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Asteroid 1997 NC1 : पृथ्वी के करीब से गुजरेगा विशाल एस्टेरॉयड, क्या होगी रफ्तार, जानें कितना सुरक्षित?

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Asteroid 1997 NC1 : 750 से 1,650 मीटर चौड़ा एक एस्टेरॉयड शनिवार को पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरने वाला है। बताया जा रहा है कि इस एस्टेरॉयड के पृथ्वी से टकराने की कोई संभावना नहीं है। इससे पृथ्वी को कोई खतरा नहीं होगा। इस पर भारत की ISRO, चीन की CNSA, अमेरिका की NASA समेत कई अंतरिक्ष एजेंसियों की नजर हैं।
 
इस एस्टेरॉयड का नाम (152637) 1997 NC1 है। यह एस्टेरॉयड शनिवार को भारतीय समयानुसार शाम 4:44 बजे पृथ्वी के सबसे नजदीक आएगा। इस दौरान एस्टेरॉयड और पृथ्वी के बीच की दूरी लगभग 2,560,000 किलोमीटर होगी। यह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से छह गुना से भी ज्यादा है। पृथ्वी के करीब से गुजरते समय एस्टेरॉयड की गति लगभग 9 किलोमीटर प्रति सेकंड की होगी।
 
एस्टेरॉयड (152637) 1997 NC1 की खोज 1997 में की गई थी। अगर मौसम साफ रहा तो अंतरिक्ष विज्ञान में रूची रखने वाले लोग दुनिया में कही से भी इसे दूरबीन की मदद से आसानी से देख सकेंगे।
 

क्या होता है एस्टेरॉयड

एस्टेरॉयड को किसी ग्रह या तारे का टूटा हुआ टुकड़ा माना जाता है। ये पत्थर या धातु के टूकड़े होते हैं जो एक छोटे पत्थर से लेकर एक मील बड़ी चट्टान तक और कभी-कभी तो एवरेस्ट के बराबर तक हो सकते हैं। आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का और साधारण बोलचाल में 'टूटते हुए तारे' अथवा 'लूका' कहते हैं।  कहते हैं कि हमारे सौर मंडल में करीब 20 लाख एस्ट्रेरॉयड घूम रहे हैं। हिंदी में इसे उल्कापिंड या क्षुद्रग्रह कहते हैं।
 
हर साल एस्टेरॉयड पृथ्वी की ओर आते हैं। इनमें से कुछ के पृथ्वी से टकराने का खतरा बना रहता है। इन्हें खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है। 1994 में पृथ्वी के बराबर के 10-12 उल्का पिंड बृहस्पति ग्रह से टकरा गए थे जहां का नजारा महाप्रलय से कम नहीं था। आज तक उस ग्रह पर उनकी आग और तबाही शांत नहीं हुई है। 
edited by : Nrapendra Gupta
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