17 मार्च को मासिक शिवरात्रि: आधी रात को कर लें ये 1 छोटा सा काम, टल जाएगी हर बड़ी मुसीबत
हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को 'मासिक शिवरात्रि' मनाई जाती है। जहाँ साल में एक बार महाशिवरात्रि का बड़ा उत्सव होता है, वहीं हर महीने आने वाली यह तिथि महादेव की कृपा पाने का गुप्त द्वार है। इस बार यह पावन तिथि 17 मार्च 2026 को है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। यह पर्व केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि अपनी इंद्रियों को वश में कर क्रोध, ईर्ष्या और लोभ को त्यागने का संकल्प है।
मनोवांछित फल और विशेष लाभ
मासिक शिवरात्रि का व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए मनचाहा वर पाने का वरदान है, तो वहीं वैवाहिक जीवन में आ रही रुकावटों को दूर करने का अचूक उपाय भी। शिव पुराण के अनुसार, जो भक्त इस दिन पूरी निष्ठा से उपवास करता है, उसके जीवन से आर्थिक तंगी और कर्जों का बोझ समाप्त हो जाता है। रात के समय भगवान शिव की आराधना व्यक्ति के आत्मविश्वास को जागृत करती है।
पूजा की सरल विधि और खास नियम
इस व्रत का संकल्प महाशिवरात्रि से शुरू करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। व्रत के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर मंदिर जाएं और शिव परिवार (पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी) का पूजन करें। शिवलिंग पर जल, दूध, घी, शहद और दही से रुद्राभिषेक करें तथा बेलपत्र व धतूरा अर्पित करें।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान:
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शिवरात्रि की पूजा मुख्य रूप से निशिता काल (मध्य रात्रि) में की जाती है।
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रात 12 बजे के बाद शिव स्तुति के साथ हनुमान चालीसा का पाठ आर्थिक संकटों को दूर करता है।
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दिन में केवल फलाहार करें और अन्न का त्याग रखें।
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सफेद वस्तुओं (चावल, दूध, चीनी) का दान करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
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भगवान शिव की यह आराधना न केवल कष्टों को हरती है, बल्कि भक्त को मोक्ष की ओर भी ले जाती है।