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यूरोप में किलर हीट वेव से 58 लोगों की मौत, ग्रीस में तापमान 45 पार, कई देशों में रेड अलर्ट और इमरजेंसी मीटिंग्स
Europe killer heat wave: यूरोप इस समय कुदरत के सबसे भयानक प्रकोप का सामना कर रहा है। पूरे महाद्वीप में जारी भीषण 'किलर हीट वेव' (Heatwave) ने अब तक 58 लोगों की जान ले ली है। ग्रीस में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिसने पिछले कई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि फ्रांस में सरकार को आपातकालीन संकट बैठकें बुलानी पड़ी हैं, जर्मनी में देशव्यापी गंभीर चेतावनी जारी की गई है और इटली में पर्यटकों व आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है। वैश्विक मौसम एजेंसियों का कहना है कि यह गर्मी आने वाले दिनों में और भी खतरनाक रूप अख्तियार कर सकती है।
यूरोप में भीषण गर्मी का संकट : देश-वार स्थिति और तापमान
फ्रांस में संकटकालीन बैठक, 2003 और 2019 की यादें ताजा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबस्टियन लेकोर्नू ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक हाई-लेवल संकटकालीन बैठक बुलाई है। राष्ट्रीय मौसम एजेंसी 'मेटीयो फ्रांस' ने चेतावनी दी है कि यह जानलेवा गर्मी अगले सप्ताह भी जारी रहेगी। मौसम विभाग ने मौजूदा स्थिति की तुलना साल 2003 और 2019 के उस भीषण दौर से की है, जब यूरोप में हजारों लोगों की मौत हुई थी। ALSO READ: भीषण गर्मी से बचने के लिए मुंबई में लोग सी-बीच पर सोने को मजबूर, IMD ने बताया कब मिलेगी राहत?
गर्मी के चलते कई सख्त कदम उठाए गए हैं:
- शराब पर प्रतिबंध : फ्रांस के कई हिस्सों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए शराब की बिक्री पर आंशिक प्रतिबंध लगा दिया गया है।
- फैन जोन बंद : स्पेन में अत्यधिक गर्मी के कारण फुटबॉल फैन जोन को पूरी तरह बंद करना पड़ा है।
- 24 घंटे खुले रहेंगे पार्क : पेरिस के प्रशासन ने लोगों को राहत देने के लिए पार्कों को चौबीसों घंटे खुला रखने का फैसला किया है।
पर्यटन बना सहनशक्ति की परीक्षा, ठंडक की तलाश में भटके लोग
आल्प्स पर्वतमाला के दूसरी ओर, इटली के प्रमुख शहरों में दैनिक जीवन और पर्यटन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। रोम की तपती धूप ने दर्शनीय स्थलों की यात्रा को एक कठिन परीक्षा में बदल दिया है। मशहूर 'कोलोसियम' के बाहर चिलचिलाती धूप में कतारों में खड़े पर्यटक बेहाल दिखे, जिसके बाद कई लोगों ने 'टेम्पल ऑफ क्लॉडियस' के आधे छिपे हुए अवशेषों के नीचे बने ठंडे भूमिगत स्थानों में जाकर जान बचाई।
वहीं, उत्तरी शहर बोलोग्ना में लोग 16वीं शताब्दी के ऐतिहासिक नेप्च्यून फव्वारे के पानी से अपना चेहरा ढकते और पोर्टिकोज़ (स्तंभों वाले बरामदों) की छांव में छिपे नजर आए। दूसरी ओर, पोलैंड की राजधानी वारसॉ में नागरिक विस्तुला नदी के किनारे गर्मी से राहत ढूंढ रहे हैं।
अर्थव्यवस्था और मानव जीवन पर दोहरी मार
वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण पूरे यूरोप में हीटवेव अब पहले से कहीं अधिक बार और अधिक घातक होकर आ रही है। यह न सिर्फ एक स्वास्थ्य आपातकाल है, बल्कि यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा झटका है। ALSO READ: Weather Update : मानसून हुआ धीमा, कई राज्यों में गर्मी की मार, बढ़ा बारिश का इंतजार
भीषण गर्मी का सीधा असर देश की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। एक तरफ जहां चिलचिलाती धूप के कारण वर्कफोर्स की उत्पादकता (Productivity) में भारी गिरावट आती है, वहीं दूसरी तरफ कूलिंग के लिए बिजली की खपत (Energy Consumption) रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ जाती है। -इमैनुएल मौलिन, गवर्नर (बैंक ऑफ फ्रांस)
मौसम पूर्वानुमानकर्ताओं के अनुसार, सोमवार को यह गर्मी अपने चरम (Peak) पर पहुंच सकती है, जिससे तापमान पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा। जर्मनी की मौसम सेवा 'डीडब्ल्यूडी' ने यह भी सचेत किया है कि इस अत्यधिक उमस और गर्मी के मेल से आने वाले दिनों में विनाशकारी आंधी-तूफान और स्प्रिंग फ्लड की स्थिति बन सकती है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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