1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. मध्यप्रदेश
  4. Madhya Pradesh politics heats up over OBC reservation.

OBC आरक्षण पर गरमाई मध्यप्रदेश की सियासत, कांग्रेस बोलीं, सरकार ने OBC की पीठ में घोंपा छुरा, सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

OBC reservation in Madhya Pradesh; politics heats up over OBC reservation
मध्यप्रदेश में OBC के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर चल रहे जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब इस पर सूबे की सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस ने हाईकोर्ट के OBC आरक्षण पर दिए फैसले को पूरी तरह सरकार की नाकामी बताया है और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कहीं है, वहीं सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन कर इस आगे की विधिक कार्यवाही की बात कही।

ओबीसी आरक्षण पर क्या है हाईकोर्ट का फैसला?- जबलपुर हाईकोर्ट ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के तक्कालीन कमलनाथ सरकार के 8 मार्च 2019 के उस अध्यादेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने OBC को 14 प्रतिशत तक सीमित रखने का फैसला सुनाया है। साथ ही, 13 प्रतिशत होल्ड पदों को तीन महीने के भीतर अनारक्षित वर्ग की चयन सूची से भरने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्प्ष्ट किया कि यह मामला पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने का नहीं, बल्कि पिछड़े वर्ग को आरक्षण की सीमा 14 फीसदी से  बढ़ाकर 27 फीसदी करने का है।

हाईकोर्ट ने कहा कि पूरा केस में कोई विशेष परिस्थितियां नहीं है। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के अनुसार कोर्ट को ऐसे विशेष हालात नहीं मिले, जिनके आधार पर आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा को पार किया जा सके। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी और जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल मामलों में दिए गए फैसलों को भी ध्यान में रखा गया। इसी आधार पर ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने वाला वर्ष 2019 का संशोधन रद्द कर दिया गया। उच्च न्यायालय ने पिछड़े  वर्ग को 14 फीसदी ही आरक्षण की पात्रता मानी है। इसके साथ हाईकोर्ट ने अपने आदेश कहा कि जितन भर्तिया सितंबर 2019 से  लेकर सितंबर 2022 तक हुई है, 27 फीसदी पिछड़े वर्ग के आरक्षण देते हुए। उसमें पिछड़े वर्ग का जो 27 फीसदी चयन हुआ है, उसे सुरक्षित रखा। 

कांग्रेस के निशाने पर सरकार-मध्यप्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पहले तक्कालीन शिवराज सरकार और अब मोहन सरकार ने ओबीसी वर्ग को आरक्षण नहीं देने की पूरी योजना बनाई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक महज दिखावा थी और सरकार ने न्यायालय में प्रभावी ढंग से पैरवी नहीं की।

हाईकोर्ट में सरकार की ओर से ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण पेश नहीं किए गए। सात करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में महज दस हजार लोगों का सर्वे कराया गया, जिसे न्यायालय ने पर्याप्त नहीं माना। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पिछले छह वर्षों में सरकार ने ओबीसी आरक्षण के लिए कोई ठोस काम नहीं किया और उसकी नाकामी के कारण पिछड़े वर्ग को नुकसान उठाना पड़ रहा है। कांग्रेस का कहना है कि हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की रिपोर्ट और केंद्र की रिपोर्ट में अंतर होने के साथ ही स्वीकृत पदों में 51 प्रतिशत पद खाली होने की बात भी कही है, जबकि इन पदों पर भर्ती होने से ओबीसी वर्ग को लाभ मिल सकता है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार ने न्यायालय के कंधे पर बंदूक रखकर ओबीसी वर्ग की पीठे में छुरा घोंपा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो खुद ओबीसी वर्ग से आते है और अगर वह ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देना चाहते है तो 24 घंटे के भीतर अध्यादेश लाए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आरएसएस से डरे हुए हैं और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ओबीसी आरक्षण देने के इच्छुक नहीं थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि सर्वदलीय बैठक में ओबीसी आरक्षण की जरूरत को लेकर हलफनामा प्रस्तुत किया गया था और बैठक में वकीलों की नियुक्ति पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। कांग्रेस ने जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले पर मंत्री प्रहलाद पटेल के बयान को भी गुमराह करने वाला बताते हुए मुख्यमंत्री से ओबीसी वर्ग के हितों के साथ न्याय करने की अपील की और चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर भाजपा को ऐसा नुकसान उठाना पड़ेगा जिसकी कल्पना उन्होंने नहीं की होगी।

भाजपा का कांग्रेस पर पलटवार- ओबीसी आरक्षण को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले पर कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर न्यायालय ने तत्कालीन कमलनाथ सरकार के आरक्षण संबंधी अध्यादेश को निरस्त किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा पिछड़े वर्ग के हितों के लिए प्रतिबद्ध रही है और ओबीसी आरक्षण के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने का काम भी पूरी जिम्मेदारी से किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी की सहमति से न्यायालय में पक्ष रखा था।

प्रहलाद पटेल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में अध्यादेश लाया, जिसमें संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की गई और 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा पार करने के लिए कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग से सहमति लेना भी उचित नहीं समझा, जिसके कारण आज यह स्थिति बनी है। न्यायालय द्वारा वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुई नियुक्तियों में कार्यरत लोगों को नौकरी से नहीं हटाने के निर्णय को उन्होंने उचित बताया। पटेल ने कहा कि भविष्य में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और समायोजन के लिए मध्य प्रदेश सरकार आवश्यक कदम उठाएगी तथा ओबीसी आरक्षण के इस महत्वपूर्ण संवैधानिक मामले में सुप्रीम कोर्ट जाकर मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। उन्होंने कांग्रेस पर प्रोपेगेंडा की राजनीति करने और ओबीसी आरक्षण की लड़ाई का श्रेय लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस किसी वर्ग की हितैषी नहीं है, बल्कि केवल अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए काम करती है।

ओबीसी वोटर कितने अहम?-मध्यप्रदेश में पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की रिपोर्ट की मुताबिक प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता लगभग 48 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश में कुल मतदाताओं में से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के मतदाता घटाने पर शेष मतदाताओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता 79 प्रतिशत है।

वहीं देश की कुल आबादी में ओबीसी जातियों की संख्या 48 से 52 फीसदी हैं और इनका रूख ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सियासी पार्टियों की जीत हार तय करता है। 2014 के बाद भाजपा लगातार ओबीसी वोटरों में अपनी पैठ बनाने में कामयाब रही है। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार,राजस्थान जैसे राज्यों में ओबीसी वोटर्स ही तय करते है कि सूबे में किसकी सरकार बनेगी। अगर इन चारों राज्यों में पिछले विधानसभा चुनावों के परिणामों का विश्लेषण करते तो साफ पता चलता है कि इन राज्यों में ओबीसी वोटर पूरी तरह भाजपा के साथ खड़ा है।
 
लेखक के बारे में
भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें
अगला लेख
दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट पर भड़के संबित पात्रा, मोदी बनाम मीर जाफर की लड़ाई बताया