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गणेश चतुर्थी 2026: गणपति को पहले दिन कौन सा भोग लगाएं, प्रसाद चढ़ाएं

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14 सितंबर से 25 सितंबर 2026 तक गणेश उत्सव का पर्व चलेगा। गणेश चतुर्थी पर भगवान श्री गणेश की स्थापना के पहले दिन (प्रथम पूज्य के आगमन पर) उन्हें उनकी सबसे प्रिय वस्तुओं का भोग लगाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। पहले दिन गणपति बाप्पा को अर्पित करने के लिए सबसे उत्तम प्रसाद और भोग।

मोदक (मुख्य भोग):

गणेश जी को मोदक अति प्रिय हैं। पहले दिन उकडीचे मोदक (चावल के आटे में गुड़ और नारियल भरकर भाप में पकाए गए मोदक) का भोग लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। यदि यह संभव न हो, तो आप मावा मोदक, बेसन मोदक या काजू मोदक का प्रसाद भी चढ़ा सकते हैं।
 

मोतीचूर या बेसन के लड्डू:

शास्त्रों के अनुसार गणेश जी को लड्डू अत्यंत प्रिय हैं। प्रथम दिन पूजा के समय उन्हें 21 या 11 मोतीचूर/बेसन के लड्डू अर्पित करें।
 

दूर्वा और गुड़-नारियल का भोग:

यदि आप विस्तृत पकवान नहीं बना पा रहे हैं, तो कच्चे नारियल के टुकड़े और गुड़ का भोग अवश्य लगाएँ। इसके साथ 21 दूर्वा (दूब घास) गणपति जी को अर्पित करना अनिवार्य माना गया है।

पंचामृत और ऋतु फल:

दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत और मौसमी फल (विशेषकर केला, सेब, और जामुन) का प्रसाद भी प्रथम दिन चढ़ाएं।
विशेष नियम: भोग लगाते समय तुलसी पत्र (तुलसी के पत्ते) का प्रयोग बिलकुल न करें। श्री गणेश की पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित माना गया है। इसके स्थान पर दूर्वा अर्पित की जाती है।
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