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Written By WD Feature Desk
Last Modified: बुधवार, 11 मार्च 2026 (12:31 IST)

तमिल त्योहार कारादाइयन नौम्बू क्यों मनाया जाता है?

तमिल हिंदू त्योहार
karadaiyan nombu: कारादाइयन नौम्बू (सावित्री व्रतम) तमिल संस्कृति का एक पावन उत्सव है, जो वैवाहिक सुख और पति की दीर्घायु के संकल्प का प्रतीक है। यह पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करते हैं (मीन संक्रांति)। इस बार यह पर्व 14 मार्च 2026 को मनाया जा रहा है।
 

प्रमुख विशेषताएं और परंपराएं

पौराणिक आधार: यह व्रत माता सावित्री को समर्पित है, जिन्होंने अपने दृढ़ निश्चय से यमराज से पति सत्यवान के प्राण वापस पा लिए थे।
विशेष भोग: इस दिन 'करदई' नामक विशेष नैवेद्यम (प्रसाद) माँ गौरी को अर्पित किया जाता है।
मंजल सरदु (पीला धागा): पूजा के बाद महिलाएँ अपने गले में एक पवित्र पीला धागा बाँधती हैं, जिसे 'नौम्बू चरडू' कहा जाता है।
 

कौन और क्यों करता है यह व्रत?

विवाहित स्त्रियाँ: पति की लंबी उम्र और सुखद गृहस्थी के लिए।
अविवाहित कन्याएँ: सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए।
पहनावा: इस दिन महिलाएँ पीले वस्त्र धारण कर देवी गौरी की उपासना करती हैं।
 

समय और मुहूर्त का महत्व

समय: इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका सटीक समय है। यह पर्व मासी महीने के अंत और पंगुनी महीने की शुरुआत के संधिकाल पर मनाया जाता है।
मुहूर्त: धागा बाँधने का शुभ मुहूर्त मीन संक्रांति के क्षण पर निर्भर करता है, जो स्थानीय सूर्योदय के अनुसार हर शहर के लिए अलग हो सकता है।
महत्व: चूंकि हिंदू पंचांग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है, इसलिए यदि मुहूर्त आधी रात के बाद आता है, तो भी उसे उसी दिन के विस्तारित समय (24+) के रूप में गिना जाता है। यह त्यौहार केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समर्पण और अटूट प्रेम का उत्सव है जो पीढ़ियों से तमिल परिवारों की पहचान बना हुआ है।
 
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