Kartik Maas Niyam: कार्तिक महीने में क्या करें और क्या न करें? जानें वो 10 काम जिनसे प्रसन्न होंगी मां लक्ष्मी
कार्तिक का महीना सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र, फलदायी और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा दिलाने वाला माना गया है। यह मौसम में बदलाव का समय भी होता है, इसलिए इस दौरान धार्मिक नियमों के साथ-साथ स्वास्थ्य से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है। अगर आप भी इस पवित्र महीने का पूरा फल पाना चाहते हैं, तो जानें कि कार्तिक मास में किन कामों को करना शुभ होता है और किन गलतियों से बचना चाहिए।
कार्तिक मास में क्या करें (जरूरी और शुभ काम)
प्रातःकाल स्नान (कार्तिक स्नान): सूर्योदय से पूर्व उठकर किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी ठंडे पानी से स्नान करना शरीर को बदलते मौसम के अनुकूल बनाता है।
नियमित दीपदान: कार्तिक को दीपों का महीना कहा जाता है। प्रतिदिन तुलसी के पास, मंदिर में और किसी नदी के घाट पर घी का दीपक जरूर जलाएं। इससे जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
तुलसी पूजन और परिक्रमा: तुलसी माता की विशेष सेवा करें। शाम के समय तुलसी जी के समक्ष घी का दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक परिक्रमा करें।
दान-पुण्य की परंपरा: इस महीने अन्नदान, वस्त्रदान और जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को भोजन कराना विशेष पुण्यदायी माना गया है।
सात्विकता और संयम: पूरे महीने ब्रह्मचर्य का पालन करें, मन को शांत रखें और सात्विक जीवन शैली अपनाएं।
कार्तिक मास में क्या करने से बचें (भूलकर भी न करें ये गलतियां)
दालों (दलहन) के सेवन से परहेज: इस महीने उड़द, मूंग, मसूर की दाल और मटर जैसी चीजों का सेवन वर्जित होता है। पाचन तंत्र के लिहाज से भी ठंड के शुरुआती दिनों में हल्का भोजन बेहतर माना जाता है।
तामसिक भोजन का त्याग: मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक आहार से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।
शरीर पर तेल लगाने से बचें: शास्त्रों के अनुसार, नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) के दिन को छोड़कर पूरे कार्तिक माह में शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए।
दोपहर में सोने की सख्त मनाही: इस दौरान दोपहर के समय सोने से बचें। सुबह जल्दी उठकर ईश्वर का ध्यान, पूजा-पाठ और जप-तप करने की सलाह दी जाती है।
क्रोध और वाद-विवाद से दूर रहें: मन में ईर्ष्या, क्रोध या किसी से वाद-विवाद न करें। अपने विचारों और वाणी में मधुरता बनाए रखें।

