E20 से भी सस्ता होगा E85 पेट्रोल! जानिए Flex Fuel Maruti Wagon R की कीमत, माइलेज और फायदे
4 जून को भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार Flex Fuel Maruti Wagon R को पेश किया गया। नई वैगन-आर पूरी तरह से E85 फ्यूल (85% तक एथेनॉल मिक्स पेट्रोल) से चलने में सक्षम है। इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन पेट्रोल और CNG वर्जन से अधिक हो सकती है। फ्लेक्स फ्यूल कारें धीरे-धीरे भारतीय बाजार में प्रवेश कर रही हैं और सरकार निर्माताओं को इन्हें बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। हालांकि ईंधन पंपों की उपलब्धता अभी भी बढ़ रही है, लेकिन अगर आप लंबे समय में स्वच्छ और किफायती ड्राइविंग चाहते हैं तो फ्लेक्स फ्यूल एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
कार को लॉन्च करते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह भी भरोसा दिया कि E85 फ्यूल की कीमत मौजूदा E20 पेट्रोल के मुकाबले काफी कम रखी जाएगी।
क्या होता है फ्लेक्स फ्यूल
फ्लेक्स फ्यूल एक वैकल्पिक ईंधन है जिसे गैसोलीन को इथेनॉल या मेथनॉल के साथ मिलाकर बनाया जाता है। ये ईंधन केवल आंतरिक दहन इंजनों के अनुकूल होते हैं और विभिन्न प्रकार के ईंधनों पर काम कर सकते हैं। यह ईंधन 85% इथेनॉल और 15% गैसोलीन (E85) का मिश्रण हो सकता है, या इन दोनों ईंधनों का कोई भी संयोजन हो सकता है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ईंधन के मिश्रण का पता लगाने और इंजन के प्रदर्शन को समायोजित करने के लिए उन्नत सेंसर और इंजन कंट्रोल मॉड्यूल (ECM) का उपयोग करते हैं।
क्यों जरूरी है एथेनॉल
एथेनॉल भारत की बड़ी आवश्कयता बनने वाला है। भारत क्रूड ऑइल का बड़ा आयातक है। एथेनॉल ब्लेंडिंग से विदेशी मुद्रा बचेगी। इथेनॉल गन्ना, मक्का आदि से बनता है। इससे किसानों को फायदा होगा। इससे कृषि आय में बढ़ोतरी के साथ-साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी, क्योंकि एथेनॉल से टेलपाइप एमिशन 70-75% तक घट जाएगा। पेट्रोल की मात्रा कम होने से ईंधन सस्ता भी हो सकता है।
कैसे है इसका इंजन
Flex Fuel Maruti Wagon R में परफॉर्मेंस के लिए एक नया 1.2-लीटर फ्लेक्स-फ्यूल पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो कि E85 एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के साथ कंपेटिबल है। इस बदलाव के कारण स्पेसिफिकेशन्स में थोड़ा अंतर आया है, जो रेगुलर 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन थोड़ी ज्यादा पावर और टॉर्क देता है।
फ्लेक्स फ्यूल कैसे काम करता है
फ्लेक्स फ्यूल वाहनों में ईंधन के मिश्रण का पता लगाने के लिए एक छोटा प्रोसेसर और सेंसर मौजूद होता है। ये मिश्रण का पता लगाने में मदद करते हैं और इंजन का कंप्यूटर इग्निशन टाइमिंग और हवा-ईंधन के मिश्रण को समायोजित करता है, जिससे इंजन का सर्वोत्तम प्रदर्शन सुनिश्चित होता है। बाई-फ्यूल इंजन में अलग-अलग ईंधनों के लिए दो अलग-अलग टैंक होते हैं, जबकि फ्लेक्स फ्यूल वाहन सभी प्रकार के मिश्रणों को एक ही टैंक में संग्रहित करता है।
कितना लाभकारी, कितना नुकसानदायक
फ्लेक्स फ्यूल ईंधन की खपत को कम कर सकता है क्योंकि इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा उत्पन्न करता है। वाहन का उचित रखरखाव न होने पर इससे इंजन में अतिरिक्त टूट-फूट भी हो सकती है। लेकिन आधुनिक फ्लेक्स फ्यूल वाहन इन मिश्रणों को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। फ्लेक्स फ्यूल में मौजूद इथेनॉल वाहनों के इंजनों पर अधिक घिसाव और दबाव डालता है। हालांकि इंजनों को फ्लेक्स फ्यूल बनाने में इस्तेमाल होने वाले ईंधनों के मिश्रण के अनुसार समायोजित करने के लिए डिज़ाइन किया जा सकता है, फिर भी ऐसे इंजनों के रखरखाव में काफी खर्च आता है। इस तकनीक में सेंसर लगे होते हैं, इसलिए इसकी आयु बढ़ाना बहुत महंगा पड़ता है। Edited by : Sudhir Sharma
