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वृंदावन में कब है पावन राधा कुंड स्नान? जानिए मध्यरात्रि स्नान का शुभ मुहूर्त और पूजा की संपूर्ण विधि

Learn about auspicious timing for bathing at Radha Kund and complete procedure for worship
श्री राधा कुंड स्नान 2026: राधा कुंड को श्री राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां कार्तिक मास में अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि को होने वाले पावन स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु राधा रानी के दर्शन, पूजा-अर्चना और स्नान के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से संतान सुख की कामना वाले दंपति इस परंपरा में श्रद्धापूर्वक भाग लेते हैं। राधा कुंड स्नान का मुख्य आयोजन 1 नवंबर की रात को होगा। आइए जानते हैं मध्यरात्रि पावन राधा कुंड स्नान का शुभ मुहूर्त और पूजा की संपूर्ण विधि...
 
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 01 नवंबर, 2026 को दोपहर 02:51 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 02 नवंबर, 2026 को दोपहर 01:10 बजे
 
राधा कुंड स्नान : 1 नवंबर रविवार, 2026 को
राधा कुंड अर्ध रात्रि स्नान मुहूर्त: रात्रि 11:37 से 12:29 बजे तक
 

राधा कुंड स्नान की संपूर्ण पूजा विधि

पूजा की तैयारी
  • स्नान से पहले स्वच्छ वस्त्र तैयार रखें और पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री एकत्र कर लें।
  • पूजा के लिए फूल, दीपक, धूप, रोली, अक्षत, फल, मिठाई और स्वच्छ जल रख सकते हैं।
  • राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए मन को शांत करें।
  • श्रद्धा अनुसार संतान सुख, परिवार की मंगलकामना का संकल्प लें।

राधा रानी का स्मरण और पूजन

  • राधा कुंड के घाट पर पहुंचकर श्रद्धापूर्वक राधा रानी को प्रणाम करें।
  • सुरक्षित स्थान पर दीप प्रज्वलित करें।
  • फूल अर्पित करें और राधा-कृष्ण के नाम का जप करें।
  • परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
  • इस दौरान 'राधे राधे' का स्मरण कर सकते हैं।

मध्यरात्रि में पावन स्नान

  • 1 नवंबर 2026 की रात निर्धारित स्नान मुहूर्त से पहले घाट पर पहुंचने का प्रयास करें।
  • स्नान करते समय राधा रानी का स्मरण करें और मन ही मन प्रार्थना करें।

कूष्मांड यानी सफेद पेठे का अर्पण

  • राधा कुंड स्नान की कुछ प्रचलित परंपराओं में कूष्मांड यानी सफेद पेठे का विशेष महत्व बताया जाता है।
  • इसे राधा रानी के प्रति श्रद्धा और मनोकामना की प्रार्थना के प्रतीक के रूप में अर्पित किया जाता है।

संतान सुख और सुख-समृद्धि की कामना

मान्यता है कि अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि में राधा कुंड में स्नान करके राधा रानी से संतान सुख और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्रद्धालु इस अवसर को राधा रानी और श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने का विशेष पर्व मानते हैं।

राधा कुंड स्नान का महत्व

राधा कुंड का संबंध श्री राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं से माना जाता है। यह कुंड गोवर्धन क्षेत्र में श्याम कुंड के समीप स्थित है। गौड़ीय वैष्णव परंपरा में राधा कुंड को विशेष रूप से पूजनीय स्थान प्राप्त है।
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