इसका महत्व और कथा
जब सोमवार और त्रयोदशी तिथि का मिलन होता है, तो उसे सोम प्रदोष कहा जाता है। यह केवल एक व्रत नहीं, बल्कि महादेव की असीम अनुकंपा पाने का एक विशेष अवसर है। इस बार 16 मार्च 2026 सोमवार के दिन सोम प्रदोष रहेगा।
प्रदोष पूजा मुहूर्त- 16 मार्च 2026 के दिन शाम 06:36 से 09:00 बजे के बीच।
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ- 16 मार्च 2026 को 09:40 बजे से।
त्रयोदशी तिथि समाप्त-17 मार्च 2026 को 09:23 बजे तक।
क्यों है यह इतना खास?
मनचाहे फल की प्राप्ति: मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजन करने पर हर जायज मुराद पूरी होती है।
चंद्र दोष से मुक्ति: यदि कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या मानसिक अशांति रहती है, तो यह व्रत शांति का रामबाण उपाय है।
संतान सुख: पारिवारिक सुख और संतान प्राप्ति की कामना रखने वालों के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है।
सोम प्रदोष नाम के पीछे की अनूठी कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा को 'क्षय रोग' का श्राप था, जिसके कारण उन्हें मृत्यु के समान कष्ट झेलना पड़ रहा था। तब भगवान शिव ने उनके कष्टों का अंत कर त्रयोदशी के दिन ही उन्हें पुनर्जीवन दिया था। दोष निवारण होने के कारण ही इस तिथि का नाम 'प्रदोष' पड़ा।
सोम प्रदोष व्रत की रोचक कथा
प्राचीन काल में एक विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ भिक्षा मांगकर जीवन बसर करती थी। एक दिन उसे रास्ते में विदर्भ का राजकुमार घायल अवस्था में मिला, जिसे शत्रु सेना ने राज्य से बेदखल कर दिया था। दयालु ब्राह्मणी उसे अपने घर ले आई और अपने बेटे की तरह पालने लगी।
राजकुमार की मुलाकात अंशुमति नामक गंधर्व कन्या से हुई। भगवान शिव के स्वप्न में दिए आदेश के अनुसार दोनों का विवाह संपन्न हुआ। वह ब्राह्मणी निष्ठापूर्वक प्रदोष व्रत करती थी। इसी व्रत के पुण्य और गंधर्वराज की सेना की मदद से राजकुमार ने शत्रुओं को हराकर अपना खोया हुआ राज्य वापस पा लिया। राजकुमार ने अपने साथ रहे ब्राह्मण-पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया।
सार: जिस तरह महादेव की कृपा से उस ब्राह्मणी और राजकुमार के दिन फिरे, उसी प्रकार सच्चे मन से सोम प्रदोष व्रत करने वाले हर भक्त की मनोकामना शिव शंकर अवश्य पूरी करते हैं।