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सर्वपितृ अमावस्या 2019 : पितरों की शांति के लिए लगाएं ये 5 पेड़, धन-संपदा का लग जाएगा ढेर

शुक्रवार,सितम्बर 27, 2019
sarvapitru amavasya 2019
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अश्विन मास की अमावस्या तिथि अति महत्वपूर्ण होती है, इसे पितृ मोक्ष अमावस्या कहते है। इस दिन पितृ पक्ष की समाप्ति के साथ पितरों की विदाई की जाती है।
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भूले-बिसरे समस्त पितरों का इस अमावस्या को श्राद्ध किए जाने को लेकर ही इस तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। अश्‍विन माह की अमावस्या तिथि पितरों के श्राद्ध के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। आओ जानते हैं इसके बारे में 3 महत्वपूर्ण बातें।
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कर्मों के अनुसार किसी भी आत्मा को गति मिलती है। देह छोड़ गए लोगों में से बहुत से अतृप्त होते हैं। कहते हैं कि अतृप्त आत्मा को सद्गति नहीं मिलती है और वह भटकता रहता है। जानिए अतृप्त रहने के 5 कारण।
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28 सितंबर 2019, शनिवार को सर्व पितृ अमावस्या है। शनिवार के दिन अमावस्या आने के कारण श्राद्ध पक्ष की इस अमावस्या का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
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सर्वपितृ अमावस्या पर यह हैं सबसे सरल और सटीक उपाय... जरूर आजमाएं...
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पितृदोष, जिस जातक की कुंडली में यह दोष होता है उसे धन अभाव से लेकर मानसिक क्लेश तक का सामना करना पड़ता है। पितृदोष से पीड़ित जातक की उन्नति में बाधा रहती है। पितृदोष का प्रभाव कम करने के लिए सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के कई आसान, सस्ते व सरल उपाय भी हैं ...
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पितृ पक्ष में रोज तर्पण करना चाहिए। अगर प्रतिदिन संभव नहीं है तो अमावस्या के दिन इसे करना न भूलें। एक लोटे में जल भरें, जल में फूल, दूब, गुड़ और तिल मिलाएं। ये जल पितरों को अर्पित करें। जल अर्पित करने के लिए जल हथेली में लेकर अंगूठे की ओर से चढ़ाएं।
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आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष श्राद्ध अमावस्या कहते हैं। यह दिन पितृपक्ष का आखिरी दिन होता है। अगर आप पितृपक्ष में श्राद्ध कर चुके हैं तो भी सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करना जरूरी होता। आओ जानते हैं इस संबंध में 4 खास ...
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भाद्रपद माह के शुक्ल पूर्णिमा से पितृ मोक्ष अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष में कुंआरी कन्याओं द्वारा मनाया जाने वाला संजा पर्व भी हमारी विरासत है, जो मालवा-निमाड़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र आदि जगह प्रचलित है।
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गति बहुत महत्वपूर्ण है। गति होती है ध्वनि कंपन और कर्म से। यह दोनों ही स्थिति चित्त का हिस्सा बन जाती है। कर्म, विचार और भावनाएं भी एक गति ही है, जिससे चित्त की वृत्तियां निर्मित होती है। योग के अनुसार चित्त की वृत्तियों से मुक्ति होकर स्थिर हो जाना ...
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हिन्दू घरों में धूप और दीप देने की परंपरा प्राचीनकाल से ही चली आ रही है। धूप देने से मन में शांति और प्रसन्नता का विकास होता है। रोग और शोक मिट जाते हैं। गृ
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सरल शब्दों में समझा जाए तो श्राद्ध दिवंगत परिजनों को उनकी मृत्यु की तिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया जाना है। अगर किसी परिजन की मृत्यु प्रतिपदा को हुई हो तो उनका श्राद्ध प्रतिपदा के दिन ही किया जाता है।
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मुक्ति और मोक्ष में फर्क है। मुक्ति से बढ़कर है मोक्ष। मोक्ष को प्राप्त करना आसान नहीं है। जब कोई व्यक्ति अपने मृतकों का श्राद्ध करता है तो वह उसकी मुक्ति की कामना करता है। मुक्ति एक साधारण शब्द है। श्राद्ध कर्म मुक्ति कर्म है। यह क्यों किया जाता है ...
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28 सितंबर 2019, शनिवार को पितृ मोक्ष अमावस्या है। श्राद्ध पक्ष में यह अमावस्या बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। इस दिन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के निमित्त श्राद्ध किया जा सकता है,
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श्राद्ध में कौए या कौवे को छत पर जाकर अन्न जल देना बहुत ही पुण्य का कार्य है। माना जाता है कि हमारे पितृ कौए के रूप में आकर श्राद्ध का अन्न ग्रहण करते हैं। इस पक्ष में कौओं को भोजन कराना अर्थात अपने पितरों को भोजन कराना माना गया है। आओ जानते हैं कौए ...
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पितृ पक्ष की अष्टमी के दिन किसी भी ब्राह्मण सुहागन स्त्री को कलश, इत्र, जरकन, आटा, शक्कर और घी भेंट करें। इसके अलावा किसी कुंवारी कन्या को नारियल, मिश्री, मखाने भेंट करना उचित रहेगा।
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यदि आपने इस श्राद्ध में पिण्डदान नहीं किया है जो सर्वपितृ अमावस्या पर कर सकते हैं।
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यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। हिन्दू धर्म के अनुसार कर्मों की गति के अनुसार व्यक्ति को दूसरी योनि मिलती है। यदि किसी को नहीं मिली है तो फिर वह प्रेत योनि में चला जाता है या यदि अच्‍छे कर्म किए हैं तो पितृलोक या देवलोक में कुछ काल रहने के बाद पुन: ...
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श्राद्ध पक्ष में आने वाली अष्टमी को लक्ष्मी जी का वरदान प्राप्त है। यह दिन विशेष इसलिए भी है कि इस दिन सोना खरीदने का महत्व है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा सोना आठ गुना बढ़ता है।
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